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Sharad Yadav Death: न नदी में विसर्जित होंगी अस्थियां, न कोई मृत्यु भोज, बच्चों ने पूरी की शरद यादव की इच्छा
Mon, 16 Jan 2023 09:57 PM IST
शक्तिराज सिंह
डीजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डीजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Mon, 16 Jan 2023 09:57 PM IST
सार
स्वर्गीय शरद यादव के अस्थि कलश नदी में विसर्जित करने के स्थान पर देश के दो स्थानों पर जमीन में दबाए जाएंगे।
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शरद यादव
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश के प्रख्यात समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के परिवार ने सोमवार को बताया कि उनके स्वर्गीय शरद यादव के अस्थि कलश नदी में विसर्जित करने के स्थान पर देश के दो स्थानों पर जमीन में दबाए जाएंगे। स्वर्गीय यादव की बेटी सुभाषिनी और पुत्र शांतनु यादव की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उनके पिता लिंग भेद के खिलाफ थे। वे चाहते थे कि उनके देहांत पर उनके दोनों बच्चे उन्हें मुखाग्नि दें, इसी क्रम में दोनों भाई-बहनों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार के समय उन्हें मुखाग्नि दी।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि, स्व.शरद यादव ताउम्र प्रकृति के बेहद करीब रहे। उन्हें नदियों, पेड़-पौधों और पशुओं के साथ-साथ अपने जन्मभूमि और कर्मभूमि से बेहद लगाव था। उनकी हमेशा से एक इच्छा रही थी कि जब भी उनका देहावसान हो तो उनकी अस्थियों को नदी में बहाने की बजाए उनकी जन्मभूमि बाबई और कर्मभूमि मधेपुरा में जमीन के अंदर दबा दिया जाए। उनका मानना था कि अस्थियों को नदी में बहाने से वह दूषित होती हैं और यह प्रकृति के खिलाफ है।
उनकी भावनाओं के अनुरूप हमने उनकी अस्थियों को दो कलश के अंदर संग्रह किया है। एक कलश उनके पैतृक गांव में जहां उनका दाहसंस्कार हुआ है वहां स्थापित कर दिया और दूसरे कलश को उनकी कर्मभूमि मधेपुरा पटना से सड़क मार्ग द्वारा मंडल मसीहा के समर्थकों के अंतिम दर्शन हेतु लेकर जाया जायेगा जिसकी सूचना सभी के साथ जल्द ही साझा कर दी जाएगी। तदपश्चात मधेपुरा में कलश को जमीन के अंदर स्थापित किया जाएगा।
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परिवार के सदस्यों ने कहा कि, स्व.शरद यादव मरणोपरांत भोज कार्यक्रम के खिलाफ थे। उनका मानना था कि इससे समाज में खाई बढ़ती है। चाहे अमीर हो या गरीब सबको सम्मान का अधिकार होना चाहिए। जो सक्षम हैं उनके द्वारा भोज के आयोजन से गरीबों को भी इस प्रथा का अनुसरण करना पड़ता है। गरीब सक्षम नहीं होते और उनपर कर्ज तथा आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसलिए भोज प्रथा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। स्व.शरद यादव के इस महान विचार को आगे बढ़ाते हुए हमने उनका भोज कार्यक्रम नहीं रखने का निर्णय लिया इसके बदले दिल्ली में छतरपुर स्थित आवास पर एक शोक सभा बैठक का आयोजन किया जाएगा।
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परिवार के सदस्यों ने बताया कि, स्व.शरद यादव ताउम्र प्रकृति के बेहद करीब रहे। उन्हें नदियों, पेड़-पौधों और पशुओं के साथ-साथ अपने जन्मभूमि और कर्मभूमि से बेहद लगाव था। उनकी हमेशा से एक इच्छा रही थी कि जब भी उनका देहावसान हो तो उनकी अस्थियों को नदी में बहाने की बजाए उनकी जन्मभूमि बाबई और कर्मभूमि मधेपुरा में जमीन के अंदर दबा दिया जाए। उनका मानना था कि अस्थियों को नदी में बहाने से वह दूषित होती हैं और यह प्रकृति के खिलाफ है।
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उनकी भावनाओं के अनुरूप हमने उनकी अस्थियों को दो कलश के अंदर संग्रह किया है। एक कलश उनके पैतृक गांव में जहां उनका दाहसंस्कार हुआ है वहां स्थापित कर दिया और दूसरे कलश को उनकी कर्मभूमि मधेपुरा पटना से सड़क मार्ग द्वारा मंडल मसीहा के समर्थकों के अंतिम दर्शन हेतु लेकर जाया जायेगा जिसकी सूचना सभी के साथ जल्द ही साझा कर दी जाएगी। तदपश्चात मधेपुरा में कलश को जमीन के अंदर स्थापित किया जाएगा।
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परिवार के सदस्यों ने कहा कि, स्व.शरद यादव मरणोपरांत भोज कार्यक्रम के खिलाफ थे। उनका मानना था कि इससे समाज में खाई बढ़ती है। चाहे अमीर हो या गरीब सबको सम्मान का अधिकार होना चाहिए। जो सक्षम हैं उनके द्वारा भोज के आयोजन से गरीबों को भी इस प्रथा का अनुसरण करना पड़ता है। गरीब सक्षम नहीं होते और उनपर कर्ज तथा आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसलिए भोज प्रथा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। स्व.शरद यादव के इस महान विचार को आगे बढ़ाते हुए हमने उनका भोज कार्यक्रम नहीं रखने का निर्णय लिया इसके बदले दिल्ली में छतरपुर स्थित आवास पर एक शोक सभा बैठक का आयोजन किया जाएगा।