मुंबई: समुद्र से मरीन ड्राइव में फैला कचरा, कुछ हफ्तों पहले वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल होने की थी खबर
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मुंबई का मरीन ड्राइव बीते हफ्तों खबरों में तब आया था जब उसे यूनेसको की ओर से वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिलने की बात कही गई थी। इनमें ओवल मैदान, मरीन ड्राइव तक की इमारतें, मरीन ड्राइव के सामने की इमारतें और मरीन ड्राइव शामिल हैं। लेकिन इसके उलट अब मरीन ड्राइव एक अन्य बात को लेकर चर्चा में आ गया है और वह है यहां फैला हुआ कचरा। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन यहां से कई टन कचरा साफ किया गया। सड़क पर फैले कचरे के कारण यह किसी कूड़ेदान से कम नहीं लग रहा था। ब्रिहन मुंबई नगर पालिका (बीएमसी) के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने 9 मीट्रिक टन कूड़ा एकत्रित कर लिया है।
सहायक नगर आयुक्त किरन दिघावकर ने बताया, 'जुलाई और अगस्त में लगातार चार से पांच दिनों तक समुद्र की ऊंची लहरों से यहां कचरा आता है। इंटरकॉन्टिनेटल होटल और प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाईओवर के बीच 900 मीटर के क्षेत्र से कचरा साफ किया गया है। गुरुवार को एक टन कचरा साफ किया था। अब एकत्रित किया गया कचरा कुल 9 टन तक हो सकता है। इस काम के लिए बीएमसी की ओर से कुल 30 मजदूर लगाए गए हैं। लेकिन इस परेशानी से लाखों पर्यटक प्रभावित हो रहे हैं। वैसे तो मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा एक घंटा लगता है कचरे को साफ करने में लेकिन शुक्रवार को 4.85 मीटर की गति से तेज लहरें आईं।
जिसके बाद फैले कचरे को साफ करने में 2-3 घंटे का समय लग गया। दिघावकर ने आगे कहा कि यह प्रकृति का नियम है कि जो भी हम फेंकते हैं वही वापिस हमारे पास आता है। बीएमसी प्लास्टिक के एकल उपयोग को बैन करने के लिए काम कर रही है। निवासियों को भी प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने की जरूरत है और इसके विकल्पों की ओर ध्यान देना चाहिए। अब वक्त आ चुका है कि लोग नदी नालों में कचरा ना डालें और वैज्ञानिक रूप से उसका निपटान करें।
अधिकारियों का कहना है कि समुद्र से प्लास्टिक, थर्मोकोल आदि के गिलास, बोतल जैसा कचरा वहां आ गया था। इसके बाद जानकारी मिलते ही उसे तुरंत साफ भी किया गया। पिछले दो सालों से वर्सोवा बीच के सफाई कार्य में लगे अफरोज शाह का कहना है कि 'हम अपने महासागरों और समुद्र तटों को लंबे समय से नजरअंदाद करते आ रहे हैं। यही उपेक्षा अब ऐसी घटनाओं के तौर पर दिख रही है। मरीन ड्राइव पर अभी हम जो देख रहे हैं वह हमारी ही उपेक्षा है। स्थानीय लोगों, सरकार और स्थानीय निकायों को अब ये अहसास करने की जरूरत है कि यह एक आपात स्थिति है, जिसके लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया की जरूरत है।'