{"_id":"6516c684ad386a62c4004fd7","slug":"nari-shakti-vandan-act-what-will-change-in-lok-sabha-and-assemblies-after-its-implementation-2023-09-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला आरक्षण कानून से लोकसभा और विधानसभाओं में क्या बदलेगा, अभी कैसी है इनकी तस्वीर?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला आरक्षण कानून से लोकसभा और विधानसभाओं में क्या बदलेगा, अभी कैसी है इनकी तस्वीर?
Fri, 29 Sep 2023 06:23 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 29 Sep 2023 06:23 PM IST
सार
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। इसी 33 फीसदी में से एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी है।
विज्ञापन
नारी शक्ति अधिनियम
- फोटो : AMAR UJALA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नए संसद भवन में 19 सितंबर को नारी शक्ति वंदन विधेयक लोकसभा में पेश हुआ था। 20 सितंबर को लोकसभा में पास होने के बाद 21 सितंबर को यह राज्यसभा से पारित हुआ। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को मंजूरी दे दी है जिससे यह कानून में बदल गया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। कानून के अमल में आने बाद लोकसभा और विधानसभा में बहुत कुछ बदल जाएगा। आइये जानते हैं अधिनियम में किए गए प्रावधानों के बारे में...
विज्ञापन
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। कानून के अमल में आने बाद लोकसभा और विधानसभा में बहुत कुछ बदल जाएगा। आइये जानते हैं अधिनियम में किए गए प्रावधानों के बारे में...
विज्ञापन
महिला आरक्षण
- फोटो : AMAR UJALA
कानून को अमल में लाने के लिए क्या करना होगा?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद विधेयक कानून भी बन गया है, लेकिन इसको अमल में लाने से पहले दो शर्तों को पूरा करना होगा। ये शर्तें जनगणना और परिसीमन की हैं जिन्हें पूरा करने में कई साल लग सकते हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुताबिक, महिला आरक्षण कानून आगामी जनगणना के बाद लागू होगा। कानून बनने के बाद होने वाली जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने के लिए नए सिरे से परिसीमन होगा। परिसीमन के आधार पर ही महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद विधेयक कानून भी बन गया है, लेकिन इसको अमल में लाने से पहले दो शर्तों को पूरा करना होगा। ये शर्तें जनगणना और परिसीमन की हैं जिन्हें पूरा करने में कई साल लग सकते हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुताबिक, महिला आरक्षण कानून आगामी जनगणना के बाद लागू होगा। कानून बनने के बाद होने वाली जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने के लिए नए सिरे से परिसीमन होगा। परिसीमन के आधार पर ही महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी।
अमल में आने के बाद क्या बदलेगा?
मौजूदा समय में लोकसभा में कुल सदस्य संख्या 543 है। इस वक्त महिला सांसदों की संख्या 82 है। होने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी।
इस अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद- 239AA के तहत राजधानी दिल्ली की विधानसभा में भी महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा। यानी, दिल्ली विधानसभा में भी 70 में से 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाएगा।
विधानसभाओं में क्या बदलेगा?
मौजूदा समय में लोकसभा में कुल सदस्य संख्या 543 है। इस वक्त महिला सांसदों की संख्या 82 है। होने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी।
इस अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद- 239AA के तहत राजधानी दिल्ली की विधानसभा में भी महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा। यानी, दिल्ली विधानसभा में भी 70 में से 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाएगा।
विधानसभाओं में क्या बदलेगा?
