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मेरा पहला वोट: मध्यप्रदेश के युवा तय करेंगे शिवराज चौहान का भविष्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Oct 2018 01:51 PM IST
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ईवीएम
मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा कर दी गई है। मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होगा जबकि 11 दिसंबर को मतगणना होगी। विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होते ही आचार संहिता लागू हो गई है। मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ मतदान होगा। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। भाजपा पिछले 15 साल से यहां सत्ता पर काबिज है।
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युवा मतदाता करेंगे फैसला
इस बार राज्य में बड़ी संख्या में पहली बार वोट डालने वाले युवा भी शामिल रहेंगे। राज्य में युवा मतदाता 1 करोड़ 37 लाख 83 हजार हैं। इनमें 18-19 साल तक की उम्र वाले मतदाताओं की संख्या 15 लाख 78 हजार 167 है। राज्य में शिवराज सरकार की वापसी का दारोमदार इन युवा मतदाताओं पर रहेगा जो पहली बार वोटिंग करेंगे।
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कुल मतदाता- 5,03,94,086
युवा मतदाता (20 से 29 साल) - 1,37,83,383
18 से 19 साल - 15,78,167
30 से 39 साल - 1,28,74,974
40 से 49 साल - 99,30,546
50 से 59 साल - 63,58,853
60 से 69 साल - 35,45,733
70 से 79 साल - 16,85,339
भाजपा ने जीती थीं 165 सीटें
भाजपा ने जीती थीं 165 सीटें
बता दें कि पिछले चुनाव में कुल 4 करोड़ 66 लाख मतदाता थे। इस बार ये संख्या 5 करोड़ 3 लाख 94 हजार 86 है। विधानसभा सीटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2013 चुनाव में भाजपा ने 165 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस महज 58 सीटों पर सिमट गई थी। बसपा ने 5 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 116 है।
नए दल भी मैदान में
बहरहाल, चुनाव तारीखों के एलान के साथ ही राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा, सपाक्स और जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) भी मैदान पर ताल ठोक रहे हैं। बसपा यहां तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसने इस बार अकेले ही लड़ने का फैसला किया है।
वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का संगठन सपाक्स भी इस बार मैदान में है और भाजपा सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक चुका है। इसके अलावा इस बार विधानसभा चुनाव में आदिवासी नेताओं की पार्टी जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) भी अपने उम्मीदवार उतार रही है। जयस का उद्देश्य अपनी सरकार बनाना है ताकि आदिवासियों के हितों की अनदेखी ना हो।
बता दें कि पिछले चुनाव में कुल 4 करोड़ 66 लाख मतदाता थे। इस बार ये संख्या 5 करोड़ 3 लाख 94 हजार 86 है। विधानसभा सीटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2013 चुनाव में भाजपा ने 165 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस महज 58 सीटों पर सिमट गई थी। बसपा ने 5 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 116 है।
नए दल भी मैदान में
बहरहाल, चुनाव तारीखों के एलान के साथ ही राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा, सपाक्स और जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) भी मैदान पर ताल ठोक रहे हैं। बसपा यहां तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसने इस बार अकेले ही लड़ने का फैसला किया है।
वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का संगठन सपाक्स भी इस बार मैदान में है और भाजपा सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक चुका है। इसके अलावा इस बार विधानसभा चुनाव में आदिवासी नेताओं की पार्टी जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) भी अपने उम्मीदवार उतार रही है। जयस का उद्देश्य अपनी सरकार बनाना है ताकि आदिवासियों के हितों की अनदेखी ना हो।