{"_id":"6517003f51faf634df03cb46","slug":"mumbai-jumbo-covid-centre-scam-patkar-played-key-role-to-get-contract-diverted-money-says-ed-chargesheet-2023-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड सेंटर घोटाला: ED ने चार्जशीट में कहा- पाटकर ने ठेका दिलाने में निभाई मुख्य भूमिका, पैसा डायवर्ट किया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कोविड सेंटर घोटाला: ED ने चार्जशीट में कहा- पाटकर ने ठेका दिलाने में निभाई मुख्य भूमिका, पैसा डायवर्ट किया
Fri, 29 Sep 2023 10:20 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 29 Sep 2023 10:20 PM IST
सार
ईडी के आरोपपत्र के मुताबिक, 30 फीसदी हिस्सेदारी के साथ लाइफलाइन हॉस्पिटल मैनेजमेंट सर्विसेज के प्रमुख भागीदारों में से एक पाटकर ने कंपनी बनाते समय केवल 12,500 रुपये का निवेश किया था।
विज्ञापन
Sujit Patkar
- फोटो : PTI (File Photo)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई जंबो कोविड सेंटर घोटाले के मामले में आरोप पत्र दायर किया है। इसमें एंजेसी ने कहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत के कथित करीबी कारोबारी सुजीत पाटकर सुजीत पाटकर ने जंबो कोविड-19 केंद्र चलाने के लिए उसकी साझेदारी कंपनी को एक सिविल कॉन्ट्रैक्ट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विज्ञापन
ईडी के मुताबिक, राजनीतिक रूप से सजग व्यक्ति के साथ नजदीकी के कारण पाटकर इन केंद्रों के लिए निविदा प्रक्रिया के बारे में पहले ही जानकारी इकट्ठा करने में कामयाब रहा और अपराध की कुल 32.44 करोड़ रुपये की राशि में से 2.81 करोड़ रुपये की राशि उनके निजी बैंक खाते में भेज दी गई।
विज्ञापन
आरोपपत्र में पाटकर के अलावा जिन अन्य आरोपियों के नाम हैं, उनमें फर्म लाइफलाइन हॉस्पिटल मैनेजमेंट सर्विसेज, उसके तीन साझेदार और दहिसर जंबो कोविड सेंटर के डीन डॉ. किशोर बिसुरे शामिल हैं। पाटकर और बिसुरे को ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
विज्ञापन
ईडी के आरोपपत्र के मुताबिक, 30 फीसदी हिस्सेदारी के साथ लाइफलाइन हॉस्पिटल मैनेजमेंट सर्विसेज के प्रमुख भागीदारों में से एक पाटकर ने कंपनी बनाते समय केवल 12,500 रुपये का निवेश किया था। आरोप पत्र में कहा गया है कि पाटकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त था और उसने अन्य आरोपी साझेदारों और बृहन्मुंबई नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची और एक निविदा/ठेका हासिल करने में सफल रहा।
आरोप पत्र में कहा गया है कि वह 'राजनीतिक रूप से सजग व्यक्ति' के साथ निकटता के कारण निविदा प्रक्रिया के बारे में पूर्व जानकारी इकट्ठा करने में कामयाब रहा और फिर उसने और उसके सहयोगियों ने नागरिक अधिकारियों द्वारा जारी निविदा प्राप्त करने के लिए फर्म की स्थापना की। इसमें कहा गया है, 'पाटकर बीएमसी अधिकारियों के साथ संपर्क में रहता था और दहिसर व वर्ली में जंबो कोविड सुविधा के लिए मानव शक्ति (मैनपावर) आपूर्ति के अनुबंध को लाइफलाइन मैनेजमेंट सर्विसेज को आवंटित करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।'