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नीट पेपर लीक: नौ दिनों की सीबीआई हिरासत में मोटेगांवकर, देशव्यापी नेटवर्क के बड़े राजदारों से पूछताछ शुरू
Mon, 18 May 2026 08:58 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 18 May 2026 08:58 PM IST
सार
नीट-यूजी पेपर लीक के मुख्य नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सीबीआई को मोटेगांवकर की नौ दिनों की रिमांड मिल गई है। दावा किया जा रहा है कि आरोपी केवल मोहरा नहीं बल्कि प्रश्नपत्रों को बांटने वाला मुख्य जरिया था, जिससे अब पूरे रैकेट के सरगनाओं का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।
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NEET
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक मामले में सीबीआई को एक बड़ी कामयाबी मिली है। जांच एजेंसी की विशेष दलील के बाद अदालत ने आरोपी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को नौ दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। सीबीआई ने अदालत में कहा कि मोटेगांवकर इस पूरे अपराध का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
केवल मोहरा नहीं बल्कि मुख्य कड़ी है आरोपी
जांच एजेंसी के अनुसार शिवराज मोटेगांवकर केवल एक सामान्य कड़ी नहीं है। वह लीक हुए प्रश्नपत्रों और उनसे जुड़ी सामग्री को आगे बढ़ाने में सक्रिय था। उसने इस अवैध सामग्री के प्रसार में बड़ी भूमिका निभाई। सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी से सघन पूछताछ बेहद जरूरी है। इससे इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब किया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें: NEET-UG Paper Leak: पेपर लीक मामले की जांच के लिए NTA प्रमुख तलब, संसदीय समिति करेगी समीक्षा
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जांच के तीन मुख्य बिंदु जिस पर टिकी है नजर
अदालत से हिरासत मिलने के बाद सीबीआई अब तीन मुख्य सवालों के जवाब तलाश रही है। पहला यह कि पेपर लीक को किसने और कैसे अंजाम दिया? दूसरा यह कि लीक प्रश्नपत्र को किन-किन लोगों और केंद्रों तक पहुंचाया गया? तीसरा और सबसे अहम यह कि इस पूरे रैकेट के पीछे मुख्य रूप से कौन-कौन शामिल है?
देश भर के छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला
यह मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा और इसकी निष्पक्षता से जुड़ा है। सीबीआई इस नेटवर्क के हर छोटे-बड़े तार को जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में मोटेगांवकर से होने वाली पूछताछ में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
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केवल मोहरा नहीं बल्कि मुख्य कड़ी है आरोपी
जांच एजेंसी के अनुसार शिवराज मोटेगांवकर केवल एक सामान्य कड़ी नहीं है। वह लीक हुए प्रश्नपत्रों और उनसे जुड़ी सामग्री को आगे बढ़ाने में सक्रिय था। उसने इस अवैध सामग्री के प्रसार में बड़ी भूमिका निभाई। सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी से सघन पूछताछ बेहद जरूरी है। इससे इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब किया जा सकेगा।
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जांच के तीन मुख्य बिंदु जिस पर टिकी है नजर
अदालत से हिरासत मिलने के बाद सीबीआई अब तीन मुख्य सवालों के जवाब तलाश रही है। पहला यह कि पेपर लीक को किसने और कैसे अंजाम दिया? दूसरा यह कि लीक प्रश्नपत्र को किन-किन लोगों और केंद्रों तक पहुंचाया गया? तीसरा और सबसे अहम यह कि इस पूरे रैकेट के पीछे मुख्य रूप से कौन-कौन शामिल है?
देश भर के छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला
यह मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा और इसकी निष्पक्षता से जुड़ा है। सीबीआई इस नेटवर्क के हर छोटे-बड़े तार को जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में मोटेगांवकर से होने वाली पूछताछ में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।