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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने जताई अंडमान निकोबार में विदेशियों की एंट्री पर आपत्ति
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Sun, 26 Aug 2018 08:19 PM IST
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हाल ही में गृह मंत्रालय ने अंडमान निकोबार के 29 द्वीपों को विदेशी पर्यटकों के लिए खोले जाने का फैसला किया है। मंत्रालय के इस फैसले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि मंत्रालय के इस फैसले से वहां रह रहे अति कमजोर जनजातीय समूह को खतरा हो सकता है। आयोग ने मंत्रालय से अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।
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विदेशी पर्यटक कम संवेदनशील
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के मुताबिक प्रतिबंधित द्वीपों में विदेशी पर्यटकों की उपस्थिति से अति कमजोर जनजातीय समूह के लिए दीर्घकालीन समस्या उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि वे बेहद संवेदशील हैं। साथ ही पर्यटक इन समुदायों के प्रति भी कम संवेदनशीलता दिखाते हैं, जिससे इन समुदायों की परेशानियों को और बढ़ा सकता है। आयोग ने मुख्य रूप से ग्रेट निकोबार, उत्तरी सेंटिनल और दक्षिण सेंटीनेल के द्वीपों में रह रहीं जनजातीय प्रजातियों के प्रति चिंता जाहिर की है।
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वीडियोज से आफत
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव राघव चंद्रा ने इंटरनेट पर पड़े उन वीडियोज का हवाला दिया है, जिसमें जरावा जनजाति को दिखाया गया है। इन वीडियोज में उन्हें मूर्खों की तरह पेश किया गया है। आयोग का कहना है कि विदेशी पर्यटकों को अपने व्यवहार में संवेदनशीलता लाने की जरूरत है, और तब तक उनके लिए इन द्वीपों को खोला न जाए। यहीं नहीं यूट्यूब से कई बार इन वीडियोज को हटाने के लिए भी गुजारिश की जा चुकी है।
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जनजातिय समूहों के हितों का रखें ध्यान
आयोग का कहना है कि अंडमान निकोबार में इन जनजातीय समूहों के सरंक्षण पर काम कर रहे कई वैज्ञानिकों ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने भी इस कदम से नुकसान होने की आशंका जाहिर की है। उनका मानना है कि सरकार को द्वीपों को पर्यटकों के लिए खोलने से पहले इन जनजातीय समूहों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके साथ विचार विमर्श करना चाहिए था।
विदेशी पर्यटकों को मिली अनुमति
गौरतलब है कि अंडमान निकोबार में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने एक हाल ही में बड़ा फैसला किया है। केन्द्र सरकार ने अंडमान के 29 द्वीपों को प्रतिबंधित इलाकों की सूची से बाहर कर कर दिया है। पहले इन द्वीपों पर जाने के लिए विदेशियों को सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन अब अनुमति की कोई जरूरत नहीं होगी। जिन द्वीपों को आरएपी (रिस्ट्रिक्टिड एरिया परमिट) यानि वो इलाके जो विदेशी (प्रतिबंधित क्षेत्र) नियम 1963 के तहत आते थे, उनमें हैवलॉक, नील द्वीप, लिटिल अंडमान, बारतांग आईलैंड और कत्चल आईलैंड भी शामिल हैं।
नहीं जा सकते पाक नागरिक
कुल 29 ऐसे द्वीपों को इस सूची से बाहर किया गया है जहां लोग रहते हैं। इसके अलावा 11 ऐसे निर्जन द्वीपों को भी आरएपी से बाहर किया है, जहां विदेशी केवल दिन में ही अनुमति लेकर जा सकते हैं। लेकिन अफगानिस्तान, पाकिस्तान और चीन या इन देशों से संबंध रखने वाले दूसरे देश के नागरिकों को अंडमान के इन द्वीपों पर जाने के आरएपी लेनी होगी। आरएपी गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही दी जाएगी।