एनबीए ने की सोनिया गांधी के सुझाव की निंदा, मीडिया विज्ञापनों पर रोक लगाने की कही थी बात
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार और सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों पर दो साल के लिए रोक लगाने का सुझाव दिया है। वही, अब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने कांग्रेस अध्यक्ष के इस सुझाव की कड़ी निंदा की है। साथ ही कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष का यह सुझाव मीडियाकर्मियों के मनोबल को गिराने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में सोनिया ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए विभिन्न सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सरकार एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों- टेलीविजन, प्रिंट एवं ऑनलाइन विज्ञापनों पर दो साल के लिए रोक लगा यह पैसा कोरोना वायरस से उत्पन्न हुए संकट से लड़ने में लगाया जाए। केवल कोविड-19 के बारे में परामर्श या स्वास्थ्य से संबंधित विज्ञापन ही इस बंदिश से बाहर रखे जाएं।
एनबीए के अध्यक्ष रजत शर्मा ने एक बयान में कहा कि एसोसिएशन मीडिया विज्ञापनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी कांग्रेस अध्यक्ष के सुझाव को पूरी तरह से खारिज करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब मीडियाकर्मी अपने जीवन की चिंता किए बगैर महामारी पर समाचारों को प्रसारित कर अपने राष्ट्रीय कर्तव्य को निभा रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष से इस तरह का बयान उनके (मीडियाकर्मियों) मनोबल को गिराने वाला है।
शर्मा ने कहा कि एक तरफ तो मंदी के कारण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विज्ञापन राजस्व में कमी आई है तो वहीं दूसरी ओर सभी उद्योग और व्यवसाय राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण वित्तीय संकट से जूझ रहे है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, समाचार चैनल अपने पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने पर भारी धनराशि खर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह गलत समय पर दिया गया मनमाना सुझाव है। एनबीए ने कांग्रेस अध्यक्ष से अपना सुझाव वापस लेने का अनुरोध किया है।
आईएनएस अध्यक्ष ने कहा- सुझाव पर पुनर्विचार करें कांग्रेस अध्यक्ष
भारतीय समाचार पत्र सोसायटी (आईएनएस) ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस सुझाव को गलत करार दिया जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार और सार्वजनिक उद्यमों द्वारा दो साल के लिए मीडिया को विज्ञापन न देने को कहा है। आईएनएस अध्यक्ष शैलेश गुप्ता ने कहा, यह पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद सुझाव है।
गुप्ता ने कहा, कोरोना संकट के इस दौर में प्रिंट मीडिया ही एक ऐसा माध्यम है जिस पर विश्वसनीय खबरें हैं। मीडियाकर्मी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सरकार के प्रयासों और कोरोना संबंधित सत्य खबरें पहुंचा रहे हैं। प्रिंट मीडिया पहले ही डिजिटल मीडिया और आर्थिक मंदी के चलते परेशान है। उस पर लॉकडाउन से राजस्व में कमी आई है।
ऐसे में अगर सरकारी विज्ञापन बंद हो जाएंगे तो प्रिंट मीडिया के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा और जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मीडियाकर्मियों के वेतन भुगतान में मुश्किल होगी। प्रिंट मीडिया लोकतंत्र में अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा, प्रिंट मीडिया इकलौता उद्योग है जिसमें वेतन बोर्ड है और सरकार ने तय किया है कि किस कर्मचारी को कितना वेतन देना है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष के इस सुझाव से इस क्षेत्र में आर्थिक संकट खड़ा होगा। गुप्ता ने निष्पक्ष मीडिया के हित में कांग्रेस अध्यक्ष से दो वर्ष के लिए विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के सुझाव पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।