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मुंबई: तरबूज में मिले जिस जहर से गई थी पूरे परिवार की जान, उसी का कैप्सूल बनाकर बांट रहा था शातिर
Sat, 27 Jun 2026 07:25 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 27 Jun 2026 07:25 PM IST
सार
क्या मुंबई को दहलाने के लिए चूहे मारने वाले जहर को एक 'साइलेंट वेपन' बना दिया गया है? जो जहर कल तक एक बंद कमरे में तरबूज के जरिए पूरे परिवार को लील गया, आज वही हजारों की भीड़ को मारने के लिए कैप्सूल की शक्ल में खुलेआम बांटा जा रहा था। पुलिस की मुस्तैदी से एक भयावह नरसंहार तो टल गया, लेकिन इन दोनों घटनाओं के पीछे छिपा असली मास्टरमाइंड'कौन है और क्या आपकी थाली में रखा खाना वाकई सुरक्षित है? ये ऐसे सुलगते सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है।
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चूहे मारने वाले जहर से सामूहिक हत्याकांड की कोशिश।
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाले मामले का खुलासा हुआ है। जिस खतरनाक जहर ने दो महीने पहले एक ही परिवार के चार लोगों को हमेशा के लिए सुला दिया था, ठीक उसी जानलेवा केमिकल को 'दर्द की दवा' बताकर भीड़ में बांटने वाले एक शातिर को पुलिस ने रंगे हाथों दबोच लिया है। इस बड़ी कामयाबी से जहां मुहर्रम के जुलूस में होने वाली एक खौफनाक त्रासदी को टाल दिया गया, वहीं पूरी मायानगरी में इस जहर को लेकर हड़कंप मच गया है। आखिर इस खतरनाक साजिश के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है? क्या मुंबई को दहलाने के लिए चूहे मारने वाले जहर का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है?
जब तरबूज खाते ही उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
यह पूरा मामला दो कड़ियों में जुड़ा हुआ है, जिसकी पहली और खौफनाक कड़ी 25 अप्रैल 2026 की रात दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में सामने आई थी। यहां रहने वाले अब्दुल्लाह डोकाडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35), बड़ी बेटी आयशा (16) और छोटी बेटी जैनब (13) ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर रात में बिरयानी खाई थी। सब कुछ ठीक था, लेकिन रात करीब 1 बजे पूरे परिवार ने बाजार से लाया गया तरबूज खाया। तरबूज खाते ही अचानक सबकी तबीयत बिगड़ने लगी। तेज उल्टी, दस्त और सांस फूलने के बाद चारों को तुरंत जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर चारों की दर्दनाक मौत हो गई।
हाल ही में आई फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। मृतकों के लीवर, किडनी और स्प्लीन के साथ-साथ तरबूज के टुकड़ों में जिंक फॉस्फाइड नाम का घातक जहर पाया गया, जो आमतौर पर चूहे मारने के काम आता है। बिरयानी या अन्य किसी खाने में जहर का कोई अंश नहीं था। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर तरबूज के भीतर यह जहर कैसे पहुंचा? क्या किसी ने सुई के जरिए तरबूज में जहर इंजेक्ट किया था या यह कोई सोची-समझी सामूहिक हत्या थी? यह गुत्थी आज भी अनसुलझी है।
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कैसे बरामद हुए 14,900 जहरीले कैप्सूल?
अभी अप्रैल महीने की उस मिस्ट्री से पर्दा उठा भी नहीं था कि शनिवार को भायखला इलाके में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुंबई पुलिस ने एक बड़ी आतंकी जैसी साजिश को नाकाम कर दिया। पुलिस ने मौके से पुणे के रहने वाले फैयाज प्रेमजी नाम के एक पेंट कारोबारी को गिरफ्तार किया है। यह शातिर शख्स जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और भीड़ को 'दर्द निवारक दवा' का झांसा देकर खाली कैप्सूल बांट रहा था। पुलिस ने जब शक के आधार पर उसे हिरासत में लिया और कैप्सूल्स की जांच की, तो उनके होश उड़ गए; इन कैप्सूल्स के अंदर भारी मात्रा में वही कातिल जिंक फॉस्फाइड जहर भरा हुआ था।
प्रशासन का क्या कहना है?
