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नौसेना को मिले तीन स्वदेशी INS: ब्रह्मोस से लैस दूनागिरी, संशोधक देगा सुरक्षित राह; अग्रय बिछाएगा बारूदी सुरंग

Sun, 21 Jun 2026 03:13 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 21 Jun 2026 03:13 PM IST
सार

भारतीय नौसेना में शामिल आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय ने भारत की समुद्री ताकत को नई मजबूती दी है। दूनागिरी ब्रह्मोस मिसाइल और स्टेल्थ तकनीक से लैस है। संशोधक समुद्री सर्वेक्षण और मैपिंग करेगा, जबकि अग्रय दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर नष्ट करने में सक्षम है। ये तीनों स्वदेशी प्लेटफॉर्म भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और समुद्री रणनीति को मजबूत करेंगे। आइए, तीनों युद्धपोतों के बारे में विस्तार से जानते हैं...

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Navy receives three indigenous INS vessels Dunagiri  Sanshodhak to ensure safe passage Agray to lay mines
समंदर के सिकंदर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत ने समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना में रविवार को तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कोलकाता में इन तीनों जहाजों को नौसेना में कमीशन किया गया। ये तीनों प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। एक ओर आईएनएस दूनागिरी दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला करने में सक्षम है, तो दूसरी ओर आईएनएस अग्रय दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकार कर सकता है। वहीं आईएनएस संशोधक समुद्र की गहराइयों का अध्ययन और समुद्री मार्गों की मैपिंग करेगा। इन तीनों युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ गई है।

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आईएनएस दूनागिरी को नौसेना का नया ब्रह्मास्त्र क्यों कहा जा रहा है?

आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट-17ए के तहत बना पांचवां स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने किया है। यह युद्धपोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस है और सतह, हवा तथा पानी के नीचे मौजूद खतरों का एक साथ मुकाबला कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका बेहद कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे दुश्मन के लिए इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। लगभग 6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।

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हनुमान जी से आईएनएस दूनागिरी का क्या संबंध?

  • आईएनएस दूनागिरी का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत के नाम पर रखा गया।
  • पौराणिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत को उठाकर लाए थे।
  • नौसेना के अनुसार, यह युद्धपोत हनुमान जी की शक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।
  • आईएनएस दूनागिरी के कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा कि युद्धपोत उसी समर्पण और सेवा भावना से देश की रक्षा करेगा।
  • यह आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के लिए इसका पता लगाना मुश्किल होता है।
  • इसमें बराक-8 मिसाइल, स्वदेशी वरुणास्त्र टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं।
  • आईएनएस दूनागिरी के करीब 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दर्शाते हैं।

आईएनएस संशोधक की भूमिका क्या होगी?

आईएनएस संशोधक किसी पारंपरिक युद्धपोत की तरह सीधे युद्ध नहीं करेगा, लेकिन इसकी भूमिका भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम है। यह सर्वे वेसल (लार्ज) श्रेणी का चौथा जहाज है। इसका मुख्य काम समुद्र की मैपिंग, समुद्री डेटा संग्रह, तटीय और गहरे समुद्री क्षेत्रों का हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। यह जहाज बंदरगाहों, समुद्री व्यापार मार्गों और नौवहन चैनलों का सर्वेक्षण भी करेगा। आईएनएस संशोधक एक बार में करीब 12,000 किलोमीटर तक लगातार यात्रा कर सकता है। यह रक्षा के साथ-साथ नागरिक उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। समुद्री आपदा प्रबंधन, समुद्री संसाधनों की पहचान और सुरक्षित नौवहन में इसकी बड़ी भूमिका होगी।

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ज्ञान, अनुसंधान और खोज की भारतीय परंपरा से संशोधक का क्या संबंध?

