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Religious Places Row: 'जहां मूर्ति, वहां नमाज नहीं, संवाद से निकले विवाद का हल', मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का बयान

Fri, 03 Jan 2025 05:29 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 03 Jan 2025 05:29 PM IST
सार

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मंडल ने कहा कि ऐसी मस्जिदें जहां किसी कारणवश नमाज नहीं हो रही हो या जो वीरान पड़ी हों, उन मस्जिदों को मुस्लिमों को सौंपा जाए ताकि वे उन्हें पुनः स्थापित कर आबाद कर सकें।

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Muslim Rashtriya Manch has taken a historic initiative aimed at promoting communal harmony News update
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच - फोटो : विकिपीडिया

विस्तार

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने भारतीय समाज में सांप्रदायिक सौहार्द्र और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऐतिहासिक पहल की है। मंच ने देश के मुस्लिमों से अपील की है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राष्ट्रहित में 142 करोड़ लोगों के लिए दिए बयान का सम्मान करते हुए और बड़ा दिल दिखाते हुए भारत को विकास के रास्ते पर ले जाने का संकल्प लेना चाहिए।

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने बताया कि अदालतें सर्वोपरि हैं, लेकिन विवादित धर्मस्थलों पर संवाद के माध्यम से हल निकाला जाना चाहिए। इससे देश की एकता, अखंडता, सौहार्द, भाईचारा और मेलमिलाप बना रहता है, आपसी रंजिशें नहीं रहती हैं। अतः मंच का आह्वान है कि जहां कहीं भी दो पक्षों के बीच अदालत में झगड़ा चल रहा है, वहां दोनों पक्ष आपसी संवाद कर 'आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट' करें तो यह किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहतर होगा।
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मंच का बड़ा फैसला
मंच के राष्ट्रीय संयोजक मंडल ने एलान किया कि ऐतिहासिक इबादतगाहों को पुनर्स्थापित करते हुए काशी, मथुरा और सम्भल जैसी जगहों पर बने विवादित ढांचों को हिंदू समुदाय को संवाद के माध्यम से सौंपने का समर्थन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, मंच ने कहा कि ऐसी मस्जिदें जहां किसी कारणवश नमाज नहीं हो रही हो या जो वीरान पड़ी हों, उन मस्जिदों को मुस्लिमों को सौंपा जाए ताकि वे उन्हें पुनः स्थापित कर आबाद कर सकें।
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मुस्लिम संगठनों का समर्थन
चार जनवरी को लखनऊ में मंच का बड़ा कार्यक्रम है। उससे ठीक पहले शुक्रवार की सुबह लखनऊ की बैठक पर चर्चा और एजेंडा तय करने के लिए मंच की ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें 20 राज्यों और छह यूनियन टेरोटरी मिलाकर 70 स्थानों से मंच की बैठक में लोग जुड़े। बैठक की अध्यक्षता मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने की। इसमें देश भर के कई छोटे-बड़े मुस्लिम संगठनों और उनके नेताओं ने शिरकत की।

इस ऐतिहासिक बैठक में महिला बुद्धिजीवी ग्रुप, सूफी शाह मलंग संगठन, युवा शिक्षा एवं मदरसा संस्थान, विश्व शांति परिषद, भारत फर्स्ट, हिंदुस्तान फर्स्ट हिंदुस्तानी बेस्ट, गौ सेवा समिति, पर्यावरण एवं जनजीवन सुरक्षा संस्थान, जमीयत हिमायतुल इस्लाम, कश्मीरी तहफ्फुज आर्गेनाइजेशन और कश्मीर सेवा संघ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच के सभी राष्ट्रीय संयोजक, प्रांत संयोजक और सह संयोजकों ने इस बैठक में भाग लिया और मंच के प्रस्तावों का समर्थन किया। सभी वक्ताओं ने इस्लामिक शिक्षाओं और भाईचारे के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए विवादित इबादतगाहों को हिंदू समुदाय को सौंपने का प्रस्ताव रखा।


यह लोग मौजूद रहे
बैठक में मंच के प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में डॉ. शाहिद अख्तर, पद्मश्री अनवर खान, गिरीश जुयाल, विराग पाचपोर, सैयद रजा हुसैन रिजवी, डॉ. शालिनी अली, अबु बकर नकवी, एस. के. मुद्दीन, शाहिद सईद, हबीब चौधरी, इरफान अली पीरजादा, शिराज कुरैशी, मौलाना इरफान कच्छोची, इलियास अहमद, फैज खान, इमरान चौधरी, बिलाल उर रहमान, हाफिज साबरीन, ठाकुर राजा रईस, ताहिर शाह, रेशमा हुसैन, आसिफ अली, इमरान हुसैन, मंसूर आलम, ताहिर हुसैन, मोहम्मद नईम, मोहम्मद हसन नूरी, अब्दुल नईम सिलवट, अब्दुर रहमान, अब्दुल रऊफ, आबिद शेख, तनवीर अब्बास, नुसरत जहां, अमीर खान, कल्लू अंसारी, अंजुम अंसारी, चांदनी बानो, मीर नजीर, नसीब चौधरी, अली जफर और तसनीम पटेल समेत 200 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया।

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