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Waqf: लोकसभा में वक्फ विधेयक पारित होते ही खुशी से झूमे मुनंबम के लोग, जानिए क्या है ये पूरा भूमि विवाद
Thu, 03 Apr 2025 02:42 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 03 Apr 2025 02:42 PM IST
सार
वक्फ संपत्ति विवाद से जुड़े देश में हजारों मामले हैं। इनमें केरल का मुनंबम भूमि विवाद भी शामिल है। बुधवार को जैसे ही लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हुआ तो मुनंबम के लोग खुशी से झूम उठे और उन्होंने पीएम मोदी के समर्थन में नारेबाजी और आतिशबाजी कर खुशी जताई।
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लोकसभा से पारित हुआ वक्फ संशोधन विधेयक
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बुधवार को जैसे ही लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हुआ, वैसे ही केरल के मुनंबम के निवासी खुशी से झूम उठे। गौरतलब है कि मुनंबम के लोग मुनंबम भू संरक्षा समिति के बैनर तले बीते 173 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। इस दौरान लोगों ने 'नरेंद्र मोदी जिंदाबाद' के नारे लगाए। दरअसल मुनंबम में सैंकड़ों एकड़ जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया था, जिसके बाद यह जमीन विवाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था।
राज्यसभा में हुआ मुनंबम विवाद का जिक्र
समिति के संयोजक जोसेफ बेनी ने कहा कि विधेयक को लोकसभा से पारित होने से उन्हें बेहद खुशी हुई है और उन्होंने उम्मीद जताई कि जब यह विधेयक कानून बन जाएगा तो उन्हें जमीन के राजस्व अधिकार वापस मिल जाएंगे। लोगों ने कांग्रेस और वामपंथी सांसदों द्वारा इस मामले में मदद ने करने का आरोप लगाया और साथ ही पीएम मोदी की तारीफ जमकर तारीफ की। इन लोगों को उम्मीद है कि वक्फ विधेयक के प्रभावी होने के बाद उनकी भूमि पर जो विवाद है, वह समाप्त हो जाएगा। गुरुवार को भाजपा नेता राजीव चंद्रशेकर और वी मुरलीधरन मुनंबम का दौरा भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ विधेयक पेश करते हुए भी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मुनंबम विवाद का जिक्र किया। द साइरो मालाबार चर्च ने भी वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन किया और लोकसभा से इसके पारित होने पर खुशी जाहिर की।
ये भी पढ़ें- Waqf Bill in Rajya Sabha: राज्यसभा में सरकार की असल परीक्षा, जानें कैसे NDA-विपक्ष के लिए एक-एक वोट होगा जरूरी
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क्या है मुनंबम भूमि विवाद
केरल के एर्नाकुलम जिले में वाइपिन द्वीप पर मुनंबम तटीय इलाके में सैंकड़ों एकड़ जमीन पर कई गांव बसे हैं, जहां पारंपरिक तौर पर मछली पकड़ने वाले समुदाय के लोग रहते हैं। यहां 404 एकड़ जमीन पर केरल राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया। इस दावे के खिलाफ इस जमीन पर बसे 600 परिवार विरोध में उतर आए हैं। इनमें से 400 परिवार ईसाई हैं और पिछड़े लैटिन कैथोलिक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। बाकी परिवार हिंदुओं के हैं। विवाद इस बात को लेकर है कि साल 1902 में त्रावणकोर शाही परिवार ने 404 एकड़ जमीन अब्दुल सत्तार मूसा नाम के व्यापारी को यह जमीन पट्टे पर दी थी। अब्दुल सत्तार बाद में कोच्चि शिफ्ट हो गए। पीड़ित परिवारों का दावा है कि जमीन पट्टे पर दिए जाने से पहले से ही उनके पूर्वज यहां बसे हुए थे।
