{"_id":"5bda6d6cbdec22694a53c7bb","slug":"national-river-ganga-bill-2018-proposed-the-setting-up-of-an-armed-ganga-protection-corps","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा को गंदा किया तो होगी जेल, प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने बनाया नया कानून","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
गंगा को गंदा किया तो होगी जेल, प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने बनाया नया कानून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Nov 2018 08:35 AM IST
विज्ञापन
गंगा आरती
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा नदी को केंद्र सरकार साफ करने की पूरी कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार ने गंगा विधेयक 2018 प्रस्तावित किया है। जिसमें गंगा प्रोटेक्शन कॉर्प्स की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है। सरकारी दस्तावेजों और मामले से संबंधित लोगों का कहना है कि इनके पास उन लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा जो नदी को प्रदूषित करेंगे। यह नदी को साफ रखने और कायाकल्प करने में मदद करेंगे।
विज्ञापन
राष्ट्रीय गंगा काउंसिल की मांग पर इन पुलिसवालों का खर्च गृह मंत्रालय उठाएगा। काउंसिल पांच विशेषज्ञों की एक टीम है जिनके पास किसी उद्योग, बांधों और अन्य ढांचों के निर्माण को बंद करने या उनका विनियमन करने का अधिकार है जिनसे कि नदी के सतत प्रवाह पर असर पड़ता हो। साथ ही वह उस गतिविधि पर रोक लगा सकते हैं जिससे कि नदी प्रदूषित होती है।
विज्ञापन
इस विधेयक का उद्देश्य गंगा का जीर्णोद्धार करके उसका प्राचीन स्वरुप लौटाकर उसके निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करना है। जल संसाधन मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने पुष्टि की कि मसौदे को मंत्रालयों के पास भेज दिया गया है। उन्होंने कहा, 'सभी मंत्रियों द्वारा देखे जाने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।' विधेयक के अनुसार पुलिसवालों के पास अपराधियों को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने, उसे पास के पुलिस थाने में ले जाने का अधिकार होगा।
विज्ञापन
गंगा अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों और जुर्माना की लंबी सूची है जिसमें घाट को खराब करना या सीढ़ियों को नुकसान पहुंचाना या नदी में कोई अपमानजनक चीज फेंकना शामिल है। दूसरे अपराधों में पत्थर खनन, अनुमति के बिना वाणिज्यिक मछली पकड़ना, पहाड़ी ढलानों या संवेदनवशील क्षेत्रों में वनों की कटाई करना, ट्यूबवेल या उद्योग की जरुरतों की संगठित खपत के लिए भूजल निकालना सहित दूसरे शामिल हैं। यह सभी अपराध दो साल तक कारावास या 50,000 रुपये तक के जुर्माना के साथ दंडनीय हैं।
यह अपराध और जुर्माना राष्ट्रीय नदी गंगा विधेयक 2018 के अंतर्गत आते हैं। विधेयक का कहना है कि केंद्र सरकार का गंगा के प्रबंधन, विनियमन और विकास पर नियंत्रण रहेगा और इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाएगा क्योंकि इस नदी का खास महत्व है। भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक और विश्वास के कारणों की वजह से इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाना चाहिए। विधेयक की धारा 54 के अनुसार यदि कोई कंपनी अपराध करती है तो, अपराध के समय कंपनी में उस समय मौजूद रहे हर शख्स को दोषी माना जाएगा।