फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   National Scheduled Tribes Commission demanded change of name of Indian Forest Service

बदला जाए भारतीय वन सेवा का नाम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने की ‘आदिवासी’ शब्द जोड़ने की मांग

Mon, 26 Nov 2018 08:45 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
हरेन्द्र, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Nov 2018 08:45 PM IST
विज्ञापन
National Scheduled Tribes Commission demanded change of name of Indian Forest Service
Indian Forest Service
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भारतीय वन सेवा का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है। आयोग की मांग है कि भारतीय वन सेवा का नाम बदल कर ‘भारतीय वन एवं आदिवासी सेवा’ रख दिया जाए। आयोग का तर्क है कि वनों में आदिवासी समाज भी रहता है और वे खुद को अनाथ महसूस करते हैं।
विज्ञापन


राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय ने अमरउजाला को बताया कि आयोग के सभी सदस्यों के साथ हुई बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि आदिवासी समाज वनों की देखरेख करता है, लेकिन सरकार में उसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों में आदिवासी समाज की बहुलता है, जो अपने जीवन निर्वाहन के लिए वनों पर पूर्णतया आश्रित है।
विज्ञापन


साय के मुताबिक भारतीय वन सेवा में ‘आदिवासियों’ को शामिल करने से इस सेवा की सार्थकता पूर्ण हो जाएगी, जो वनों का संरक्षण करने के साथ आदिवासियों के विकास पर भी काम करेगी। भारतीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के तहत आने वाले वन सरंक्षण अधिनियम 1980, में वनों को सरंक्षित किया जाता है और मनुष्यों को वनों से बाहर रखने का प्रयास किया जाता है। हालांकि सरकार ने फरवरी, 2004 को जारी एक नोटिफिकेशन में माना था कि सदियों से आदिवासियों का वनों के साथ बेहतरीन सामंजस्य रहा है और वन्य भूमि पर उनके अधिकारों को मान्यता दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व भाजपा सांसद साय का कहना है कि आदिवासी समाज आज भी प्रकृति की पूजा करता है और उन्हें अपना भगवान मानता है। उन्होंने बताया कि आदिवासी कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाला वन अधिकार अधिनियम, 2006 जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों को भूमि और आजीविका अधिकारों की गारंटी देता है। लेकिन असलियत में उन्हें वनों से बेदखल किया जा रहा है और जंगलों में गैर-आदिवासी लोगों की लगातार घुसपैठ हो रही है।


वहीं पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी मनोज मिश्रा कहते हैं कि आईएफएस का गठन वन्य प्राणियों और वन संसाधनों के संरक्षण के लिए किया गया था। वन सेवा से जुड़े अधिकारियों को राष्ट्रीय पार्क, वन एवं अभयारणय से जुड़े प्रशासनिक और राजस्व से जुड़े कार्य देखने होते हैं। लेकिन सरकार के कई विभाग आदिवासी कल्याण पर काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि यह सही है कि आदिवासी वनों के ज्यादा निकट हैं और चिड़ियों और जानवरों की गणना एवं उनके व्यवहार को समझने में वनवासियों की ही मदद ली जाती है, जिससे उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed