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'फेल' हो चुके पॉक्सो ई-बॉक्स को 'हिट' बनाने की तैयारी, बाल गृहों के बच्चों को देंगे जानकारी

Sun, 12 Aug 2018 10:03 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
हरेन्द्र, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Aug 2018 10:03 PM IST
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Muzaffarpur Deoria Shelter Home Case: government preparing to make POCSO e box more popular

मुजफ्फरपुर और देवरिया समेत कई बाल गृहों में बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले सामने आने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 'पॉक्सो ई-बॉक्स' की जानकारी देने का फैसला किया है। वहीं लॉन्चिंग के बाद से पॉक्सो ई-बॉक्स की सफलता संदेह के घेरे में रही है। खुद आयोग का कहना है कि 2016 से इसकी लॉन्चिंग के बाद से ही बामुश्किल दो हजार 'हिट्स' ही मिले हैं। 

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दो सालों में मात्र 60-70 ही शिकायतें

पॉक्सो ई-बॉक्स को अगस्त 2016 में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य था कि यौन शोषण से पीड़ित बच्चे वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लेकिन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इसकी लॉन्चिंग से अभी तक मात्र तकरीबन 2000 'हिट्स' ही मिले हैं, जिनमें से मात्र 60-70 'हिट्स' ही शिकायतों में परिवर्तित हो पाए। 
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बाल यौन शोषण एक सामाजिक समस्या 

इस बारे में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन स्तुति कक्कड़ का कहना है कि बाल यौन शोषण एक बहुत जटिल मामला है। उन्होंने बाल यौन शोषण को एक सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि 50 प्रतिशत से ज्यादा मासूम बच्चों के साथ यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सबसे हैरानी की बात तब होती है, जब ऐसा करने वाले, बच्चे के पिता, चाचा, भाई या परिवार के सदस्य ही इसमें शामिल होते हैं। यही स्थिति सबसे चिंताजनक है, जिनमें उनके नजदीकी रिश्तेदार ही बच्चों का यौन शोषण करते हैं। वह कहती हैं कि ऐसे में कौन अपने नजदीकी रिश्तेदारों के खिलाफ शिकायत करने की हिम्मत करेगा। 
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आयोग के सूत्रों का कहना है कि 'हिट्स' दर्ज मामलों की सही संख्या को नहीं दर्शाते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाइट पर यूजर पॉक्सो ई-बॉक्स लिंक पर क्लिक करते हैं, वह 'हिट्स' में दर्ज हो जाता है। लेकिन लिंक पर क्लिक करने का यह मतलब नहीं है कि यूजर शिकायत ही करने के लिए क्लिक कर रहा है।

पॉस्को ई-बॉक्स के बारे में स्कूलों में बताएंगे

Muzaffarpur Deoria Shelter Home Case: government preparing to make POCSO e box more popular

वहीं आयोग मैंबर सेक्रेटरी यशवंत जैन ने बताया कि स्कूलों में बच्चों के साथ बढ़ रहीं यौन हिंसा को देखते हुए अब प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को भी पॉस्को एक्ट और पॉस्को ई-बॉक्स के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि कई बार इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती है, जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को बच्चों के लिए दोस्ताना रवैया अपनाना चाहिए। पॉक्सो के तहत होने वाली घटनाओं पर गंभीर रहना चाहिए। स्कूल के अंदर जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो यह काफी हैरान और परेशान करने वाला होता है। 

एनसीईआरटी की किताबों में होगा शामिल

जैन ने पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि अगर किसी गुरुकुल, स्कूल, आश्रम में अपराध बच्चों के साथ होता है। इस बारे में कोई रिपोर्ट नहीं करता है, तो उसके खिलाफ भी मामला दर्ज होगा।

उन्होंने बताया कि नए सत्र से छात्र एनसीईआरटी की सोशल साइंस की किताब में पॉक्सो एक्ट के बारे में पढ़ सकेंगे। नये सत्र से इन किताबों के माध्यम से अच्छे और बुरे स्पर्श तथा चाइल्ड हेल्पलाइन के बारे में जानकारी मिलेगी। एनसीईआरटी की छठीं से बारहवीं तक की सभी किताबों के पहले पन्ने पर पॉक्सो ई-बॉक्स इंफॉर्मेशन दी गई है। 

पॉक्सो ई-बॉक्स के बारे में बाल गृहों के बच्चों को बताएंगे 

साथ ही यशवंत जैन का कहना है कि पिछले कुछ समय में देश के कुछ बाल गृहों में बच्चों के साथ यौन हिंसा की घटनाएं सामने आईं हैं, जिसके चलते इन बाल गृहों के बच्चों को पॉक्सो ई-बॉक्स की जानकारी होना आवश्यक है। बालगृहों में कुछ जगहों पर चित्रों के जरिए पॉक्सो की जानकारी दी जाए। उन्होंने बताया कि हम यह तय करेंगे कि कैसे बालगृहों के बच्चों को भी पॉस्को ई-बॉक्स की जानकारी हो, ताकि परेशानियों में घिरे बच्चे-बच्चियां सीधे आयोग से संपर्क कर सकें। 

बच्चों के साथ यौन हिंसा में महाराष्ट्र अव्वल

गौरतलब है कि राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में बच्चों के साथ यौन हिंसा के 3 हजार 350 मामले दर्ज किए गए। जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 1,043, उत्तर प्रदेश में 729 और मध्य प्रदेश में 471 मामले दर्ज हुए।

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