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'बच्चों की मांगों को डंडा मारकर सुनना सही नहीं': छात्र आंदोलन पर बोले जोशी; सीईसी विवाद पर कही ये बड़ी बात
Thu, 08 Oct 2026 01:07 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:07 PM IST
सार
मुरली मनोहर जोशी ने नई शिक्षा नीति पर कहा कि अभी इसे लागू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है, इसलिए इसके नतीजों पर अभी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर उन्होंने निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी नौकरशाही को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया। वरिष्ठ भाजपा नेता ने और क्या-क्या कहा? जानिए...
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मुरली मनोहर जोशी, पूर्व केंद्रीश शिक्षा मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नई शिक्षा नीति और सीईसी के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने अपनी बात रखी। नई शिक्षा नीति पर उन्होंने कहा कि अभी इस पर किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि इसे लागू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है और प्रक्रिया अभी जारी है। ऐसे में इस समय इसके नतीजों को लेकर कुछ कहना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अभी यह सिर्फ शुरुआत है और इसके परिणाम आगे पता चलेंगे।
वहीं, सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर जोशी ने निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी व्यवस्था को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया।
सीईसी के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर क्या बोले जोशी?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा होनी चाहिए। उन्होंने अब्राहम लिंकन के इसी विचार का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष भी जिम्मेदार तरीके से अपनी भूमिका निभाए।
संविधान के दायरे में हो पूरी प्रक्रिया- मुरली मनोहर जोशी
मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि विपक्ष के पास एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था संविधान के दायरे में चलनी चाहिए। अगर संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उस मामले को देखना चाहिए।
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यह भी पढ़ें: बिहार : पटना में तेजस्वी का 'राहुल रूप'; सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन में बैरिकेड पर चढ़ गए
सीईसी को लेकर विपक्ष का विरोध तेज
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध पिछले कुछ दिनों में तेज हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी को लेकर विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
दिल्ली में प्रदर्शन और हिरासत का मामला
इसी मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। आठ अक्तूबर को भी विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी रहा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई गई।
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वहीं, सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर जोशी ने निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी व्यवस्था को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया।
सीईसी के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर क्या बोले जोशी?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा होनी चाहिए। उन्होंने अब्राहम लिंकन के इसी विचार का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष भी जिम्मेदार तरीके से अपनी भूमिका निभाए।
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संविधान के दायरे में हो पूरी प्रक्रिया- मुरली मनोहर जोशी
मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि विपक्ष के पास एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था संविधान के दायरे में चलनी चाहिए। अगर संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उस मामले को देखना चाहिए।
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सीईसी को लेकर विपक्ष का विरोध तेज
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध पिछले कुछ दिनों में तेज हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी को लेकर विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
दिल्ली में प्रदर्शन और हिरासत का मामला
इसी मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। आठ अक्तूबर को भी विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी रहा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई गई।