नमामि गंगे योजनाः तट बनेंगे सैरगाह और तटीय शहरों का भी होगा विकास
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केंद्र सरकार ने नमामि गंगे योजना में राज्यों की भागीदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। योजना के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए प्रशासनिक ढ़ांचा तैयार किया जा रहा है। पीपीपी माडल के तहत स्पेशल परपज व्हीकल का गठन जल्द कर लिया जाएगा।
नमामि गंगे योजना को महज प्रदूषण नियंत्रण तक ही सीमित नहीं किया जाएगा। इसलिए नदी तट के विकास के लिए 25 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई हैं। इसके तहत घाटों का विकास, शवदाह गृहों का निर्माण और तटों को सैरगाह में बदलने की योजना शुमार है। गंदगी पर नियंत्रण के लिए सार्वजनिक शौचालयों को निर्माण को योजना में महत्व दिया जाएगा।
गंगा के किनारे वनीकरण के तहत पौधे लगाने की नई योजना के तहत काम शुरू कर दिया गया है। जैव विविधता के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा। गंगा किनारे स्नान घाट विकसित किए जाएंगे। जन सहभागिता और जन जागरण को योजना में खासा महत्व देने की रणनीति तय की गई है।
गंगा की सफाई के लिए शुरू की गई विभिन्न प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं को श्रेणीबद्ध किए जाने का निर्णय लिया गया है। गंगा में जाने वाले सीवेज को रोकने, इसका मार्ग बदलने और ट्रीटमेंट का संयुक्त प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। तटों पर सामुदायिक और निजी क्षेत्रों के सहयोग से स्वच्छता और सुविधाओं के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी।
पीपीपी माडल में राज्यों को मिलेगा विशेष प्रतिनिधित्व
गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए अबतक 671 योजनाओं को मंजूरी दी गई है जिसमें प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के अलावा गंगा तट के शहरों का विकास भी शामिल है। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक गंगा कार्ययोजना के दो चरणों में अबतक 938 करोड़ 57 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
इसके अलावा गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की योजनाओं के लिए 1664 करोड़ 73 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अगले चार वर्षों में गंगा के जल की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। किसी भी सूरत में बिना ट्रीटमेंट कचरे को गंगा में डाले जाने से रोकने के लिए पर्यावरण मंत्रालय सख्त प्रावधान तय कर रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा में प्रदूषण की निगरानी के लिए 57 निगरानी केंद्र स्थापित कर लिए हैं। इन केंद्रों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके तहत 113 नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रथम चरण में 36 नए केंद्र बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गंगा के प्रदूषित खंडों के लिए अबतक 1098 मिलियन लीटर सीवेज प्रतिदिन शोधित करने का तंत्र विकसित किया जा चुका है। इस क्रम में 50 नई योजनाएं जल्द शुरू की जाएंगी। गंगा तट के 53 शहरों के लिए 96 परियोजनाओं के तहत काम शुरू किया गया है।