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एन बीरेन सिंह: BSF में फुटबॉलर, फिर पत्रकार से मणिपुर के CM तक, ऐसा रहा इस कद्दावर नेता का सफर

Sun, 09 Feb 2025 07:28 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 09 Feb 2025 07:28 PM IST
सार

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के कारण एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। एन बीरेन सिंह ने फुटबॉलर, पत्रकार से लेकर  2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने तक का सफर कैसे तय किया था, आइए जानते हैं- 

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N Biren Singh From Footballer in BSF to Journalist and Then two time CM of Manipur
एन बीरेन सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

मणिपुर में पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय जारी जातीय हिंसा के बीच एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया। राज्यपाल को  इस्तीफा देने से पहले आज उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की थी। साल 2017 में पहली बार एन. बीरेन सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बनाए गए थे। उस साल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। इस जीत के पीछे एन बीरेन सिंह के चेहरे को बड़ी वजह माना गया था। उन्हें जमीन से जुड़ा नेता माना जाता है। बीरेन सिंह ने राज्य की राजनीति में कैसे एक मुख्यधारा की पार्टी के जरिए विशेष स्थान बनाया। आइए उनके बारे में जानते हैं-
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N Biren Singh From Footballer in BSF to Journalist and Then two time CM of Manipur
एन बीरेन सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

कौन हैं एन बीरेन सिंह? 
एन बीरेन सिंह का जन्म 1 जनवरी 1961 को मणिपुर की राजधानी इंफाल में हुआ था। उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मणिपुर विश्वविद्यालय से ही बीए की डिग्री हासिल की। लेकिन, खेल में ज्यादा रुचि होने की वजह से उन्होंने शुरुआत में फुटबॉल को अपने करियर के तौर परगल्ग चुना। बाद में देश सेवा के मकसद से वह सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) भर्ती हुए। यहां भी उन्होंने अपनी खेल की रुचि को आगे बढ़ाया और घरेलू मुकाबलों में अपनी टीम का नेतृत्व करते रहे। उन्होंने डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया है। 

फुटबॉल और बीएसएफ में लंबे समय तक सेवा देने के बाद 1992 में बीरेन सिंह की रुचि पत्रकारिता की तरफ बढ़ी और उन्होंने मणिपुर के ही स्थानीय अखबार नाहरोल्गी थोउदांग में नौकरी शुरू की। पत्रकारिता में भी बीरेन सिंह काफी तेजी से आगे बढ़े और 2001 तक वे अखबार में संपादक के पद तक पहुंच गए। यही वह दौर था, जब उन्होंने राजनीति को करीब से देखा और आखिरकार राज्य की स्थिति को सुधारने के लिए इस क्षेत्र में किस्मत आजमाने का फैसला किया।

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कैसा रहा है राजनीतिक करियर?
एन बीरेन सिंह 2002 में मणिपुर की डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी में शामिल हुए। उन्होंने हेनगांग सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में बीरेन सिंह 2003 में कांग्रेस में शामिल हो गए और उन्हें वन और पर्यावरण मंत्रालय मिला। 2007 में एक बार फिर उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्रालय के अलावा युवा मामलों-खेल मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया। 2012 में उन्होंने फिर अपनी सीट पर जीत हासिल की और लगातार तीसरी बार विधायक बने। हालांकि, उनकी बढ़ती ताकत से कांग्रेस में ही शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गईं। 2016 में मणिपुर के तत्कालीन सीएम ओकराम इबोबी सिंह से विवाद के बाद बीरेन सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। 

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2017 में पहली बार बने सीएम  
2017 में एक बार फिर बीरेन सिंह विधायक बने। उनकी इस बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनजर भाजपा ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। 15 मार्च 2017 को शपथ लेने के साथ ही वे राज्य में भाजपा के पहले सीएम बन गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में वे फिर हेनगांग सीट से जीते। यह लगातार पांचवीं बार था, जब उन्होंने अपनी इस सीट पर कब्जा जमाए रखा। उन्होंने कांग्रेस के शरतचंद्र सिंह को इस सीट पर 18 हजार वोटों से हराया। इसके बाद वह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। 

N Biren Singh From Footballer in BSF to Journalist and Then two time CM of Manipur
मणिपुर हिंसा - फोटो : एएनआई (फाइल)

मणिपुर हिंसा और मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा तीन मई 2023 को उस समय शुरू हुई, जब मणिपुर उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आदिवासी छात्र संघ (ATSUM) ने एक रैली आयोजित की थी, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद से राज्य में हिंसा शुरू हुई और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा। 

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राज्यपाल को इस्तीफा सौंपते एन बीरेन सिंह - फोटो : एएनआई
मुख्यमंत्री के पद से दिया इस्तीफा
इस हिंसा में दो सौ से ज्यादा नागरिकों की जान चली गई और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए। लगातार हिंसा की घटनाओं के चलते बीरेन सिंह विपक्षी दलों और नेताओं के निशाने पर आ गए। विपक्ष उन पर हिंसा को रोकने में नाकामी का आरोप लगाते हुए लगातार इस्तीफे की मांग करता रहा। इस बीच, एनडीए की सहयोगी एनपीपी ने भी मणिपुर सरकार से अपना समर्थन वापस लिया और नेतृत्व परिवर्तन की मांग की। हिंसा के चलते बीरेन सिंह भारी दबाव में थे। आखिरकार आज यानी नौ फरवरी को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। 

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