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तेलंगाना हाईकोर्ट ने रद्द की दानम नागेंद्र की विधायकी: पलटा स्पीकर का फैसला, बीआरएस-भाजपा का कांग्रेस पर हमला
Fri, 18 Sep 2026 10:06 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:06 PM IST
सार
तेलंगाना हाई कोर्ट ने खैरताबाद विधायक दानम नागेंद्र को दलबदल मामले में अयोग्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को रद्द करते हुए उनकी सदस्यता 23 अप्रैल 2024 से समाप्त मानी। फैसले के बाद बीआरएस और भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है।
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तेलंगाना हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए विधायक दानम नागेंद्र को अयोग्य घोषित कर दिया है। इस बड़े अदालती फैसले के बाद विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर कड़ा हमला बोला है।
चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के नेतृत्व वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इसी साल मार्च में नागेंद्र की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं को खारिज किया गया था। कोर्ट ने नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से अयोग्य माना है। वह हैदराबाद की खैरताबाद सीट से बीआरएस विधायक थे, लेकिन उन्होंने बीआरएस विधायक रहते हुए ही 2024 में कांग्रेस के टिकट पर सिकंदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीआरएस कार्यकर्ताओं ने हैदराबाद स्थित पार्टी मुख्यालय पर जमकर पटाखे फोड़े। पार्टी ने इसे सत्य और लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने 'एक्स' पर लिखा, 'सत्यमेव जयते! कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र को हाईकोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया है। बाकी दलबदल करने वालों का भी जल्द ही यही हश्र होगा।'
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दूसरी ओर, भाजपा नेता और केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने इसे राज्य की कांग्रेस सरकार के चेहरे पर करारा तमाचा बताया। हालांकि, उन्होंने बीआरएस और कांग्रेस दोनों को एक जैसा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बीआरएस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों ने हमेशा खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दिया है।
ये भी पढ़ें: नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान गिरफ्तार, ममता बनर्जी ने किया था समर्थन का एलान
रेड्डी ने कहा कि स्वार्थ की राजनीति की शुरुआत बीआरएस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने की थी। उन्होंने कहा कि पिछले बीआरएस शासन में दल बदलने वाले नेताओं को तुरंत इनाम दिया गया था, जैसे सबिता इंद्रा रेड्डी को दलबदल के फौरन बाद मंत्री पद सौंप दिया गया था।
इस बीच, दानम नागेंद्र ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संघर्ष उनके लिए कोई नई बात नहीं है। जब भी चुनाव की तारीखें आएंगी, वह मैदान में उतरेंगे और जीतेंगे। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी इस पर कोई विचार नहीं किया है और वे सीधे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
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चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के नेतृत्व वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इसी साल मार्च में नागेंद्र की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं को खारिज किया गया था। कोर्ट ने नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से अयोग्य माना है। वह हैदराबाद की खैरताबाद सीट से बीआरएस विधायक थे, लेकिन उन्होंने बीआरएस विधायक रहते हुए ही 2024 में कांग्रेस के टिकट पर सिकंदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीआरएस कार्यकर्ताओं ने हैदराबाद स्थित पार्टी मुख्यालय पर जमकर पटाखे फोड़े। पार्टी ने इसे सत्य और लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने 'एक्स' पर लिखा, 'सत्यमेव जयते! कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र को हाईकोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया है। बाकी दलबदल करने वालों का भी जल्द ही यही हश्र होगा।'
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दूसरी ओर, भाजपा नेता और केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने इसे राज्य की कांग्रेस सरकार के चेहरे पर करारा तमाचा बताया। हालांकि, उन्होंने बीआरएस और कांग्रेस दोनों को एक जैसा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बीआरएस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों ने हमेशा खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दिया है।
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रेड्डी ने कहा कि स्वार्थ की राजनीति की शुरुआत बीआरएस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने की थी। उन्होंने कहा कि पिछले बीआरएस शासन में दल बदलने वाले नेताओं को तुरंत इनाम दिया गया था, जैसे सबिता इंद्रा रेड्डी को दलबदल के फौरन बाद मंत्री पद सौंप दिया गया था।
इस बीच, दानम नागेंद्र ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संघर्ष उनके लिए कोई नई बात नहीं है। जब भी चुनाव की तारीखें आएंगी, वह मैदान में उतरेंगे और जीतेंगे। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी इस पर कोई विचार नहीं किया है और वे सीधे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।