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BJP को चैलेंज, सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को फिर से अनिवार्य करके दिखाओ

Wed, 10 Jan 2018 06:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Jan 2018 06:40 PM IST
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National anthem should be mandatory in cinema halls again if BJP is nationalism
Shyam Narayan Chouksey

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं है। लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रगान को प्रमोट करने वाले याचिकाकर्ता और रिटायर्ड इंजीनियर श्याम नारायण चौकसे ने कहा कि अगर भाजपा राष्ट्रवाद की बात करती है तो वह फिर से राष्ट्रगान को सिनेमाघरों में अनिवार्य करके दिखाए। 

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चौकसे ने कहा कि 'भाजपा राष्ट्रवाद और देश प्रेम की बात करती है, लेकिन मैं आशा करता हूं कि केंद्र की भाजपा सरकार राष्ट्रगान को सिनमाघरों में फिर से अनिवार्य करवाएगी। इस सिलसिले में मैंने राज्य के सीएम शिवराज सिंह चौहान से भी आग्रह किया है।'
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने 30 नवंबर 2017 के फैसले में संशोधन करते और कहा है कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान यानि 'जन गण मन' बजाना अनिवार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि, 'केंद्र सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी का गठन किया है जो छह महीने में अपने सुझाव देगी।
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कमेटी के सुझावों के बाद सरकार तय करेगी कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने पर क्या फैसला लेना है। केंद्र सरकार ने कहा है कि तब तक राष्ट्रीय गान अनिवार्य करने के आदेश से पहले की स्थिति बनी रहेगी। 

गौरतलब है कि 30 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में कहा था कि देशभर के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रगान बजते समय सिनेमाघरों के पर्दे पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाया जाना भी अनिवार्य होगा और सिनेमाघर में मौजूद सभी लोगों को राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना होगा।

हालांकि 23 अक्तूबर 2017 को सुप्रीम  कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि सिनेमाघरों और अन्य जगहों पर राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो या नहीं यह सरकार तय करे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस बारे में कोई भी सर्कुलर जारी किया जाए तो सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावित ना हो।


सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए यह भी कहा था कि, 'इस बात को भी देखना चाहिए कि लोग सिनेमाघरों में मनोरंजन के लिए जाते हैं। ऐसे में देशभक्ति का क्या पैमाना हो, इसके लिए कोई रेखा तय होनी चाहिए। इस बारे में कोई नियम बनाना संसद का काम है। इस काम को कोर्ट पर क्यों थोपा जाए?' 

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