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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो: ड्रग्स की तस्करी रोकने से लेकर नशा करने वालों को पकड़ने तक, जानें कितनी ताकतवर है ये जांच एजेंसी

Fri, 08 Oct 2021 05:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 08 Oct 2021 05:58 PM IST
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सार
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) एक संघीय विधि प्रवर्तन और खुफिया एजेंसी है। यह एजेंसी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। 
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Narcotics Control Bureau the power and jurisdiction of Agency that coordinates with Centre and States in Drug related matters
सुशांत सिंह राजपूत केस के बाद एनसीबी आर्यन खान को पकड़ने के बाद फिर चर्चा में आई है। - फोटो : Social Media

विस्तार

सुशांत सिंह राजपूत केस के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) एक बार फिर बॉलीवुड में फैले ड्रग्स के जाल का पता लगाने में जुटा है। ये एजेंसी मुंबई के बाहर एक क्रूज शिप पर चल रही कथित रेव पार्टी पर छापा मारने के बाद पिछले करीब एक हफ्ते से लगातार सुर्खियों में बनी है, खासकर मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के पकड़े जाने के बाद से। 

एनसीबी के वकील लगातार मुंबई की अदालतों में भी आर्यन खान की कस्टडी से जुड़ी याचिकाओं पर अपना पक्ष रख रहे हैं और जांच में नए खुलासे होने की बात कह रहे हैं। ऐसे में यह जानना बेहद अहम है कि आखिर एनसीबी क्या है और देश में नशीले पदार्थों का प्रसार रोकने के लिए इस एजेंसी को कितनी ताकतें दी गई हैं...

क्या है नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) एक संघीय विधि प्रवर्तन और खुफिया एजेंसी है। इसका गठन 17 मार्च 1986 को भारत सरकार की ओर से किया गया था। यह एजेंसी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। 

क्या हैं इस एजेंसी की जिम्मेदारियां?

भारत 1961 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने कन्वेंशन ऑन नारकोटिक ड्रग्स का हस्ताक्षरकर्ता है। इसके अलावा भारत में नशीले पदार्थों के प्रसार को रोकने के लिए कई और कानून भी लंबे समय से हैं। भारत सरकार ने 1985 में इन्हीं कन्वेंशन और कानूनों के तहत नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस ऐक्ट (स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985) लागू किया था। एनसीबी का गठन इसी एनडीपीएस ऐक्ट को लागू कराने के लिए किया गया। 

इस लिहाज से एनसीबी की तीन जिम्मेदारियां हैं...
1. केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग के जरिए नशीले पदार्थों की अवैध खेप की जब्ती और उन्हें पकड़ना।
2. यह एजेंसी अंतरराष्ट्रीय कर्तव्यों के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय-विदेशी एजेंसियों की मदद लेकर ड्रग्स की खेप को पकड़ने और उन्हें कब्जे में लेने के लिए भी जिम्मेदार है। 
3. इसके अलावा एनसीबी नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय बनाने के लिए भी उत्तरदायी हैं।

एनसीबी के काम करने का क्या है तरीका?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ड्रग्स से जुड़े मामलों में खुफिया जानकारी और जांच के लिए एक केंद्रीय संपर्क बिंदु है। यह एजेंसी मुख्य तौर पर पांच प्रक्रियाओं के तहत काम करती है...

1. नशीले पदार्थों को पकड़ने के लिए जिम्मेदार ऐसी केंद्रीय और राज्यों की एजेंसियों से समन्वय, जो कि एनडीपीएस ऐक्ट, कस्टम्स ऐक्ट, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट या ऐसे ही किसी और कानून के दायरे में कार्रवाई कर रही हों।

2. एनसीबी राज्यों को ड्रग्स के खिलाफ जारी उनकी लड़ाई में सहयोग करने के अलावा नशीले पदार्थों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने का अधिकार रखती है। 

3. इसके अलावा यह एजेंसी नशीले पदार्थों पर मिली खुफिया जानकारी को इकट्ठा करने और उन पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार है। 

4. किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पकड़े गए नशीले पदार्थों से जुड़ी जानकारी और उनकी तस्करी में इस्तेमाल तरीकों (मॉडस ओपरेंडाई) में इस्तेमाल से जुड़े खुलासे। 

5. नशीले पदार्थों पर कार्रवाई के साथ-साथ यह एजेंसी ड्रग्स से जुड़ी जानकारी और आंकड़े भी तैयार करती है। इसके अलावा ड्रग्स से जुड़े किसी अंतरराष्ट्रीय अभियान में एनसीबी ही इंटरपोल, यूएनडीसीपी, आईएनसीबी और कस्टम्स कोऑपरेशन जैसे संस्थानों के साथ सहयोग के लिए जिम्मेदार है।

