{"_id":"5f7b88a58ebc3e679f0b9096","slug":"nearly-five-thousand-criminal-cases-against-former-and-current-mps-mlas","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व और मौजूदा सांसदों-विधायकों पर करीब पांच हजार आपराधिक मुकदमे","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पूर्व और मौजूदा सांसदों-विधायकों पर करीब पांच हजार आपराधिक मुकदमे
Tue, 06 Oct 2020 04:27 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 06 Oct 2020 04:27 AM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने रखी रिपोर्ट, पिछले दो वर्ष में तेजी से बढ़े मामले
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में पूर्व व मौजूद सांसदों और विधायकों पर 4,859 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनकी सुनवाई हाईकोर्ट की निगरानी में जल्द पूरी करवाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की 2016 में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पेश एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्ष में इन माननीयों के खिलाफ आपराधिक मामले तेजी से बढ़ें। मार्च 2020 में यह संख्या 4,442 थी। पांच महीने में ही आपराधिक मुकदमों की संख्या में 417 का इजाफा हो गया।
विज्ञापन
दिसंबर 2018 में दी गई इस तरह की ही रिपोर्ट में पूर्व व मौजूदा सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों की संख्या 4122 थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि शीर्ष अदालत द्वारा निगरानी करने के बावजूद दो वर्षो में मुकदमों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। याचिका में न्यायमित्र बनाए गए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने यह रिपोर्ट दी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा व पूर्व सांसदों-विधायकों पर दर्ज मामलों की सुनवाई में बहुत देर की जा रही है। कुछ हाईकोर्ट ने इसके लिए हर जिले में विशेष न्यायालय बनाने की वकालत की है ताकि इन्हें प्राथमिकता से सुना जा सके। हाईकोर्टों ने गवाहों के परीक्षण के लिए विशेष सुरक्षित कक्ष बनाने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा देने का भी समर्थन किया है। हालांकि, इसके लिए फंड की कमी है। उन्होंने राज्य सरकारों को लिखा है कि इन मामलों के लिए हर अदालत में नोडल अभियोजन अधिकारी व विशेष लोक अभियोजक तैनात करें।
विज्ञापन
केंद्र ने तो यथास्थिति रिपोर्ट तक नहीं दी
रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या अन्य केंद्रीय एजेंसियों के पास इन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों की मौजूदा स्थिति व समयबद्ध सुनवाई के बारे में केंद्र सरकार ने यथास्थिति रिपोर्ट तक नहीं दी है।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश: माननीयों के खिलाफ सर्वाधिक लंबित मुकदमे
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व व मौजूदा सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में लंबित मुकदमे सबसे अधिक है। देश में लंबित कुल 4,859 मुकदमों में से उत्तर प्रदेश में 1,374 हैं। वहीं दूसरे स्थान पर बिहार है, जहां पूर्व व मौजूदा सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ 557 मुकदमे लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में इलाहाबाद स्थित स्पेशल कोर्ट में आसपास के 12 जिलों के मामलों पर सुनवाई हो रही है। यहां 300 मुकदमे लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में 85 मुकदमों पर रोक लगी हुई है। हाईकोर्ट द्वारा कहा गया है कि ऐसे मामलों को सूचीबद्ध करने के लिए जल्द निर्देश दिए जाएंगे और चार हफ्ते में उन मामलों को निपटाने के लिए कहा जाएगा।
हाईकोर्ट से निवेदन किया गया है कि अन्य जिलों के लिए विशेष अदालतें बना कर मुकदमों को बोझ कम करें। हाईकोर्ट ने बताया है कि कुछ मामलों के आरोपी दूसरे जिलों या राज्यों में रह रहे हैं, इसलिए भी देरी होती है। इसके लिए सुझाया गया है कि यूपी सरकार इन अदालतों को इलेक्ट्रॉनिक सुविधाएं देकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई करा सकती है ताकि आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति न होने से केस नहीं रुके।
दिल्ली मे चार विशेष अदालतें बनाने पर विचार
यहां सत्र न्यायालय के स्तर पर 25 और मजिस्ट्रेट के स्तर पर 62 मामले लंबित हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामले भी शामिल हैं। हाईकोर्ट यहां चार विशेष अदालतें बनाने पर विचार कर रहा है।
अन्य राज्य: कहीं पुलिस वारंट तामील नहीं करवाती तो कहीं मुकदमों का बोझ
- केरल में हाईकोर्ट को खुद कहना पड़ा कि पुलिस विभाग सांसदों-विधायकों पर वारंट के बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का इच्छुक नजर नहीं आता। ऐसे में एसपी को वारंट तामील करवाने की जिम्मेदारी देने के निर्देश दिए जाने चाहिए।
- पंजाब में 10 और हरियाणा के आठ मामलों की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है।
- बंगलूरू में एक ही विशेष अदालत है, जिसके पास 165 मामले हैं।
- पश्चिम बंगाल में भी बारासात में विशेष अदालत बनी, जहां 134 मामलों का ट्रायल हो रहा है।