तीन तलाक: पीड़ित मुस्लिम महिला अब हिंदू औरतों को दिला रही इंसाफ
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बरेली की एक मुस्लिम महिला फरहत नकवी को 2007 में उसके शौहर ने अचानक तलाक दे दिया था। फरहत नकवी खुद को मिली तलाक टूटी नहीं हार मानने की बजाय उन महिलाओं को मदद देना शुरू कर दिया जो तीन तलाक से पीड़ित हैं। इसमें मुस्लिमों के आलावा हिंदू, इसाई और सिख महिलाएं भी शामिल हैं। केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहत ने गुरुवार को राहुल गांधी से ये अपील की है कि वे तीन तलाक बिल के पास होने में राज्यसभा में मदद करें, क्योंकि इस कुप्रथा से लाखों महिलाओं और बच्चों का जीवन नष्ट हो रहा है। इसके बाबत उन्होंने राहुल को एक पत्र भी लिखा है।
फरहत नकवी ने अमर उजाला से हुई बातचीत में कहा कि तीन तलाक बिल लोकसभा से बार-बार पास हो रहा है लेकिन राज्यसभा इसे कानून बनने से रोक रही है, इसलिए उन्होंने राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसका समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी इस बिल को पास कराने की अपील की है।
दूसरों के लिए लड़ना बना जिंदगी का मकसद
फरहत नकवी ने बताया कि 2005 में उनका निकाह हुआ था। 2007 में जब उनकी बेटी महज एक-डेढ़ महीने की ही थी, जब उनके पति ने उन्हें तलाक दे दिया। शिया समुदाय में तीन तलाक का प्रचलन नहीं है। उनके पति ने अनजाने तरीके से उन्हें बिना जानकारी के तलाक दिया था। तभी से उनका मुकदमा बरेली की अदालत में चल रहा है।
फरहत नकवी ने बताया कि उसके बाद उन्होंने तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया। पहले वे सिर्फ महिलाओं को सलाह देती थीं। इसके बाद उन्होंने 'मेरा हक फाउंडेशन' की स्थापना की जिससे पीड़ितों की आर्थिक और कानूनी मदद की जा सके। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे पहली कोशिश तलाक या ऐसी धमकी से पीड़ित महिलाओं का घर बसाने की होती है। वे अब तक हजारों उजड़े हुए परिवार बसा चुकी हैं। इन महिलाओं में सभी धर्मों की महिलाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि वे अब तक 450 से अधिक हिन्दू और सिख महिलाओं को तलाक मामले में न्याय दिला चुकी हैं।
कहां था मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
फरहत नकवी ने कहा कि जब उन्होंने यह लड़ाई लड़नी शुरू की तो उन्हें इस्लाम से बदर (बाहर) करने की धमकी दी गई। लेकिन उनके कदम नहीं रुके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तीन तलाक बिल अवश्य पास होगा। इसमें समय कुछ कम या ज्यादा भले ही लग जाये।
अब मुस्लिमों के रहनुमा होने वाले आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कुछ राजनीतिक दलों को लगता है कि इसका श्रेय भाजपा को जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उस समय कहां था जब लाखों महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा था। तब उन्होंने अपने घर की इस बुराई को दूर करने की पहल क्यों नहीं की। बात-बात पर महिलाओं के खिलाफ फतवा जारी करने वाले मौलवी आतंकियों के खिलाफ फतवा क्यों जारी नहीं करते। उन्होंने बोर्ड से भी अपना हठ छोड़ बिल पास कराने में मदद की अपील की।
क्या होना चाहिए
फरहत नकवी ने कहा कि पारिवारिक मामले बहुत ज्यादा बढ़ गये हैं। अदालतों पर बोझ बढ़ रहा है। उनकी मांग है कि हर शहर में आबादी के अनुपात में परिवार अदालतों को गठित किया जाये। इन मामलों की एक निश्चित समय सीमा में सुनवाई पूरी होनी चाहिए। लंबे समय तक मुकदमा चलने से महिलाओं-बच्चों का जीवन नर्क हो जाता है।