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NCPCR: एनसीपीसीआर ने बाल कलाकारों के संरक्षण के लिए जारी किए नए दिशानिर्देश, सोशल मीडिया और ओटीटी भी जद में
Fri, 19 May 2023 03:00 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 19 May 2023 03:00 AM IST
सार
दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी बच्चे के ऑडियो-विजुअल मीडिया प्रोडक्शन या किसी व्यावसायिक कार्यक्रम में भाग लेने से पहले निर्माता को संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति की आवश्यकता होगी।
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डांस करतीं बालिकाएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गुरुवार को मनोरंजन उद्योग में बाल कलाकारों के हित में नए दिशानिर्देश जारी किए। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, कोई इंस्टाग्राम रील, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेट बच्चों के मानसिक या शारीरिक पीड़ा का कारण बनता है, तो उसके लिए तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
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दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देते हुए पहली बार सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्मों को कवर करने के लिए इसका दायरा बढ़ाया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि पिछले साल जारी मसौदा दिशानिर्देशों में इस मामले में हितधारकों से सुझाव मांगे गए थे। अब, इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिया गया है और अपलोड किया गया है।
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दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी बच्चे के ऑडियो-विजुअल मीडिया प्रोडक्शन या किसी व्यावसायिक कार्यक्रम में भाग लेने से पहले निर्माता को संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति की आवश्यकता होगी। कानूनगो ने कहा कि चिप्स, कार्बोनेटेड पेय पदार्थ और अन्य स्नैक्स और पेय सहित जंक फूड का विज्ञापन बच्चों के लिए एक कार्यक्रम के दौरान या विशेष रूप से बच्चों के लिए बने चैनल पर नहीं किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि ऑडियो-विजुअल मीडिया प्रोडक्शन या बच्चे की भागीदारी वाले व्यावसायिक कार्यक्रम के किसी भी निर्माता को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि उत्पादन और शूटिंग की पूरी प्रक्रिया के दौरान ऐसे बच्चे का कोई दुर्व्यवहार, उपेक्षा या शोषण नहीं हुआ है।
श्रम कानूनों के अनुरूप, दिशानिर्देश बाल कलाकारों के एक दिन में पांच घंटे से अधिक काम करने पर भी रोक लगाते हैं। इसमें आगे कहा गया है कि उनके वेतन का लगभग 20 प्रतिशत सीधे सावधि जमा खाते में जमा करने की आवश्यकता होगी। आयोग ने कहा कि बाल और किशोर श्रम अधिनियम, 1986 के किसी भी अन्य प्रावधान के उल्लंघन में निर्माता अधिनियम की धारा 14 के तहत दंडित होने के लिए उत्तरदायी होगा।
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि बच्चों या किशोरों को वयस्कों के साथ ड्रेसिंग स्पेस या कमरे साझा करने की अनुमित नहीं होगी, खासकर विपरीत लिंग वाले के साथ। दिशानिर्देश यह भी कहते हैं कि यदि बच्चा छह साल से कम उम्र का है तो कम से कम एक माता-पिता या एक कानूनी अभिभावक हर समय मौजूद रहना चाहिए।