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NCERT विवाद पर सरकार सख्त: शिक्षा मंत्रालय ने की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी किताब हटाने के आदेश

Thu, 26 Feb 2026 09:11 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Thu, 26 Feb 2026 09:11 PM IST
सार

एनसीईआरटी की एक किताब में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। निदेशक ने पाठ्यपुस्तक तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए हैं। इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

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NCERT book controversial judiciary chapter row Director ascertaining process making of textbooks
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश की स्कूली शिक्षा से जुड़ी एनसीईआरटी की एक किताब में न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को लेकर बड़ा विवाद जारी है। इसी बीच एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय को लेकर केंद्र सरकार ने अब सख्त कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई करने को कहा है।

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शिक्षा मंत्रालय ने दोनों मंत्रालयों से आग्रह किया है कि वापस ली जा चुकी इस पाठ्यपुस्तक या उसके विवादित संस्करण का प्रसार डिजिटल प्लेटफॉर्म, वेबसाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तुरंत रोका जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हटाई गई सामग्री छात्रों या आम लोगों तक आगे न पहुंचे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षा से जुड़े मामलों में तथ्यात्मक और संतुलित सामग्री ही उपलब्ध कराई जाएगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए निगरानी भी बढ़ाई जा रही है।
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एनसीआरटी निदेशक ने दिए ये आदेश
किताब में शामिल सामग्री को लेकर सवाल उठने के बाद अब पूरे मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। एनसीईआरटी के निदेशक ने पाठ्यपुस्तक तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने का फैसला लिया है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि आखिर किस स्तर पर ऐसी गलती हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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इस जांच का मकसद सिर्फ गलती पहचानना नहीं बल्कि भविष्य में इस तरह की किसी भी अनुचित सामग्री को पूरी तरह रोकना है। एनसीईआरटी निदेशक यह भी देख रहे हैं कि किताब तैयार करने, संपादन और मंजूरी की प्रक्रिया में कहां चूक हुई। बताया गया है कि जांच सख्ती से की जाएगी और जिम्मेदार लोगों तथा प्रक्रियाओं की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ताकि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।



धर्मेंद्र प्रधान ने भी दिया था सख्त संदेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों की किताबों में किसी भी तरह की गलत या भ्रामक सामग्री स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर है। प्रधान ने कहा कि मामले की पूरी जांच कराई जा रही है और जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों को सही और संतुलित जानकारी देना सरकार की प्राथमिकता है।



ये भी पढ़ें- 'शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे': एनसीआरटी विवाद पर शिक्षा मंत्री की सख्त टिप्पणी, कहा- जवाबदेही तय होगी

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और चिंता
मामला सामने आने के बाद पहले सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा सामग्री में संस्थाओं के प्रति संतुलित और जिम्मेदार प्रस्तुति की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि स्कूली पाठ्यपुस्तकें छात्रों की सोच और समझ को प्रभावित करती हैं, इसलिए उनमें तथ्यात्मक सटीकता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि शैक्षणिक सामग्री तैयार करते समय संस्थागत गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नई एनसीईआरटी किताब में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय की कुछ सामग्री पर शिक्षकों और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। आरोप लगाया गया कि अध्याय में कुछ हिस्से ऐसे थे जिन्हें अनुचित और गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मामला तेजी से सार्वजनिक चर्चा में आ गया और शिक्षा जगत के साथ राजनीतिक हलकों में भी बहस शुरू हो गई। शिकायतें मिलने के बाद एनसीईआरटी ने तुरंत आंतरिक समीक्षा शुरू की और अब औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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