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NASA: नासा ने बताया कैसे पृथ्वी पर होगा जीवन का अंत, दूसरे ग्रहों पर जिंदगी तलाशना ही अंतिम रास्ता
Mon, 20 Nov 2023 06:17 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 20 Nov 2023 06:17 AM IST
सार
रेनहार्ड ने कहा कि इस बदलाव का नतीजा यह होगा कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन पर निर्भर जीवन खत्म हो जाएगा। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के जैवमंडल के जटिल मॉडलों का उपयोग किया और सूर्य की बढ़ती चमक के कारण कार्बनडाइऑक्साइड के टूटने से उसकी कमी जैसे कारकों को शामिल किया।
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Earth Is Not A Safe Space For Humanity: NASA Research
- फोटो : iStock
विस्तार
पृथ्वी के वायुमंडल में ऐसे बदलाव आएंगे, जिससे यहां ऑक्सीजन बहुत ही कम हो जाएगी। इसके चलते पृथ्वी पर वर्तमान का वायुजीवी वाला जीवन खत्म हो जाएगा। इसमें इंसान भी शामिल होंगे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे पहले इंसानों के रहने लायक दूसरा ग्रह खोजना होगा। हाल में किए गए एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन नासा के नेक्सएसएस (नेक्सस फॉर एक्सोप्लैनेट सिस्टम साइंस) परियोजना का हिस्सा है, जिसमें बाहरी ग्रहों पर जीवन ढूंढा जा रहा है।
जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक क्रिस रेनहार्ड ने कहा, हमारा अध्ययन बताता है कि पृथ्वी में दो तरह के बदलाव हो रहे हैं। एक ऐसी प्रक्रिया जो लाखों वर्षों से चल रही हैं और पृथ्वी को अलग-अलग दौर में ले जाने का काम करती हैं। इससे होने वाले बदलाव पृथ्वी पर दूरगामी प्रभाव देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ वे बदलाव जो बहुत तेजी से होते हैं, लेकिन उनके असर बहुत गहरे होते हैं और यहां तक उनसे पृथ्वी की प्रक्रियाओं में बड़ा या लंबे समय तक रहने वाला बदलाव आ जाता है। मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला जलवायु परिवर्तन भी इसी का हिस्सा है।
खत्म होगा जीवन का यह स्वरूप
रेनहार्ड ने कहा कि इस बदलाव का नतीजा यह होगा कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन पर निर्भर जीवन खत्म हो जाएगा। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के जैवमंडल के जटिल मॉडलों का उपयोग किया और सूर्य की बढ़ती चमक के कारण कार्बनडाइऑक्साइड के टूटने से उसकी कमी जैसे कारकों को शामिल किया।
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जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक क्रिस रेनहार्ड ने कहा, हमारा अध्ययन बताता है कि पृथ्वी में दो तरह के बदलाव हो रहे हैं। एक ऐसी प्रक्रिया जो लाखों वर्षों से चल रही हैं और पृथ्वी को अलग-अलग दौर में ले जाने का काम करती हैं। इससे होने वाले बदलाव पृथ्वी पर दूरगामी प्रभाव देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ वे बदलाव जो बहुत तेजी से होते हैं, लेकिन उनके असर बहुत गहरे होते हैं और यहां तक उनसे पृथ्वी की प्रक्रियाओं में बड़ा या लंबे समय तक रहने वाला बदलाव आ जाता है। मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला जलवायु परिवर्तन भी इसी का हिस्सा है।
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खत्म होगा जीवन का यह स्वरूप
रेनहार्ड ने कहा कि इस बदलाव का नतीजा यह होगा कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन पर निर्भर जीवन खत्म हो जाएगा। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के जैवमंडल के जटिल मॉडलों का उपयोग किया और सूर्य की बढ़ती चमक के कारण कार्बनडाइऑक्साइड के टूटने से उसकी कमी जैसे कारकों को शामिल किया।
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