डीसीपी जयंत मीणा के मुताबिक, आरोपी का मकसद बहुत बड़े पैमाने पर जनहानि पहुंचाना था। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी ने इसके लिए 50 किलो खुला जहर और करीब 30,000 खाली कैप्सूल ऑर्डर किए थे, जिनमें से पुलिस ने 14,900 तैयार जहरीले कैप्सूल बरामद कर लिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी फैयाज साल 2025 में ईरान और इराक की यात्रा पर भी गया था। पुलिस अब उसके इस अंतरराष्ट्रीय सफर, उसके मददगारों और इस खौफनाक मंसूबे के पीछे छिपे असली मोटिव की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है।
यह भी पढ़ें: Mumbai Poison In Capsules: महाराष्ट्र में बड़ी साजिश की आशंका, मुंबई में जहरीले कैप्सूल जब्त; पुलिस क्या बोली?
इस पूरे मामले की 7 बड़ी बातें
कातिल केमिकल एक ही: दोनों ही वारदातों में सबसे बड़ी समानता जिंक फॉस्फाइड जहर का इस्तेमाल है, जो पेट के एसिड से मिलकर चंद मिनटों में जानलेवा फॉस्फीन गैस बनाता है।
बड़ी मास-पॉइजनिंग की साजिश: भायखला में अगर पुलिस समय रहते मुस्तैद न होती, तो हजारों लोग दर्द की दवा समझकर इस जहर को खा लेते और एक भीषण त्रासदी हो जाती।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का शक: आरोपी फैयाज प्रेमजी का साल 2025 में ईरान और इराक जाना पुलिस के शक के दायरे को ग्लोबल नेटवर्क की तरफ घुमा रहा है।
पेंट कारोबार की आड़: आरोपी पुणे में पेंट का धंधा करता है, जिससे उसे केमिकल और जहर की आसान डिलीवरी मिलने में मदद मिलने की आशंका है।
तरबूज का रहस्य बरकरार: डोकाडिया परिवार के मामले में आज भी पुलिस यह साफ नहीं कर पाई है कि तरबूज में जहर जानबूझकर मिलाया गया था या यह कोई अजीबोगरीब दुर्घटना थी।
अंगों को सीधे नुकसान: डॉक्टरों के मुताबिक यह जहर शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन ब्लॉक कर देता है, जिससे लीवर और किडनी तुरंत फेल हो जाते हैं।
मुंबई पुलिस का हाई अलर्ट: पुलिस ने पूरी मुंबई के नागरिकों को सावधान करते हुए किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से खाने-पीने की चीजें या दवाइयां न लेने की सख्त हिदायत दी है।
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जब तरबूज खाते ही उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
यह पूरा मामला दो कड़ियों में जुड़ा हुआ है, जिसकी पहली और खौफनाक कड़ी 25 अप्रैल 2026 की रात दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में सामने आई थी। यहां रहने वाले अब्दुल्लाह डोकाडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35), बड़ी बेटी आयशा (16) और छोटी बेटी जैनब (13) ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर रात में बिरयानी खाई थी। सब कुछ ठीक था, लेकिन रात करीब 1 बजे पूरे परिवार ने बाजार से लाया गया तरबूज खाया। तरबूज खाते ही अचानक सबकी तबीयत बिगड़ने लगी। तेज उल्टी, दस्त और सांस फूलने के बाद चारों को तुरंत जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर चारों की दर्दनाक मौत हो गई।
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हाल ही में आई फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। मृतकों के लीवर, किडनी और स्प्लीन के साथ-साथ तरबूज के टुकड़ों में जिंक फॉस्फाइड नाम का घातक जहर पाया गया, जो आमतौर पर चूहे मारने के काम आता है। बिरयानी या अन्य किसी खाने में जहर का कोई अंश नहीं था। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर तरबूज के भीतर यह जहर कैसे पहुंचा? क्या किसी ने सुई के जरिए तरबूज में जहर इंजेक्ट किया था या यह कोई सोची-समझी सामूहिक हत्या थी? यह गुत्थी आज भी अनसुलझी है।
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कैसे बरामद हुए 14,900 जहरीले कैप्सूल?
