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Operation All Out: चारों तरफ से घिरने के बाद बैकफुट पर आए नक्सली, ऑपरेशन 'ऑल आउट' को तुरंत रोकने की मांग

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 25 Apr 2025 05:33 PM IST
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Naxalites demand to stop dangerous operation 'All Out' immediately know updates in hindi
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुठभेड़ - फोटो : एएनआई

छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना बॉर्डर के 'करेगुट्टा' पहाड़ी क्षेत्र में  सीआरपीएफ के नेतृत्व में चार दिन से जारी ऑपरेशन 'ऑल आउट' का नतीजा सामने आने लगा है। चारों तरफ से घिरने के बाद नक्सली बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने सीआरपीएफ सहित विभिन्न बलों के संयुक्त ऑपरेशन को तुरंत प्रभाव से रोकने की मांग की है। उत्तर पश्चिम सब जोनल ब्यूरो, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रभारी रूपेश ने शुक्रवार को इस बाबत एक पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बीजापुर-तेलंगाना सीमा पर एक बड़ा सैन्य अभियान लांच किया गया है। इस अभियान को तुरंत रोकना चाहिए। सभी बलों को वापस बुला लेना चाहिए। 

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पत्र के मुताबिक, सभी लोग चाहते हैं, समस्या का समाधान शांति वार्ता के जरिए हो। शांति वार्ता के लिए हमारी पार्टी हमेशा तैयार है। हमारी पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने भी शांति वार्ता को लेकर पत्र जारी किए थे। विश्वास की कमी को दूर करने के लिए हमारी तरफ से लगातार प्रयास जारी हैं, लेकिन सरकार की मंशा अलग ही दिख रही है। शांति वार्ता के जरिए समस्या हल होने की संभावना रहने के बावजूद, सरकार दमन व हिंसा के प्रयोग से समस्या का समाधान के लिए प्रयास कर रही है। इसी का नतीजा है, बीजापुर व तेलंगाना सीमा पर बड़ा सैन्य अभियान लांच किया गया है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वार्ता के जरिए समस्या का समाधान का रास्ता अपनाए। इस रास्ते से सकारात्मक नतीजा निकलेंगे। बंदूक के बल पर समस्या के हल के लिए सरकार द्वारा अमल किए जा रहे सैनिक अभियान को एक महीने के लिए स्थगित करें। इस अपील पर हम सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करेंगे। 
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ऑपरेशन 'ऑल आउट' को अंजाम दे रही ये एजेसियां
बता दें कि ऑपरेशन 'ऑल आउट' के तहत बड़ी संख्या में टॉप नक्सलियों के खात्मे की खबर मिल सकती है। इस ऑपरेशन में सीआरपीएफ की जीडी बटालियन, कोबरा (सीआरपीएफ) के जवान, छत्तीसगढ़ पुलिस की डीआरजी, स्पेशल टॉस्क फोर्स और तेलंगाना पुलिस भी शामिल है। ड्रोन-हेलीकॉप्टर-मोर्टार से लैस 4000 से अधिक जवानों ने उस इलाके में नक्सलियों को घेरा हुआ है। नक्सलियों ने चप्पे-चप्पे पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) दबा रखी हैं। इतने बड़े जोखिम के बीच सुरक्षा बलों ने अभी तक आधा दर्जन नक्सलियों को मार गिराया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
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सूत्रों का कहना है कि नक्सलियों के टॉप लीडर हिड़मा, देवा व सुधाकर सहित कई बड़े नक्सली, सिक्योरिटी र्फोसेज के ट्रैप में आ चुके हैं। नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीआरपीएफ डीजी खुद रायपुर से इस ऑपरेशन पर नजर रख रहे हैं। इसके अलावा बस्तर के आईजी सुंदरराज पी और सीआरपीएफ के कई अफसर, 'ऑल आउट' ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। यह इलाका छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित है। 

घने जंगलों और पहाड़ियों में माओवादियों ने बना रखा है बेस कैंप
यहां पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच माओवादियों ने अपनी शीर्ष बटालियन का बेस तैयार कर रखा है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लंबे समय से इस बेस पर नजर रखी जा रही थी। नक्सलियों के टॉप लीडर और कमांडर, इस बेस पर आते जाते रहे हैं। यहां से ही सुरक्षा बलों के खिलाफ कई बड़े अभियानों का संचालन किया गया था। सूत्रों का कहना है कि नक्सलियों के खिलाफ इस अभियान को शुरु करने से पहले सीआरपीएफ के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना पुलिस के बड़े अधिकारियों की बैठक हुई थी। उसी में 'ऑपरेशन' 'ऑल आउट' का खाका खींचा गया था। सूत्रों का कहना है कि पिछले चार दिन से सुरक्षा बल इस 'ऑल आउट' ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं। 


सुरक्षा बलों को आगे बढ़ने के लिए बहुत संभल कर कदम रखना पड़ रहा है। वजह, नक्सलियों ने घने जंगल में पहाड़ पर आईईडी का जाल बिछा रखा है। नक्सलियों की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी उपकरणों की मदद ली जा रही है। ड्रोन और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां पर लगता है कि भारी संख्या में नक्सली, फायरिंग कर रहे हैं तो वहां पर मोर्टार से जवाब दिया जाता है। इस ऑपरेशन में लगभग तीन सौ नक्सलियों के घिरे होने की संभावना है। सुरक्षा बलों ने चारों तरफ से पहाड़ी को घेर रखा है। इतना ही नहीं, सुरक्षा बलों ने करीब दस किलोमीटर के क्षेत्र में जाल बिछाया है। अगर, मुठभेड़ स्थल से कोई नक्सली बच कर निकलता है तो उसे रास्ते में खत्म कर दिया जाएगा। 

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