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डीके शिवकुमार बोले: ED के सामने पेश होना है या नहीं, नेताओं से बात करने के बाद फैसला लूंगा

Thu, 06 Oct 2022 03:07 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 06 Oct 2022 03:07 PM IST
सार

आय से अधिक संपत्ति रखने से जुड़े एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 60 साल के पूर्व कैबिनेट मंत्री से ईडी ने 19 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में आखिरी बार पूछताछ की थी।

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National Herald: ED again summons Karnataka Congress chief DK Shivakumar Bharat Jodo Yatra Rahul Sonia Gandhi
डीके शिवकुमार(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉंड्रिंग मामले में सात अक्तूबर को दिल्ली में एजेंसी के समक्ष पेश होने से छूट की उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी के नेताओं से बात करने के बाद तय करेंगे कि एजेंसी के सामने पेश होना है या नहीं। ईडी ने शिवकुमार को एक नए समन में शुक्रवार को पेश होने के लिए कहा है।

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आय से अधिक संपत्ति रखने से जुड़े एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 60 साल के पूर्व कैबिनेट मंत्री से ईडी ने 19 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में आखिरी बार पूछताछ की थी। मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी पूछताछ की जा चुकी है। ताजा समन ऐसे समय में जारी किया गया है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 'भारत जोड़ो यात्रा' शुक्रवार को कर्नाटक पहुंची है। यात्रा राज्य में 21 दिनों तक चलेगी। इसमें शिवकुमार भी शामिल हैं।
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क्या है नेशनल हेराल्ड?
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। भले ही AJL के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी।


कैसे शुरू हुआ विवाद?

  • 2010 में AJL के 1057 शेयरधारक थे। घाटा होने पर इसकी होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड यानी YIL को ट्रांसफर कर दी गई। यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना उसी वर्ष यानी 2010 में हुई थी। इसमें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए। कंपनी में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के पास रखी गई। शेष 24 फीसदी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस (दोनों का निधन हो चुका है) के पास थी। 
  • शेयर ट्रांसफर होते ही AJL के शेयर होल्डर्स सामने आ गए। पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहाबाद व मद्रास उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू सहित कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि जब YIL ने AJL का 'अधिग्रहण' किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था। यही नहीं, शेयर ट्रांसफर करने से पहले शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई। बता दें कि शांति भूषण और मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम पर AJL में शेयर था।
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