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नरोदा गाम हिंसा: शीर्ष कोर्ट की ओर से नियुक्त SIT देगी विशेष अदालत के फैसले को चुनौती, हाईकोर्ट पहुंचेगा मामला

Mon, 24 Apr 2023 05:12 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 24 Apr 2023 05:12 PM IST
सार

एसआईटी मामलों के विशेष न्यायाधीश एस के बक्शी की अहमदाबाद स्थित अदालत ने 20 अप्रैल को गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी सहित सभी 67 अभियुक्तों को बरी कर दिया था।

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Naroda Gam riot case: SC-appointed SIT to challenge acquittals in Gujarat high court know all update
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

नरोदा गाम दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले में विशेष अदालत द्वारा सभी 67 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी विशेष अदालत के फैसले की प्रति का इंतजार कर रही है। इसका अध्ययन करने के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। इससे पहले, पीड़ित परिवारों के वकीलों ने भी कहा था कि विशेष अदालत के फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

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बता दें कि एसआईटी मामलों के विशेष न्यायाधीश एस के बक्शी की अहमदाबाद स्थित अदालत ने 20 अप्रैल को गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी सहित सभी 67 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। कोडनानी गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। 
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क्या है नरोदा गाम दंगा मामला?
27 फरवरी 2002 को कारसेवकों से भरी एक ट्रेन अयोध्या से लौट रही थी, जिसपर हमला कर दिया गया था। गोधरा ट्रेन कांड में 58 कारसेवकों की मौत हो गई थी। इसके एक दिन बाद अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में हिंसा हो गई थी। 
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28 फरवरी, 2002 को हुई सांप्रदायिक हिंसा में 11 लोग मारे गए थे। इस मामले में 86 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। हालांकि, 86 में से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी 86 आरोपियों में शामिल थे, जिन पर मुकदमा चल रहा था।
दंगे के बाद सरकार ने इस पूरे मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। पूरे केस की जांच करने के बाद एसआईटी की टीम ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को मुख्य आरोपी बनाया था।

 बतौर गवाह अदालत में पेश हुए थे अमित शाह 
विशेष अभियोजक सुरेश शाह के मुताबिक, अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने 2010 में शुरू हुए मुकदमे के दौरान क्रमशः 187 और 57 गवाहों का परीक्षण किया और लगभग 13 साल तक चले इस मामले में छह न्यायाधीश सुनवाई कर चुके हैं।

सितंबर 2017 में, भाजपा के वरिष्ठ नेता (अब केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह भाजपा नेता माया कोडनानी के बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अदालत के समक्ष पेश हुए थे। कोडनानी का दावा है कि वह हिंसा के दौरान गुजरात विधानसभा और सोला सिविल अस्पताल में मौजूद थीं न कि नरोदा गाम में जहां नरसंहार हुआ था।

अदालत के समक्ष गवाही के दौरान, शाह ने अदालत को बताया था कि वह 28 फरवरी, 2002 को कोडनानी से गुजरात विधानसभा में गांधीनगर में सुबह करीब 8.30 बजे और उसके बाद अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में सुबह 11 बजे से 11.30 बजे के बीच मिले थे, जिस दिन नरोदा गाम दंगा हुआ था। हालांकि, चार्जशीट में एसआईटी ने आरोप लगाया था कि कोडनानी सुबह 8.40 बजे विधानसभा से निकलीं और लगभग 9.30 बजे नरोदा गाम पहुंचीं। जांच दल ने यह भी दावा किया था कि कोडनानी के मोबाइल फोन के संकेतों से पता चला कि वह सुबह 10.30 बजे तक मौके पर थीं।

13 साल चला मुकदमा
मामले में 2010 में मुकदमा शुरू हुआ था। स्पेशल एडवोकेट सुरेश शाह ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन पक्ष ने 187 और डिफेंस ने 57 गवाहों की जांच की थी। करीब 13 साल चले मामले में छह न्यायाधीशों- जस्टिस एस एच वोरा जस्टिस ज्योत्सना याग्निक, जस्टिस के के भट्ट, जस्टिस पी बी देसाई, जस्टिस एम के दवे, जस्टिस पी बी देसाई ने मामले की अध्यक्षता की है। 


इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस
आरोपियों के खिलाफ धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 143 (गैरकानूनी सभा), धारा 147 (दंगा), धारा 148 (घातक हथियारों से लैस दंगा), धारा 120 (बी) (आपराधिक साजिश) और 153 (दंगों के लिए उकसाना) के तहत केस दर्ज किया गया था।

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