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आईएस टॉपर टीना डाबी को होम कैडर न देने पर पिछड़ा आयोग ने उठाए सवाल

Wed, 17 Aug 2016 04:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Wed, 17 Aug 2016 04:24 AM IST
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National Commission for Backward Classes questions Tina dabi posting
टीना दाबी
यूपी विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा दोबारा से गर्म हो सकता है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने केंद्र सरकार से ओबीसी आरक्षण को श्रेणीगत करने के साथ जाति आधारित जनगणना के आंकडे सार्वजनिक करने की मांग की है। माना जा रहा है कि आयोग के इस कदम से केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शायद यही वजह है कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यक्रम से दूरी बरती।
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आयोग के जरिए आयोजित ओबीसी आरक्षण नीति लागू करने विषय के परिचर्चा में गहलोत को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रण था। लेकिन ऐन मौके पर गहलोत ने कार्यक्रम से दूरी बनाई। मंत्री महोदय की अनुपस्थिति में ही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी आरक्षण नीति लागू करने के मामले पर दिनभर मंथन किया। 
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मंथन के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आयोग ने सरकार से ओबीसी को सरकारी नौकरी के साथ शिक्षण संस्थानों की नौकरियों में भी हर स्तर पर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की है। इसके अलावा जातिगत जनगणना के आंकड़ो की मांग करते हुए ओबीसी आरक्षण को जल्द से जल्द श्रेणीगत करने की मांग की है। यही नहीं आयोग ने ओबीसी वर्ग के लिए सरकारी नौकरीयों की तरह प्राईवेट कंपनियों में भी आरक्षण देने की मांग की है। हालांकि प्राईवेट कंपनियों में ओबीसी के लिए आरक्षण की मांग का भाजपा शासित हरियाणा सरकार ने विरोध किया है।    
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आयोग ने भारतीय प्रशासनीक सेवा 2015 की टॉपर रहीं हरियाणा की टीना डाबी को हेम कैडर न दिए जाने पर भी सवाल उठाया है। आयोग का कहना है कि हरियाणा की रहने वाली डाबी को होम कैडर के रूप में हरियाणा मिलना चाहिए था। आयोग के अध्यक्ष वी इश्वरैया ने कहा है कि सिविल सेवा परिक्षा में सामान्य श्रेणी के तहत टॉप पर रहने वाली डाबी को मनपसंद कैडर मिलना चाहिए था। मगर उन्हें आरक्षित श्रेणी में शामिल कर उनसे मनपसंद कैडर पाने के अधिकार से वंचित रखा गया है।
 

डाबी को मिलना चाहिए था मनपसंद कैडर

National Commission for Backward Classes questions Tina dabi posting
टीना डाबी - फोटो : ANI
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की मांगों को लेकर अमर उजाला से बातचीत करते हुए आयोग के अध्यक्ष वी इश्वरैया ने कहा कि लाल किले के प्राचिर से पीएम मोदी ने गरीब तबके के उत्थान की बात की है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि उनकी मांगों को सरकार जल्द मान लेगी। उन्होंने बताया की इस मामले में बीते दिनों उनकी पीएम मोदी से भी बातचीत हुई है। उन्होंने सकारात्मक रूख दिखाया है। इश्वरैया का कहना है कि सामाजिक विकास के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं हो सकता है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर इंदिरा साहनी मामले में सर्वोच्च नयायालय के फैसले का हवाला देते उन्होंने ओबीसी आरक्षण को श्रेणीगत करने की मांग की है। ताकि इससे उचित लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सके। 

वहीं टीना डाबी के होम कॉडर मामले को उठाते हुए आयोग अध्यक्ष ने कहा है कि सिविल सेवा परिक्षा में सामान्य श्रेणी के तहत टॉप पर रहने वाली डाबी को मनपसंद कैडर मिलना चाहिए था। उन्हें आरक्षित श्रेणी में शामिल कर उनसे मनपसंद कैडर पाने के अधिकार से वंचित रखा गया है।  सिविल सेवा परिक्षा की प्राथमिक परिक्षा महज पात्र बनाने के लिए होती है। अंतिम चयन मुख्य परिक्षा और साक्षात्कार के अंको के आधार पर होता है। चुकि डाबी ने मुख्य परिक्षा और साक्षातकार के नंबरों के सहारे ही सामान्य श्रेणी के तहत टॉप किया है। इसलिए उन्हें कैडर चुनने के लिए टॉपरों सरीखे वरियता मिलनी चाहिए। 

​दरअसल दलित वर्ग से ताल्लूक रखने वाली डाबी ने वर्ष 2015 के सिविल सेवा परिक्षा में सामान्य श्रेणी के तहत टॉप किया था। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय पहले ही दिशा स्पष्ट कर चुका है कि आरक्षण का लाभ लेकर सिविल सेवा की परिक्षा पास करने वाले के पास कैडर चयन का अधिकार नहीं होगा। इसलिए कार्मिक मंत्रालय ने डाबी के कैडर निर्धारण में सर्वोच्च न्यायालय के नियमों का ध्यान रखा है। डाबी ने मुख्य परिक्षा बेशक सामान्य श्रेणी के तहत टॉप की थी। लेकिन प्राथमिक परिक्षा में उन्होंने आरक्षण का लाभ लिया था। 
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