NCRB: महिला अपराध दर में तेलंगाना सबसे आगे, आबादी के कारण यूपी में मामले सर्वाधिक
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। महिला अपराध दर के मामले में तेलंगाना सबसे आगे है। आबादी के कारण यूपी में मामले सर्वाधिक हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक दुष्कर्म के 29,670 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि दहेज हत्या के मामलों में 6,156 एफआईआर दर्ज कराए गए हैं। एक नजर इस रिपोर्ट की प्रमुख बातों पर
विस्तार
देश में महिला अपराधों में कमी नहीं आई है। चाहे दहेज हत्याएं हों या घरेलू हिंसा, मामले अब भी तेजी से दर्ज हो रहे हैं। 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,48,211 केस दर्ज किए गए, जो 2022 की तुलना में लगभग तीन हजार ज्यादा हैं। महिला अपराध दर के मामले में जहां तेलंगाना सबसे आगे रहा, वहीं आबादी के कारण उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए।
उत्तर प्रदेश में आबादी के कारण सर्वाधिक मामले
तेलंगाना में प्रति लाख महिला जनसंख्या पर अपराध की दर 124.9 फीसदी रही। उत्तर प्रदेश में 66,381 केस दर्ज किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 47,101, राजस्थान में 45,450, पश्चिम बंगाल में 34,691 और मध्य प्रदेश में 32,342 अपराध दर्ज किए गए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक, ये आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस रिकॉर्ड से संकलित हैं, जो बताते हैं कि 2022 में देश में महिला अपराध जहां 4,45,256 दर्ज हुए वहीं, 2021 में यह आंकड़ा 4,28,278 था।
अलग-अलग राज्यों का हाल
2023 में प्रति लाख महिला जनसंख्या पर अपराध की औसतन 66.2 घटनाएं दर्ज की गईं और आरोपपत्र दाखिल करने की दर 77.6 फीसदी रही। इसके अलावा, पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के मामले 19.7 फीसदी दर के साथ सबसे ज्यादा रहे। वहीं, अपहरण के 88,605 केस दर्ज किए गए, जिनकी दर 13.1 थी। वहीं, राजस्थान में यह 114.8, ओडिशा में 112.4, हरियाणा में 110.3 और केरल में 86.1 रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं पर शील भंग करने के इरादे से हमले के 83,891 केस दर्ज किए गए, जबकि दुष्कर्म के 29,670 और दहेज हत्या के कुल 6,156 केस दर्ज किए गए। आत्महत्या के लिए उकसाने के 4,825 मामले दर्ज किए गए।
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9.2 % की वृद्धि बच्चों के खिलाफ अपराधों में
बच्चों के खिलाफ अपराधों में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कुल 1,77,335 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें प्रति लाख बच्चे अपराध दर 36.6 से बढ़कर 39.9 हो गई। 2023 में 19 शहरों में कुल 9,44,291 अपराध हुए। इनमें 2022 की तुलना में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, उस दौरान 8,53,470 मामले दर्ज किए गए थे।
- क्षेत्रीय रूप से मध्य प्रदेश 22,393 कुल मामलों के साथ सूची में शीर्ष पर रहा। इसके बाद महाराष्ट्र (22,390), उत्तर प्रदेश (18,852), असम (10,174) और बिहार (9,906 मामले) का स्थान रहा।
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (143.4) और दिल्ली (140.3) जैसे केंद्रीय राज्य /केंद्र शासित प्रदेशों में मामले अधिक थे। इनमें केवल दिल्ली में ही 7,769 मामले दर्ज हुए।
वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध
देश में 2023 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध के 27,886 मामले दर्ज हुए। हालांकि, ये मामले 2022 में 28,545 थे। वहीं, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में सबसे अधिक संख्या में मामले दर्ज किए गए। इनमें चोरी के (4,130, 14.8 प्रतिशत) और (जालसाजी, धोखाधड़ी और ठगी के 3,473 मामले थे।
- मध्य प्रदेश में 5,738, महाराष्ट्र में 5,115, तमिलनाडु में 2,104 और कर्नाटक में 1,840 मामले दर्ज किए गए। संघ शासित प्रदेशों में दिल्ली 1,361 मामलों के साथ शीर्ष पर रही।
77.6% रही आरोपपत्र दाखिल करने की दर:
| अपराध | दर्ज केस |
|---|---|
| दहेज हत्या | 6,156 |
| शील भंग | 8,823 |
| दुष्कर्म का प्रयास | 2,796 |
| एसिड अटैक | 113 |
| दहेज प्रताड़ना | 15,489 |
| घरेलू हिंसा | 632 |
अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध बढ़े, 12960 केस दर्ज हुए एसटी के खिलाफ अपराध के
देश में 2023 में ना सिर्फ साइबर अपराधों में तेजी आई बल्कि अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध में भी बढ़ोतरी दर्ज गई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में देश में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ अपराध में 28 फीसदी की वृद्धि हुई। यह 2022 में 10,064 मामलों से बढ़कर 2023 में 12,960 हो गए। वहीं, साइबर अपराधों में 31.2 फीसदी की वृद्धि हुई। वर्ष 2023 में साइबर अपराधों के 86,420 केस दर्ज किए गए थे, जबकि 2022 में 65,893 केस दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हत्या के मामलों में 2.8 फीसदी की कमी आई। साल 2022 में देश में हत्या के 28,522 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 में घटकर 27,721 रह गए। वहीं, अपहरण के 1.16 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से लगभग 18,000 मामले ऐसे हैं, जिनमें शामिल 9,000 बच्चे और 8,800 वयस्कों की अपनी मर्जी थी।
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कृषि श्रमिकों की आत्महत्या के मामले बढ़े, किसानों के घटे
देश में साल 2023 में कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के 10,786 मामले सामने आए। इनमें 4,690 किसानों और 6,096 कृषि श्रमिक शामिल हैं यानी देश में हर महीने औसतन 30 किसानों यानी प्रतिदिन करीब एक किसान ने अपनी जान दी है। 2023 में देश में कुल 1,71,418 आत्महत्याओं में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत है। 2023 में जान देने वाले 4,690 किसानों में से 4,553 पुरुष और 137 महिलाएं थीं। इसी तरह आत्महत्या करने वाले 6,096 कृषि मजदूरों में 5,433 पुरुष और 663 महिलाएं थीं।
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सड़क दुर्घटनाओं में 1.73 लाख लोगों ने गंवाई जान
देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में 1.73 लाख से अधिक लोग मारे गए और 4,47,969 अन्य घायल हुए। इनमें से 45.8 प्रतिशत पीड़ित दोपहिया वाहन पर सवार थे, जबकि तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं के दो प्रमुख कारण पाए गए। देश में 2023 में कुल 4,64,029 में से 95,984 सड़क दुर्घटनाएं शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच दर्ज की गईं, जो कुल सड़क दुर्घटनाओं का 20.7 प्रतिशत है।