ये भी पढ़ें- Waqf Bill: वक्फ बिल राज्यसभा में पास हुआ तो कोर्ट जाएगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, नीतीश-नायडू पर उठाए सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1948 में अब्दुल सत्तार के दामाद मोहम्मद सिद्दीक ने इस जमीन को अपने नाम पर रजिस्टर कराया और बाद में इसे कोझिकोड के फारूख कॉलेज के प्रबंधन को जमीन सौंपने का फैसला किया। साल 1950 में कोच्चि के एडापल्ली के सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में एक वक्फ डीड रजिस्टर किया गया, जिसे सिद्दीक द्वारा फारूख कॉलेज के अध्यक्ष के नाम से रजिस्टर किया गया था। वक्फ डीड वह दस्तावेज होता है, जो किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करता है। साल 1960 में इस जमीन को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई। जमीन पर रहने वाले लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। साल 2008 में केरल सरकार ने एक जांच आयोग गठित किया। साल 2009 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया। साल 2019 में केरल राज्य वक्फ बोर्ड ने संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। साल 2022 में यह मामला फिर से हाईकोर्ट पहुंचा और अभी भी इसे लेकर कई अपील कोर्ट में दाखिल हैं।
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राज्यसभा में हुआ मुनंबम विवाद का जिक्र
समिति के संयोजक जोसेफ बेनी ने कहा कि विधेयक को लोकसभा से पारित होने से उन्हें बेहद खुशी हुई है और उन्होंने उम्मीद जताई कि जब यह विधेयक कानून बन जाएगा तो उन्हें जमीन के राजस्व अधिकार वापस मिल जाएंगे। लोगों ने कांग्रेस और वामपंथी सांसदों द्वारा इस मामले में मदद ने करने का आरोप लगाया और साथ ही पीएम मोदी की तारीफ जमकर तारीफ की। इन लोगों को उम्मीद है कि वक्फ विधेयक के प्रभावी होने के बाद उनकी भूमि पर जो विवाद है, वह समाप्त हो जाएगा। गुरुवार को भाजपा नेता राजीव चंद्रशेकर और वी मुरलीधरन मुनंबम का दौरा भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ विधेयक पेश करते हुए भी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मुनंबम विवाद का जिक्र किया। द साइरो मालाबार चर्च ने भी वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन किया और लोकसभा से इसके पारित होने पर खुशी जाहिर की।
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क्या है मुनंबम भूमि विवाद
केरल के एर्नाकुलम जिले में वाइपिन द्वीप पर मुनंबम तटीय इलाके में सैंकड़ों एकड़ जमीन पर कई गांव बसे हैं, जहां पारंपरिक तौर पर मछली पकड़ने वाले समुदाय के लोग रहते हैं। यहां 404 एकड़ जमीन पर केरल राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया। इस दावे के खिलाफ इस जमीन पर बसे 600 परिवार विरोध में उतर आए हैं। इनमें से 400 परिवार ईसाई हैं और पिछड़े लैटिन कैथोलिक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। बाकी परिवार हिंदुओं के हैं। विवाद इस बात को लेकर है कि साल 1902 में त्रावणकोर शाही परिवार ने 404 एकड़ जमीन अब्दुल सत्तार मूसा नाम के व्यापारी को यह जमीन पट्टे पर दी थी। अब्दुल सत्तार बाद में कोच्चि शिफ्ट हो गए। पीड़ित परिवारों का दावा है कि जमीन पट्टे पर दिए जाने से पहले से ही उनके पूर्वज यहां बसे हुए थे।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1948 में अब्दुल सत्तार के दामाद मोहम्मद सिद्दीक ने इस जमीन को अपने नाम पर रजिस्टर कराया और बाद में इसे कोझिकोड के फारूख कॉलेज के प्रबंधन को जमीन सौंपने का फैसला किया। साल 1950 में कोच्चि के एडापल्ली के सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में एक वक्फ डीड रजिस्टर किया गया, जिसे सिद्दीक द्वारा फारूख कॉलेज के अध्यक्ष के नाम से रजिस्टर किया गया था। वक्फ डीड वह दस्तावेज होता है, जो किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करता है। साल 1960 में इस जमीन को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई। जमीन पर रहने वाले लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। साल 2008 में केरल सरकार ने एक जांच आयोग गठित किया। साल 2009 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया। साल 2019 में केरल राज्य वक्फ बोर्ड ने संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। साल 2022 में यह मामला फिर से हाईकोर्ट पहुंचा और अभी भी इसे लेकर कई अपील कोर्ट में दाखिल हैं।