E20 ईंधन के खिलाफ प्रदर्शन: गडकरी के घर का घेराव करने पहुंचे कांग्रेस नेता, पुलिस ने हिरासत में लिया
E20 पेट्रोल के अनिवार्य इस्तेमाल, माइलेज में कमी और इंजन खराबी के आरोपों को लेकर नागपुर में यूथ कांग्रेस ने नितिन गडकरी के घर का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। क्या है मामला? जानिए...
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यह मार्च नागपुर के महल इलाके में स्थित चिंतामणि पार्क चौक से शुरू हुआ और गडकरी के इसी इलाके में स्थित निजी आवास तक जाना था। इस दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ई20 ईंधन को लेकर नारेबाजी की। केंद्रीय मंत्री के घर के पास बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। रास्ते में बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस ई20 ईंधन के मुद्दे पर लगातार गडकरी को घेर रही है। पार्टी का कहना है कि 29 जुलाई को संसद में देशभर में ई20 पेट्रोल लागू करने को लेकर गडकरी के जवाब से कई सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि गडकरी का दावा है कि ई20 ईंधन को कई वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू किया गया है। इससे बड़े स्तर पर वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं है।
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक कम माइलेज, इंजन की समस्या, वाहनों पर ई20 ईंधन के लंबे समय के असर, इंजन की अनुकूलता, ठंड में इंजन स्टार्ट होने की परेशानी और 2023 से पहले के वाहनों में तेजी से खराबी जैसी शिकायतें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों में ईंधन इंजेक्टर जाम होने, ईंधन पाइप खराब होने और रबर के हिस्सों में दरार जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष ने मांगा गडकरी का इस्तीफा
- मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गडकरी के इस्तीफे की मांग की।
- उन्होंने आरोप लगाया कि ई20 पेट्रोल नीति को लागू करना एक बड़ा घोटाला है, जिससे लाखों वाहन मालिकों को परेशानी हुई और सत्ता से जुड़े कुछ लोगों को फायदा पहुंचा।
- सपकाल ने दावा किया कि ई20 ईंधन को पूरे देश में लागू करने की समयसीमा 2030 से पहले कर दी गई, ताकि कुछ खास लोगों को फायदा मिल सके।
- उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर पेट्रोल में इथेनॉल की जगह पानी मिलाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
- उन्होंने इस मामले की पूरी जांच की मांग की और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसके लिए जिम्मेदार हैं।
- सपकाल ने कहा कि नागपुर सांसद गडकरी ने वाहन मालिकों की शिकायतों के बावजूद इथेनॉल मिले ईंधन को बढ़ावा दिया।
- कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कथित घोटाले में बिचौलिए शामिल हैं, जिनकी भूमिका सामने आनी चाहिए।
- सपकाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि मिलावटी ईंधन देकर उपभोक्ताओं के साथ धोखा किया गया है, जबकि उनसे पेट्रोल की कीमत ली जा रही है।
मेहुल आडवाणी जैसे स्थानीय नेताओं की अगुवाई में हुए इस विरोध-प्रदर्शन का मुख्य कारण E20 (20% इथेनॉल-मिश्रित) पेट्रोल को अनिवार्य बनाए जाने के खिलाफ जनता का असंतोष था। यूथ कांग्रेस नेता मेहुल आडवाणी ने कहा, 'हम हम पर थोपे जा रहे E-20 का विरोध करते हैं। हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।'
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंच रहा है और माइलेज में गिरावट आ रही है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के लिए इसे हानिकारक बताया जा रहा है। यूथ कांग्रेस ने मांग की है कि उपभोक्ताओं को बिना इथेनॉल वाले सामान्य पेट्रोल को भी खरीदने का स्पष्ट विकल्प मिलना चाहिए।
#WATCH | Nagpur, Maharashtra | Police detain Youth Congress and NSUI workers as they marched towards Union Minister Nitin Gadkari's residence to protest against E-20 petrol
— ANI (@ANI) August 3, 2026
Youth Congress leader Mehul Adwani says, "We condemn E20 being imposed on us. We will continue to fight." pic.twitter.com/PzhopAU9rm
सरकार का रुख और तर्क
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और केंद्र सरकार ने इस नीति का पुरजोर बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत के कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कटौती होती है, कार्बन उत्सर्जन घटता है और स्थानीय किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन से जुड़े अनसुलझे दावों को गैर-वैज्ञानिक और भ्रामक करार दिया है।
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अफवाहों पर सख्त कार्रवाई
इस विरोध के बीच नागपुर साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर शिकंजा कसा है। भारतीय न्याय संहिता के तहत कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर आरोप है कि वे E20 नीति के बारे में गलत जानकारी फैलाकर केंद्रीय मंत्री गडकरी को निशाना बना रहे थे।