| राज्य | कुल सीट | कानून बनने के बाद महिला विधायकों की संख्या |
| उत्तर प्रदेश | 403 | 134 |
| पश्चिम बंगाल | 294 | 98 |
| महाराष्ट्र | 288 | 96 |
| बिहार | 243 | 81 |
| तमिलनाडु | 234 | 78 |
| मध्य प्रदेश | 230 | 76 |
| कर्नाटक | 224 | 74 |
| राजस्थान | 200 | 66 |
| गुजरात | 182 | 60 |
| आंध्र प्रदेश | 175 | 58 |
| ओडिशा | 147 | 49 |
| केरल | 140 | 46 |
| असम | 126 | 42 |
| तेलंगाना | 119 | 39 |
| पंजाब | 117 | 39 |
| छत्तीसगढ़ | 90 | 30 |
| हरियाणा | 90 | 30 |
| जम्मू-कश्मीर | 87 | 29 |
| झारखंड | 81 | 27 |
| उत्तराखंड | 70 | 23 |
| दिल्ली | 70 | 23 |
| हिमाचल प्रदेश | 68 | 22 |
| त्रिपुरा | 60 | 20 |
| मणिपुर | 60 | 20 |
| मेघालय | 60 | 20 |
| अरुणाचल प्रदेश | 60 | 20 |
| नगालैंड | 60 | 20 |
| गोवा | 40 | 13 |
| मिजोरम | 40 | 13 |
| सिक्किम | 32 | 10 |
| पुडुचेरी | 30 | 10 |
नया संसद भवन
- फोटो : ANI
क्या अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर यह लागू होगा?
हां, यानी कोटा के अंदर कोटा भी इस कानून में प्रावधान होगा। इस तरह जो सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं उनमें से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
क्या जो लोकसभा या विधानसभा सीट महिला आरक्षित हो जाएगी तो वहां से हमेशा महिला जनप्रतिनिधि ही चुने जाएंगे?
नहीं ऐसा नहीं होगा। जो लोकसभा या विधानसभा सीट महिलाओं के एक चुनाव में आरक्षित होगी अगले चुनाव में वो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं होगी। बल्कि अन्य 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसके बाद जो तीसरा चुनाव होगा उसमें बची हुई 33 फीसदी सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
हां, यानी कोटा के अंदर कोटा भी इस कानून में प्रावधान होगा। इस तरह जो सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं उनमें से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
क्या जो लोकसभा या विधानसभा सीट महिला आरक्षित हो जाएगी तो वहां से हमेशा महिला जनप्रतिनिधि ही चुने जाएंगे?
नहीं ऐसा नहीं होगा। जो लोकसभा या विधानसभा सीट महिलाओं के एक चुनाव में आरक्षित होगी अगले चुनाव में वो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं होगी। बल्कि अन्य 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसके बाद जो तीसरा चुनाव होगा उसमें बची हुई 33 फीसदी सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
महिला आरक्षण
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रहेगी?
यह प्रक्रिया सतत जारी रहने का प्रावधान भी नहीं है। मौजूदा बिल में महिला आरक्षण को 15 साल (आमतौर पर तीन चुनाव) के लिए लागू किया गया। इसके बाद संसद चाहे तो महिला आरक्षण को आगे बढ़ा सकती है। दिलचस्प ये है कि देश में जातिगत आरक्षण का प्रावधान भी दस साल के लिए लागू हुआ था, जो अब तक जारी है।
क्या ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण है या नहीं?
1996 से जब जब महिला आरक्षण बिल आए तब तब यह मुद्दा उठा है। कई राजनीतिक दल पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए भी कोटा की मांग करते रहे हैं। हालांकि, इस बिल में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।
यह प्रक्रिया सतत जारी रहने का प्रावधान भी नहीं है। मौजूदा बिल में महिला आरक्षण को 15 साल (आमतौर पर तीन चुनाव) के लिए लागू किया गया। इसके बाद संसद चाहे तो महिला आरक्षण को आगे बढ़ा सकती है। दिलचस्प ये है कि देश में जातिगत आरक्षण का प्रावधान भी दस साल के लिए लागू हुआ था, जो अब तक जारी है।
क्या ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण है या नहीं?
1996 से जब जब महिला आरक्षण बिल आए तब तब यह मुद्दा उठा है। कई राजनीतिक दल पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए भी कोटा की मांग करते रहे हैं। हालांकि, इस बिल में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।