अभी अप्रैल महीने की उस मिस्ट्री से पर्दा उठा भी नहीं था कि शनिवार को भायखला इलाके में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुंबई पुलिस ने एक बड़ी आतंकी जैसी साजिश को नाकाम कर दिया। पुलिस ने मौके से पुणे के रहने वाले फैयाज प्रेमजी नाम के एक पेंट कारोबारी को गिरफ्तार किया है। यह शातिर शख्स जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और भीड़ को 'दर्द निवारक दवा' का झांसा देकर खाली कैप्सूल बांट रहा था। पुलिस ने जब शक के आधार पर उसे हिरासत में लिया और कैप्सूल्स की जांच की, तो उनके होश उड़ गए; इन कैप्सूल्स के अंदर भारी मात्रा में वही कातिल जिंक फॉस्फाइड जहर भरा हुआ था।
प्रशासन का क्या कहना है?
डीसीपी जयंत मीणा के मुताबिक, आरोपी का मकसद बहुत बड़े पैमाने पर जनहानि पहुंचाना था। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी ने इसके लिए 50 किलो खुला जहर और करीब 30,000 खाली कैप्सूल ऑर्डर किए थे, जिनमें से पुलिस ने 14,900 तैयार जहरीले कैप्सूल बरामद कर लिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी फैयाज साल 2025 में ईरान और इराक की यात्रा पर भी गया था। पुलिस अब उसके इस अंतरराष्ट्रीय सफर, उसके मददगारों और इस खौफनाक मंसूबे के पीछे छिपे असली मोटिव की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है।
यह भी पढ़ें: Mumbai Poison In Capsules: महाराष्ट्र में बड़ी साजिश की आशंका, मुंबई में जहरीले कैप्सूल जब्त; पुलिस क्या बोली?
इस पूरे मामले की 7 बड़ी बातें
कातिल केमिकल एक ही: दोनों ही वारदातों में सबसे बड़ी समानता जिंक फॉस्फाइड जहर का इस्तेमाल है, जो पेट के एसिड से मिलकर चंद मिनटों में जानलेवा फॉस्फीन गैस बनाता है।
बड़ी मास-पॉइजनिंग की साजिश: भायखला में अगर पुलिस समय रहते मुस्तैद न होती, तो हजारों लोग दर्द की दवा समझकर इस जहर को खा लेते और एक भीषण त्रासदी हो जाती।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का शक: आरोपी फैयाज प्रेमजी का साल 2025 में ईरान और इराक जाना पुलिस के शक के दायरे को ग्लोबल नेटवर्क की तरफ घुमा रहा है।
पेंट कारोबार की आड़: आरोपी पुणे में पेंट का धंधा करता है, जिससे उसे केमिकल और जहर की आसान डिलीवरी मिलने में मदद मिलने की आशंका है।
तरबूज का रहस्य बरकरार: डोकाडिया परिवार के मामले में आज भी पुलिस यह साफ नहीं कर पाई है कि तरबूज में जहर जानबूझकर मिलाया गया था या यह कोई अजीबोगरीब दुर्घटना थी।
अंगों को सीधे नुकसान: डॉक्टरों के मुताबिक यह जहर शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन ब्लॉक कर देता है, जिससे लीवर और किडनी तुरंत फेल हो जाते हैं।
मुंबई पुलिस का हाई अलर्ट: पुलिस ने पूरी मुंबई के नागरिकों को सावधान करते हुए किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से खाने-पीने की चीजें या दवाइयां न लेने की सख्त हिदायत दी है।