फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Muslim side stand- Nirmohi Akhara the right to worship at the disputed site and not the ownership

अयोध्या मामला : बाहरी अहाते में पूजा करता था अखाड़ा, मालिकाना हक हमारा था- मुस्लिम पक्ष

Fri, 06 Sep 2019 05:35 AM IST
निलेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Fri, 06 Sep 2019 05:35 AM IST
विज्ञापन
Muslim side stand- Nirmohi Akhara the right to worship at the disputed site and not the ownership
राम मंदिर विवाद - फोटो : self

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बृहस्पतिवार को कहा कि विवादित ढांचे के बाहरी अहाते में निर्मोही अखाड़ा 1855 से पूजा करता था, लेकिन मालिकाना हक मुस्लिमों के पास था।

विज्ञापन


इसके साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के कई गवाहों पर सवाल उठाए। एक गवाह के बारे में बताया कि उसने 200 से अधिक मामलों में गवाही दी है। उसका मानना है कि एक झूठ बोलने से कुछ नहीं होता। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
विज्ञापन


चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष सुनवाई के 20वें दिन धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़े के गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं। लगता है कि उनके बयानों को प्रभावित किया गया। गवाह राजाराम पांडेय औ्र सत्य नारायण त्रिपाठी के बयानों से साफ है कि वे कभी मौके पर नहीं गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा कि बयान भले विरोधाभासी हैं लेकिन क्या आप इस बात से सहमत हैं कि अखाड़ा का शेबियत (देवस्थान के देखरेख) अधिकार बनता है? अगर आप ऐसा स्वीकार करते हैं तो उनके साक्ष्यों को भी मानना चाहिए। इसके जवाब में धवन ने कहा, दावा किया जाता है कि अखाड़ा 700 वर्ष से वहां देखरेख करता था, कोई इसे 250 साल बताता है।

एक गवाह ने कहा कि विवादित स्थल पर 12 लाख वर्ष से राम हैं, लेकिन हम तथ्यों को नकार नहीं सकते। तथ्य यह हैं कि अखाड़ा वहां 1855 से पूजा करता था और महंत रघुवर दास ने 1885 में वाद दायर किया।

बाहरी अहाते में पूजा करता था अखाड़ा, मालिकाना हक हमारा था : मुस्लिम पक्ष

धवन ने कहा, अखाड़ा बाहरी अहाते में स्थित राम चबूतरे पर पूजा करता था। हमने राम चबूतरे पर पूजा और पूजा के अधिकार को कभी मना नहीं किया लेकिन उस स्थल का मालिकाना हक हमारे पास था।

अखाड़ा दावा करता है कि 1734 से उस जगह पर उसका मालिकाना हक है। हमारा कहना है कि वे 1855 में बाहरी आहते में थे। राम चबूतरा बाहरी अहाते में है और माना जाता रहा है कि वही राम जन्मस्थल है, लेकिन यहां विवाद जमीन के स्वामित्व का है।



इस पर जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने पूछा कि क्या मुस्लिम और निर्मोही अखाड़ा वहां साथ रह रहे थे? इसके जवाब में धवन ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि अखाड़े के पास मालिकाना हक है। मूर्ति को 22-23 दिसंबर, 1949 को विवादित ढांचे के गुंबद के नीचे रखा गया। इसके साक्ष्य हैं। उन्होंने जिलाधिकारी केके नायर और सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह के फोटोग्राफ पेश किए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed