नेपाली टेलीकॉम कंपनियां इंडिया पर भारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसे भारतीय दूर संचार कंपनियों की काहिली कहें अथवा नेपाली टेलीकॉम कंपनियों की एडवांस तकनीकी कि बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को अपने ही देश में बात करने के लिए सवा दो रुपये प्रति मिनट की दर से भुगतान नेपाल को करना पड़ रहा है।
देश की अंतिम छोर पर बसे सोनौली शहर में बीएसएनएल के टावर तो लगे हैं, मगर उपभोक्ताओं के मोबाइल में उसका नेटवर्क नहीं आता, जबकि नेपाली टेलीकॉम और नेपाल में निजी क्षेत्र की सेल्युलर कंपनी एनसीईएल का टावर न होने के बाद भी इन कंपनियों का सोनौली शहर में भरपूर नेटवर्क मिलता है।
मजबूरन लोगों को नेपाली सिम का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसकी कॉल दर करीब सवा दो रुपये प्रति मिनट पड़ती है।
'बॉर्डर पर कुछ तकनीकी दिक्कते हैं'
कुछ यही हाल बाकी भारतीय दूरसंचार कंपनियों का भी है। उनके नेटवर्क पर भी नेपाली कंपनियों का नेटवर्क भारी पड़ रहा है। शुक्रवार को सोनौली के कौशलेंद्र प्रताप त्रिपाठी व संतोष वर्मा, विजय जायसवाल, रमेश यादव आदि ने बीएसएनएल के महाप्रबंधक से मुलाकात कर समस्या के बारे में अवगत कराते हुए कहा कि उन्हें अपने ही देश में बात करने के लिए नेपाली सेल्युलर कंपनियों के सिम का उपयोग करना पड़ता है।
"बॉर्डर पर कुछ तकनीकी दिक्कते हैं, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। दिक्कत दूर होने पर नेटवर्क काम करने लगेगा।"
- जीपी त्रिपाठी, जीएम, बीएसएनएल