  • दरअसल 'संशोधक' का अर्थ होता है शोध करने वाला, खोज करने वाला या अनुसंधानकर्ता।
  • आईएनएस संशोधक का मुख्य काम समुद्र की गहराई, समुद्री मार्गों और समुद्र तल का सर्वेक्षण करना है।
  • यह युद्धपोत समुद्र के भीतर की जानकारी जुटाकर नौसेना को रणनीतिक और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
  • इसे एक तरह से समुद्र में तैरती हुई अत्याधुनिक प्रयोगशाला माना जाता है।
  • आईएनएस संशोधक हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री नक्शे तैयार करने, समुद्री डेटा एकत्र करने और नौवहन मार्गों का अध्ययन करने में सक्षम है।
  • इसका उद्देश्य लड़ाई लड़ना नहीं, बल्कि युद्धपोतों और पनडुब्बियों को सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे सुरक्षित और प्रभावी तरीके से ऑपरेशन कर सकें।
  • इसीलिए आईएनएस संशोधक को भारत की वैज्ञानिक क्षमता, समुद्री अनुसंधान और ज्ञान-आधारित नौसैनिक शक्ति का प्रतीक माना जा रहा है।

आईएनएस अग्रय की मारक क्षमता कितनी है?

आईएनएस अग्रय में लाइटवेट टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, अत्याधुनिक सोनार सिस्टम, 30 मिमी नेवल गन और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें हल-माउंटेड सोनार और वेरिएबल डेप्थ सोनार भी मौजूद हैं, जो समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं। इसके अलावा, यह दुश्मन के टॉरपीडो को निष्क्रिय करने के लिए उन्नत डिकॉय सिस्टम से भी लैस है। यह युद्धपोत 25 नॉट की गति से चल सकता है और लगभग 3,300 किलोमीटर तक यात्रा कर सकता है।

आईएनएस अग्रय को अर्जुन के गांडीव से क्यों जोड़ा गया?

  • आईएनएस अग्रय अर्णाला श्रेणी का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है।
  • इसका इंसिग्निया महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के गांडीव धनुष से प्रेरित है।
  • गांडीव धनुष अपनी अचूकता और सटीक निशाने के लिए प्रसिद्ध था।
  • आईएनएस अग्रय का मुख्य उद्देश्य दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर उन्हें नष्ट करना है।
  • इसके कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सुनील मल्होत्रा के अनुसार, जिस तरह अर्जुन का गांडीव कभी लक्ष्य नहीं चूकता था, उसी तरह यह युद्धपोत भी दुश्मन पर सटीक वार करने में सक्षम है।
  • आकार में छोटा होने के बावजूद यह जहाज आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से लैस एक घातक प्लेटफॉर्म है।
  • इसमें स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और रिमोट कंट्रोल गन जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां लगी हैं।
  • यह युद्धपोत तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
     

भारतीय नौसेना के लिए ये तीनों जहाज कितने महत्वपूर्ण हैं?

भारतीय नौसेना के पास इस समय लगभग 140 से 145 सक्रिय युद्धपोत हैं और 2030 तक इसे 150 से 160 युद्धपोतों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। भारत के लिए समुद्री शक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का करीब 90 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी कमान चीन की गतिविधियों पर नजर रखती है, जबकि मुंबई और कारवार स्थित पश्चिमी कमान अरब सागर में पाकिस्तान और समुद्री डाकुओं पर निगरानी रखती है। अंडमान और निकोबार कमान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत की समुद्री रणनीति में इन जहाजों की क्या भूमिका होगी?

आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय केवल युद्धपोत नहीं हैं, बल्कि ये भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के प्रतीक भी हैं। एक ओर दूनागिरी दुश्मनों के खिलाफ आक्रामक क्षमता बढ़ाएगा, वहीं अग्रय तटीय क्षेत्रों को पनडुब्बी खतरों से सुरक्षित करेगा। दूसरी तरफ आईएनएस संशोधक समुद्री सुरक्षा और नौवहन को मजबूत बनाएगा। इन तीनों जहाजों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।

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