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शेल्टर होम केस: पूर्व CBI चीफ नागेश्वर राव को नहीं मिली माफी, कोर्ट चलने तक कोने में बिठाया

Tue, 12 Feb 2019 11:27 AM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Tue, 12 Feb 2019 11:27 AM IST
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Muzaffarpur shelter home: Nageswara Rao appears before the Supreme Court
नागेश्वर राव

सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव द्वारा बिना इजाजत मुजफ्फरपुर आश्रय गृह के जांच अधिकारी का सीआरपीएफ में तबादला करने के मामले में मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। राव पर सख्ती दिखाते हुए अदालत ने उनसे पूछा कि आपने ट्रांसफर से पहले इजाजत क्यों नहीं ली। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राव और अभियोजन निदेशक धांसू राम से कहा- अदालत के एक कोने में चले जाएं और कार्यवाही खत्म होने तक वहां बैठे रहें। न्यायालय ने राव, सीबीआई के अभियोजन निदेशक को अदालत की आज की कार्यवाही खत्म होने तक हिरासत में रहने की सजा सुनाई और उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

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सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राव और सीबीआई के विधि अधिकारी ने अदालत की अवमानना की है। बिना इजाजत जांच अधिकारी का तबादला करना  यदि यह अवमानना नहीं है तो क्या है? न्यायालय ने कहा - उनका रवैया कुछ ऐसा रहा है कि मुझे जो करना था, वह मैंने किया है। वहीं सीबीआई की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल अदालत के सामने पेश हुए और उन्होंने माना कि यह गलतियों की श्रृंखला थी।
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वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी है और उन्होंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया। अदालत ने राव को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, 'अदालत के आदेश की अवमानना हुई है। यह उनके (पूर्व अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव) करियर पर एक निशान होगा।' इसपर वेणुगोपाल ने कहा, 'उनका 32 सालों का बेदाग करियर रहा है। कृपया उनकी तरफ दयालु दृष्टिकोण को अपनाते हुए माफी को स्वीकार कर लें। राव ने खुद को अदालत की कृपा पर छोड़ा है।'

इससे पहले सोमवार को राव अदालत के सामने पेश हुए थे और उन्होंने आश्रय गृह के जांच अधिकारी का तबादला करने के मामले में अदालत से बिना शर्त माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नोटिस के जवाब में उन्होंने सोमवार को हलफनामा दायर किया था।

अपने हलफनामे में उन्होंने कहा था, 'मुझे अपनी गलती का अहसास है। बिना शर्त माफी मांगते हुए मैं कहना चाहता हूं कि मैंने जानबूझकर कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं किया। मैं तो सपने में भी ऐसा नहीं सोच सकता।' उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद जांच अधिकारी के तबादले पर 7 फरवरी को कोर्ट ने नागेश्वर राव को फटकारते हुए कहा था कि अब उन्हें भगवान ही बचा सकता है।

हलफनामे में नागेश्वर राव ने कहा कि वह अपनी गलती स्वीकार करते हैं। उनकी तरफ से दायर हलफनामे में लिखा है कि अदालत के आदेश के बिना मुख्य जांच अधिकारी को स्थानांतरित नहीं करना चाहिए, यह मेरी गलती है और मेरी माफी स्वीकार करें। बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को तलब किया था। अदालत ने राव को फटकार लगाई कि किस परिस्थिति में उन्होंने जांच अधिकारी का ट्रांसफर किया।

 

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