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Naval War-room leak Case: एक दशक की जांच के बाद नहीं मिला कोई सबूत, बर्खास्त कैप्टन के खिलाफ केस बंद

Mon, 05 Feb 2018 02:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Feb 2018 02:44 AM IST
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Naval War-room leak: No evidence found, Case closed against sacked Captain

एक दशक के उत्पीड़न और अपमान के बाद सीबीआई को नौसेना वॉर रूम लीक मामले में नेवी के पूर्व कैप्टन कश्यप कुमार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। कुमार को सरकार ने 2005 में सेवा से बर्खास्त कर दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल चुपचाप अपनी रिपोर्ट संबंधित अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट में जमा कर दी। इसमें कहा गया है कि कश्यप कुमार की याचिका के आलोक में की गई जांच पूरी हो गई है। सीबीआई ने उनके खिलाफ मामला बंद करने का फैसला किया है। 

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सीबीआई को नहीं मिला ठोस साक्ष्य, पिछले साल चुपचाप रिपोर्ट दाखिल की

सीबीआई जांच पर यह स्थिति रिपोर्ट 58 वर्षीय कैप्टन की हाईकोर्ट में दाखिल उस याचिका पर आई जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी। कुमार की याचिका का निपटारा करते हुए जस्टिस आशुतोष कुमार ने अपने एक पेज के आदेश में कहा कि सीबीआई ने संबंधित दस्तावेज के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला बंद कर दिया है। 
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कश्यप कुमार को नौसेना वॉर रूम लीक मामले में नाम आने के बाद अक्तूबर 2005 में संविधान के आर्टिकल 311 के तहत बिना कोर्ट मार्शल का सामना किए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। नवंबर 2005 में एक रिट याचिका दायर कर उन्होंने इस फैसले को चुनौती दी। सीबीआई के यह मामला हाथ में लेने के बाद उनका नाम एफआईआर में था लेकिन एजेंसी ने उन्हें साक्ष्यों के अभाव के चलते चार्जशीट नहीं किया। 
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छह लोगों के खिलाफ दायर हुई थी FIR

पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश के रिश्तेदार रवि शंकरन और दिल्ली के बिजनेसमैन अभिषेक वर्मा समेत छह लोगों के खिलाफ सीबीआई ने 2006 में चार्जशीट दायर की थी। इन दोनों के अलावा, पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण पाराशर, पूर्व कमांडर विजेंद्र राणा, बर्खास्त कमांडर वीके झा और वायुसेना के विंग कमांडर एसजेएल सुर्वे शासकीय गोपनीयता अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और आईपीसी की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश का मुकदमा झेल रहे हैं। 


जांच के दौरान सीबीआई ने कश्यप कुमार की संलिप्तता को लेकर सभी फाइलों की पड़ताल की। इस दौरान कई नौसेना अधिकारियों से भी पूछताछ की गई लेकिन उनकी भूमिका को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं मिल सका।

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