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Legal History of India: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का आह्वान, देश के सही कानूनी इतिहास को समझने की जरूर

Sun, 23 Jun 2024 05:35 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 23 Jun 2024 05:35 PM IST
सार

Legal History of India: चेन्नई में एक समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश के सही कानूनी इतिहास को समझने की जरूरत हैं। क्योंकि मौजूदा कानून व्यवस्था को औपनिवेशिक शासकों के नजरिए से स्थापित की गई थी।

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Need to understand the correct legal history of India: Union Minister Arjun Ram Meghwal
देश के सही कानूनी इतिहास को समझने की जरूरत- अर्जुन राम मेघवाल - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वंडालूर में 'आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन में भारत का प्रगतिशील मार्ग' पर आयोजित सम्मेलन में देश के सही कानूनी इतिहास को समझने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में औपनिवेशिक समय में बनाए गए कानून में भारतीय स्वाभाव और सामाजिक वास्तविकताओं की अनदेखी की गई। वो कानून सिर्फ औपनिवेशिक शासकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही बनाए गए थे।
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'एक जुलाई से देश में लागू होंगे तीन नए कानून'
ये सेमिनार दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता में आयोजित सेमिनार के श्रृखंला का चौथा सेमिनार था। जिसमें हाईकोर्ट के जज, वकील, शिक्षाविद, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि और छात्रों ने हिस्सा लिया। इस सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने गुलामी की मानसिकता वाले पुराने कानूनों को हटाकर भारतीयता और न्याय की मूल भावना को समाहित करते हुए तीन नए कानून बनाए हैं। जिनमें भारतीय न्यायिक संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम शामिल हैं, जिन्हें 1 जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
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'बिना सोचे-समझे लागू किया गया आयरिश दंड संहिता'
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कानूनी प्रणाली का विकास, विशेष रूप से 1757 में प्लासी की लड़ाई से लेकर ब्रिटिश शासन के तहत आपराधिक न्याय, डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स, कानूनों का संहिताकरण आदि जैसे कानूनों की शुरूआत देश में औपनिवेशिक शासन के अनुकूल और उसे कायम रखने के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि आयरिश दंड संहिता को बिना सोचे-समझे भारत में लागू किया गया, जबकि तत्कालीन भारत में व्याप्त वास्तविकताओं से अनजान थे।
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'आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली लागू किया जाना जरूरी'
अर्जुन राम मेघवाल ने आगे कहा कि चूंकि भारत विश्वगुरु और राष्ट्रों के समुदाय के नेता के रूप में अपना उचित स्थान लेने का प्रयास कर रहा है, इसलिए ये जरूरी है कि औपनिवेशिक विरासत के सभी अवशेषों को मिटा दिया जाए और एक आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली लागू किया जाए। इस सेमिनार को संबोधित करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने कहा कि आजादी के करीब आठ दशक बाद देश को अपनी न्याय प्रणाली और औपनिवेशिक युग के कानूनों को बदलने की पहल की जरूरत है। वहीं इस दौरान इस सेमिनार में विधिक मामलों के विभाग के सचिव राजीव मणि ने भी शिरकत की और इस मुद्दे पर अपने विचार रखें।
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