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संसद भवन में 'समुद्र मंथन': कौन हैं नरेश कुमावत? जिन्होंने उकेरी खूबसूरत कलाकृतियां; बताई थीम के पीछे की कहानी

Sun, 28 May 2023 10:51 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 28 May 2023 10:51 PM IST
सार

लोग इन कलाकृतियों और प्रतिबिम्बित विषयों को पसंद कर रहे हैं। इनमें नरेश  कुमावत ने 'समुद्र मंथन' की थीम पर अपनी कला को प्रतिबिम्बित किया है। नरेश ने खुद अपनी कलाकृतियों और समुद्र मंथन की थीम के बारे में बताया कि इसके जरिए उन्होंने क्या संदेश देने की कोशिश की है। 
 

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Naresh Kumawat engraved beautiful artefacts with theme of churning of ocean in new Parliament House
नरेश कुमावत। - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

देश को आज उसकी बहुप्रतीक्षित नया संसद भवन मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य समारोह के दौरान संसद भवन का उद्घाटन किया। उद्घाटन से पहले और बाद में भी संसद भवन के भीतर की कई तस्वीरें वायरल हुई हैं। इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि संसद में कई भव्य कलाकृतियों का निर्माण किया गया है। ये कलाकृतियां न केवल भारतीय कला और संस्कृति बल्कि हमारे प्राचीन इतिहास को भी बताती हैं। इन कलाकृतियों में से मुख्य तौर पर नए संसद भवन में समुद्र मंथन की कलाकृति नरेश कुमावत ने उकेरी है।  

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लोग इन कलाकृतियों और प्रतिबिम्बित विषयों को पसंद कर रहे हैं। इनमें नरेश  कुमावत ने 'समुद्र मंथन' की थीम पर अपनी कला को प्रतिबिम्बित किया है। नरेश ने खुद अपनी कलाकृतियों और समुद्र मंथन की थीम के बारे में बताया कि इसके जरिए उन्होंने क्या संदेश देने की कोशिश की है। 
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संसद मंथन का मंदिर
नरेश कुमावत ने बताया कि  वह 75×9 फीट की 'समुद्र मंथन' वाली मूर्तिकला के निर्माण का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि संसद मंथन का मंदिर है। ऐसे में उन्होंने 'समुद्र मंथन' और 'अमृत काल' से निकलने वाले 'अमृत' के बीच एक समानता भी खींची। नरेश कुमावत ने कहा कि नया संसद भवन उभरते हुए भारत का प्रतीक है। इस थीम को चुनने के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि जैसे प्रचीन काल में समुद्र के मंथन से अमृत निकला था, वैसे ही अब भी गहन चर्चाओं के बाद देश के लिए अच्छी योजनाएं विकास वाले विचार निकलें। उन्होंने समुद्र मंथन की कलाकृति में हर छोटी से छोटी चीज का ध्यान रखा है। 
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संसद भवन के निर्माण में योगदान सम्मान की बात
नरेश कुमावत ने बताया कि ये मूर्तिकला अंगकोर वाट शैली से प्रेरित है। उन्होंने इसमें 'पंच धातु' तत्वों का उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि यह चुनौतीपूर्ण था लेकिन सांसदों और मशहूर हस्तियों द्वारा उनके काम की प्रशंसा करने से उन्हें अच्छा महसूस हुआ।  ये उनके लिए काफी सम्मान की बात है कि उन्होंने नए संसद भवन के निर्माण में योगदान दिया है। उनका कहना है कि ये कलाकृतियाँ नेताओं को न्यायपूर्ण ढंग से कार्य करने की प्रेरणा देंगी।


कौन हैं नरेश कुमावत
नरेश कुमावत मूल रूप से राजस्थान के पिलानी के रहने वाले हैं।  नरेश कुमार कुमावत फ़िलहाल हरियाणा गुरुग्राम में रहते हैं। उनके पिता और दादा भी मूर्तिकार थे। नरेश कुमावत इससे पहले नेपाल स्थित कैलाशनाथ महादेव की प्रतिमा बना चुके हैं। दिल्ली के महिपालपुर में स्थित शिव मूर्ति भी उन्होंने ही बनाई है।

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