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एनसीआरबी रिपोर्ट: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के 65.90 फीसदी कैदी देश की जेलों में बंद

Wed, 10 Feb 2021 08:57 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Wed, 10 Feb 2021 08:57 PM IST
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NCRB report: 65 point 90 percent of prisoners belonging to sc, st and obc categories imprisoned in indian jails
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2019 में देश की जेलों में बंद कैदियों के आंकड़ों से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार देश की जेलों में बंद 4,78,600 कैदियों में से 3,15,409 (कुल 65.90 फीसदी) कैदी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के हैं।

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गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार को राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने बताया कि यह आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा, 31 दिसंबर 2019 तक अद्यतन किए गए आंकड़ों के संकलन पर आधारित हैं।
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उन्होंने बताया कि देश की जेलों में बंद 4,78,600 कैदियों में से 3,15,409 कैदी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के हैं जबकि शेष 1,26,393 कैदी अन्य समूहों से हैं।
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रेड्डी ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार, 1,62,800 कैदी (34.01 फीसदी) अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं जबकि 99,273 कैदी (20.74 फीसदी) अनुसूचित जाति से और 53,336 कैदी (11.14 फीसदी) अनुसूचित जनजाति से हैं। उन्होंने बताया कि कुल 4,78,600 कैदियों में से 4,58,687 कैदी (95.83 फीसदी) पुरुष और 19,913 कैदी (4.16 फीसदी) महिलाएं हैं।

एनसीआरबी की इस रिपोर्ट के अलावा एक अन्य रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत की जेलों में बंद 69 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत की जेलों में बंद हर दस में से साल कैदी अंडरट्रायल हैं। यह वे बंदी हैं, जिन्हें अदालत से सजा नहीं मिली है, लेकिन जेल में बंद हैं।

यह कैदी ट्रायल प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि इनमें से कई कैदी बरी होकर बाहर आ जाएं। हालांकि, धीमी न्यायिक प्रक्रिया, संसाधनों की कमी की वजह से इन्हें अपनी जिंदगी जेल में गुजारनी पड़ रही है।


यह बात इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2020 के अध्ययन में सामने आई है। हाल ही में टाटा ट्रस्ट ने कुछ अन्य संस्थानों के सहयोग से इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2020 जारी की है। यह रिपोर्ट देश के अलग-अलग राज्यों की न्याय करने की क्षमता का आकलन करती है। 

 

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