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Judiciary: 'महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में जितनी तेजी से न्याय मिलेगा, उतनी जल्दी...', बोले PM मोदी

Sat, 31 Aug 2024 12:41 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Sat, 31 Aug 2024 12:41 PM IST
सार

कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय अपने स्थापना के 75 वर्ष मना रहा है और देश संविधान लागू होने के 75 वर्ष मना रहा है। ये बहुत ही सुखद संयोग है।

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National Conference of District Judiciary PM Modi kapil sibal arjun ram meghwal cji dy chandrachud attends
पीएम मोदी - फोटो : X/BJP4India

विस्तार

भारत के सर्वोच्च न्यायालय का जिला न्यायपालिका का छह सत्रों वाला दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शनिवार से शुरू हुआ। इसके उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने टिकट और सिक्के का अनावरण किया। महिलाओं खिलाफ अपराध और बच्चों की सुरक्षा पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में जितनी तेजी से न्याय मिलेगा, उतनी जल्दी आधी आबादी को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। पीएम मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल भी इस समारोह का हिस्सा बनें।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पीएम मोदी ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के 75 वर्ष, ये केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है। ये यात्रा है, भारत के संविधान और संवैधानिक मूल्यों की। ये यात्रा है, एक लोकतंत्र के रूप में भारत के और परिपक्व होने की।"
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उन्होंने आगे कहा, "भारत के लोगों ने कभी सुप्रीम कोर्ट पर, हमारी न्यायपालिका पर अविश्वास नहीं किया। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट के ये 75 वर्ष, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में भारत के गौरव को और बढ़ाते हैं। आजादी के अमृतकाल में 140 करोड़ देशवासियों का एक ही सपना है- विकसित भारत, नया भारत। नया भारत, यानी - सोच और संकल्प से एक आधुनिक भारत। हमारी न्यायपालिका इस विजन का एक मजबूत स्तम्भ है।"
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प्रधानमंत्री ने कहा, "न्याय में देरी को खत्म करने के लिए बीते एक दशक में कई स्तर पर काम हुए हैं। पिछले 10 वर्षों में देश ने न्यायिक संरचना के विकास के लिए लगभग 8 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पिछले 25 साल में जितनी राशि न्यायिक संरचना पर खर्च की गई, उसका 75 प्रतिशत पिछले 10 वर्षों में ही हुआ है। भारतीय न्याय संहिता के रूप में हमें नया भारतीय न्याय विधान मिला है। इन कानूनों की भावना है- 'नागरिक पहले, गरिमा पहले और न्याय पहले'. हमारे आपराधिक कानून शासक और गुलाम वाली औपनिवेशिक सोच से आजाद हुए हैं।"

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर भी पीएम मोदी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "आज महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, बच्चों की सुरक्षा, समाज की गंभीर चिंता है। देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कठोर कानून बने हैं, लेकिन हमें इसे और सक्रिय करने की जरूरत है। महिला अत्याचार से जुड़े मामलों में जितनी तेजी से फैसले आएंगे, आधी आबादी को सुरक्षा का उतना ही बड़ा भरोसा मिलेगा।"

कपिल सिब्बल और अर्जुन मेघवाल ने किया समारोह को संबोधित 
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने इस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "भारत में आबादी के अनुपात में जजों की संख्या बहुत कम है। जिला एवं सत्र स्तर पर रोस्टर पर बहुत अधिक बोझ है। उन्होंने आगे कहा, हमारे ट्रायल कोर्ट, जिला और सत्र न्यायालय को बिना किसी भय के न्याय देने के लिए सशक्त बनाने की आवश्यकता है। न्यायपालिका में यह विश्वास पैदा किया जाना चाहिए कि उनके फैसले उनके खिलाफ नहीं होंगे। वे न्यायप्रणाली की रीढ़ की हड्डी हैं। मैंने अपने करियर में शायद ही उस स्तर पर जमानत मिलते देखी हो। यह केवल मेरा अनुभव नहीं बल्कि मुख्य न्यायाधीश ने भी ऐसा इसलिए कहा क्योंकि शीर्ष अदालतों पर बोझ हैं। निचली अदालत में जमानत एक अपवाद है। स्वतंत्रता एक संपन्न लोकतंत्र का मूलभूत आधार है। इसका गला घोंटने का प्रयास हमारे लोकतंत्र पर प्रभाव डालता है।"


कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, "इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय अपने स्थापना के 75 वर्ष मना रहा है और देश संविधान लागू होने के 75 वर्ष मना रहा है। ये बहुत ही सुखद संयोग है। मुझे इस अवसर में शामिल होकर अत्यंत गर्व व हर्ष की अनुभूति हो रही है। मेरा ये मानना है कि जिला न्यायालय हमारी न्यायपालिका का दर्पण है और इन्ही के माध्यम से आम जनता अपने मन में न्यायपालिका की छवि का निर्माण करती है। ये चारो ओर एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं जो कि प्रत्येक कार्य के लिए जरूरी है। हमारे लिए गर्व का विषय है कि सरकार द्वारा न्यायपालिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पिछले एक दशक में ईज ऑफ लिविंग के साथ-साथ ईज ऑफ जस्टिस को बढ़ावा देने के लिए सार्थक प्रयास किए गए जिसका प्रणाम हमें देखने को मिल रहा है।"
 
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