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बच्चियों के लिए असुरक्षित भारत: हर घंटे दो नाबालिगों के साथ हो रहा है बलात्कार

Fri, 14 Sep 2018 11:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 14 Sep 2018 11:47 AM IST
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ncpcr report says that every hour Two minor girls sexually abused in India

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2016 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि 18 साल से कम उम्र की कम से कम दो बच्चियां हर घंटे बलात्कार का शिकार हो रही हैं। यानी भारत में हर घंटे दो नाबालिगों के साथ बलात्कार होता है।  

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यही नहीं वर्ष 2016 में  44 फीसदी  बच्चियों का अपहरण किया गया था। रिपोर्ट में यह खुलासा भी किया गया है कि 18 साल से कम उम्र की बच्चियां इसकी आसान शिकार होती हैं। बच्चियों का बलात्कार वैश्यावृत्ति और काम-काज कराने के लिए किया जाता है। 
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बलात्कार की बढ़ती घटनाओं और बच्चों के साथ बढ़ रहे अपराधों और हिंसा की यह रिपोर्ट नेशनल क्राइम रिकोर्ड्स ब्यूरो(एनसीआरबी), नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट (एनसीपीसीआर) और चाइल्ड फंड इंडिया द्वारा शोध कर जारी की गई है। 

बच्चों के साथ हिंसा
2005 में हर दिन 11 बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना होती थी जिसमें हर दो घंटे में एक बच्ची के साथ हिंसा का मामला दर्ज हुआ था
2016 में 46 बच्चियों के साथ बलात्कार, यानी हर घंटे 2 बच्चियां 

भ्रूण हत्या, नवजात की हत्या और मर्डर 2016
144 भ्रूण हत्या के मामले- तीन से चार मामले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़
93 केस नवजात को जन्म के साथ मारा गया, इस मामले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक मामले सामने आए
100 हत्याओं में से 6 हत्या 18 साल से कम उम्र की बच्चों की की गई

अपहरण और भगाने के मामले 
2016 में करीब 55000 बच्चों का अपहरण किया गया, जबकि   एक लाख से अधिक बच्चों के मामले दर्ज किए गए। 


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ncpcr report says that every hour Two minor girls sexually abused in India
rape - फोटो : self
यही नहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जिस तेजी से बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले बढ़ रहे हैं उस तेजी से आरोपियों को सजा दिलाने में पुलिस नाकामयाब साबित हो रही है। बलात्कारियों को मिलने वाली सजा दर भी 28 फीसदी से कम है। केस निपटान की दर भी बहुत कम है। 2016 की रिपोर्ट पर यदि नजर डालें तो पुलिस महज 64 फीसदी केस का ही निपटान कर सकी है। 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बच्चों के साथ हो रहे  शारीरिक दुष्कर्म, दुरुपयोग और हिंसा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों की कमी है।  राष्ट्रीय नीति होने के बाद भी बच्चों के साथ हो रही हर तरह की हिंसा का आंकड़ा मौजूद नहीं है और न ही इसको पूरी तरह से मॉनीटर ही किया जा रहा है। आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि किस तरह से बच्चों के रखवाले ही उनका शोषण कर रहे हैं।

आंकड़ों में यह बताया गया है कि किस तरह से दुनियाभर में 1.3 बिलियन बच्चों को देखभाल करने वाले ही उन्हें कठोर अनुशासन में रखते हैं। यही नहीं बच्चों के लिए शारीरिक दंड दिए जाने पर प्रतिबंध है लेकिन बच्चों के साथ एक साल की उम्र में ही बच्चों के साथ शारीरिक उत्पीड़ण शुरू हो जाता है।  
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