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NCRB Report 2020: एक साल में डूबे 32271 लोग, 13378 लोगों की करंट लगने से हुई मौत
Wed, 02 Sep 2020 06:40 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 02 Sep 2020 06:40 PM IST
सार
रिपोर्ट में बताया गया है कि मकान आदि गिरने से भी जान-माल की भारी क्षति हुई है। रिहायशी बिल्डिंग गिरने के कारण 2019 में 1218 लोग मारे गए थे, जबकि 2018 में यह संख्या 1201 थी...
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flood Rescue
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
देश में पिछले साल 32271 लोग ऐसे थे, जो पानी में डूबने से मर गए। इनमें से कोई तालाब में डूब गया तो कहीं पर नाव पलट गई। इसी तरह 13378 लोगों को बिजली के करंट ने मार डाला। बुधवार को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी 'एक्सीडेंटल डेथ एंड सुसाइड इन इंडिया' 2019 में यह खुलासा हुआ है।
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खास बात है कि साल 2018 की तुलना में 2019 के दौरान पानी में डूबने से होने वाली मौतों का ग्राफ बढ़ गया है।2018 में पानी में डूबने से मरने वाले लोगों की संख्या 29696 थी।इसी तरह बिजली करंट से 2018 में 12146 लोग मारे गए थे।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि मकान आदि गिरने से भी जान-माल की भारी क्षति हुई है। रिहायशी बिल्डिंग गिरने के कारण 2019 में 1218 लोग मारे गए थे, जबकि 2018 में यह संख्या 1201 थी। इसमें यदि पुलों के गिरने की बात करें तो 2018 में 17 और 2019 में 23 लोगों को इसके चलते अपनी जान गंवानी पड़ी।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि नाव पलटने के कारण 2018 में 211 और पिछले 162 लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह गत वर्ष 21826 लोगों की पानी में डूबने की वजह से जान चली गई, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 19533 रहा है।
घरेलू सिलेंडर फटने के कारण गत वर्ष 314 लोगों की जान चली गई। 2018 में सिलेंडर फटने से 307 लोग मारे गए थे। 2019 में 12048 लोग ऐसे थे जो ऊंचाई से गिरने की वजह से जान खो बैठे। 2018 में ऐसे लोगों की संख्या 11736 थी। बस व ट्रक से गिरने के कारण पिछले साल 4346 लोग मारे गए, जबकि 2018 में यह संख्या 3396 थी।