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मुंबई आर्थिक राजधानी ही नहीं, झुग्गी-झोपड़ियों का शहर भी है, केंद्र ने बताया- किस मेट्रो शहर में हैं कितनी झुग्गियां

Wed, 16 Sep 2020 05:17 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Sep 2020 05:17 PM IST
सार

  • केंद्र सरकार ने संसद में दी जानकारी, देश के सभी चार मेट्रो शहरों में सबसे ज्यादा झुग्गी-बस्ती मुंबई में
  • वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को मकान उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही सरकार
  • केंंद्र ने बताया, गरीबों को आवास उपलब्ध कराने में राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण

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Mumbai is not only the financial capital, but also a city of slums, the center told which metro city how many slums are there
Mumbai Dharavi - फोटो : PTI (for Reference)

विस्तार

मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। लेकिन यहां की धारावी जैसी झुग्गी-झोपड़ी बस्तियां भी हमेशा चर्चा का केंद्र रही हैं। बुधवार को केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि देश के सभी चार मेट्रो शहरों में सबसे ज्यादा झुग्गी-झोपड़ियां मुंबई में बनी हुई हैं। सबसे ज्यादा 11 लाख 35 हजार 514 झुग्गियां ग्रेटर मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के क्षेत्र में बसी हुई हैं। इसके अलावा मुंबई के ही दूसरे नगर निगम 'नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन' क्षेत्र में 48,577 झुग्गियां बसी हुई हैं।

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केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंंह पुरी ने एक सवाल के जवाब में संसद को बताया कि मुंबई के बाद सबसे ज्यादा झुग्गी-झोपड़ियां दिल्ली में बनी हुई हैं। यहां इनकी संख्या 3 लाख 67 हजार 893 है। इसके बाद दक्षिण भारत के चेन्नई में 3 लाख 29 हजार 827 झुग्गियां बनी हुई हैं। कोलकाता में तीन लाख 755 झुग्गियां बनी हुई हैं।
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झुग्गियों को हटाने के उपाय जारी

केंद्र सरकार ने संसद में वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को मकान उपलब्ध कराने का वायदा दोहराया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार अगले दो वर्षों के भीतर सभी गरीबों को मकान उपलब्ध कराने का मजबूत इरादा रखती है और इस पर लगातार काम जारी है।

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लेकिन केंद्र ने कहा है कि इन शहरी क्षेत्रों में बसी झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने और इनमें रहने वाले गरीबों के पुनर्वास की जिम्मेदारी में केंद्र से ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की है क्योंकि जमीन का अधिकार राज्यों के ही पास होता है। सरकार ने कहा है कि वह राज्यों को इन गरीब बस्तियों को हटाने और गरीबों को वैकल्पिक निवास स्थान उपलब्ध कराने के मामले में प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी अनेक योजनाओं के जरिए सहयोग कर रहा है।

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