एनडीपीएस के कितने संपर्क केंद्र?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ड्रग्स के मामले में देश की सर्वोच्च एजेंसी है। एनसीबी अपने जोन्स और सब-जोन्स के जरिए देश में नशीले पदार्थों को पकड़ने से लेकर उन पर कार्रवाई भी करता है। एजेंसी के इस वक्त देश में 13 जोन्स- अहमदाबाद, बंगलूरू, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, इंदौर, जम्मू, जोधपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पटना में हैं। इसके अलावा एजेंसी के 12 सब-जोन्स- अमृतसर, अजमेर, भुवनेश्वर, देहरादून, गोवा, हैदराबाद, इंफाल, मदुरै, मंडी, मंदसौर, रांची और कोच्ची में हैं। इन्हीं जोन्स और सब-जोन्स के जरिए एनसीबी नशीले पदार्थों की जानकारी इकट्ठा करता है और राज्य की पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियों के साथ संपर्क में रह कर काम करता है। 

क्या है एनडीपीएस कानून, जिसके तहत एनसीबी को कार्रवाई का अधिकार?

भारत में किसी भी तरह के नशीले पदार्थ से जुड़े मामलों में दो तरह के कानूनों के तहत कार्रवाई होती है। इनमें एक कानून है नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज ऐक्ट-1985 (स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985), जिसे एनडीपीएस ऐक्ट भी कहा जाता है। वहीं, दूसरा कानून है प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिकिंग इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज ऐक्ट ऑफ 1988 (स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988)।

क्या कहते हैं ये दोनों कानून?

एनडीपीएस कानून किसी भी तरह के अवैध नशीले पदार्थ की खेती, उत्पादन, इसे रखने, बेचने, खरीदने, व्यापार, निर्यात, आयात या इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा है। हालांकि, कानून के तहत कुछ चिकित्सीय और वैज्ञानिक मामलों में ऐसे ड्रग्स के इस्तेमाल पर छूट है। 

नारकोटिक्स ड्रग्स में गांजा और चरस दोनों ही शामिल हैं। इसके अलावा हशीश, हेरोईन और अफीम के अलावा कुछ और सिंथेटिक ड्रग्स भी भारत में पूरी तरह अवैध हैं। एनडीपीएस कानून के तहत ही जांच एजेंसियों को नशीले पदार्थों की खोज, जब्ती और इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को हिरासत या गिरफ्तार करने का अधिकार मिलता है। इस कानून के तहत दोषी पाए गए लोगों को आर्थिक जुर्माने के अलावा जेल तक भेजने का प्रावधान है।

नशीले पदार्थ पाए गए तो कितनी मिलेगी सजा?

अगर किसी व्यक्ति के पास अवैध नशीले पदार्थ मिलते हैं या उसे इसका इस्तेमाल करते पाया जाता है, तो एनडीपीएस कानून के तहत इन पर सजा का प्रावधान है। वहीं, ऐसे पदार्थों के व्यापार में शामिल लोगों के लिए स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988 कानून के तहत कार्रवाई होती है। हालांकि, इसमें व्यक्ति को सजा मिलने का प्रावधान उसके पास से मिले नशीले पदार्थों की मात्रा पर निर्भर होता है। 

1. छोटी मात्रा यानी चरस या हशीश के 100 ग्राम और गांजे के 1000 ग्राम तक पाए जाने पर व्यक्ति पर 10 हजार रुपए का जुर्माना या छह महीने तक की जेल की सजा या दोनों हो सकती हैं। अगर पकड़ा गया चरस-गांजा किसी और तरह का विकसित पदार्थ है, तो जेल की सजा एक साल तक बढ़ाई भी जा सकती है। इस तरह के मामलों में काउंसलिंग का विकल्प भी दिया जाता है, जिससे दोषी जेल जाने से बच सकता है।

2. उधर छोटी मात्रा से ज्यादा लेकिन बेचने लायक मात्रा से कम नशीला पदार्थ पाए जाने पर व्यक्ति को 10 साल तक के कठोर कारावास की सजा दी जा सकती है। साथ ही उस पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

3. अगर अवैध नशीले पदार्थ बेचने लायक यानी व्यापारिक मात्रा में बरामद होते हैं, तो कम से कम 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है, जो कि ज्यादा मात्रा के साथ 20 साल तक की जा सकती है। इसके अलावा कम से कम एक लाख रुपए से लेकर दो लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।

4. उधर कोकीन, मॉर्फीन या हेरोईन जैसे अवैध ड्रग्स छोटी मात्रा में लेने पर एक साल तक जेल या 20 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। लेकिन ऐसे ड्रग्स की छोटी मात्रा और व्यापारिक मात्रा में फर्क काफी छोटा है। जहां कोकीन में दो ग्राम तक छोटी मात्रा मानी गई है, वहीं 100 ग्राम को व्यापारिक मात्रा कहा गया है। इसी तरह एमडीएमए में 0.5 ग्राम को छोटी मात्रा माना गया है और 10 ग्राम को व्यापारिक मात्रा कहा गया है। हेरोईन और मॉर्फीन में भी 5 ग्राम तक छोटी मात्रा और 250 ग्राम को बड़ी मात्रा कहा गया है।
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