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मुंबई: एसएनजीपी को हाईकोर्ट का निर्देश, कहा- तय करे कि गणपति विसर्जिन के लिए कितने कृत्रिम तालाब हैं पर्याप्त
Mon, 25 Sep 2023 02:54 PM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Mon, 25 Sep 2023 02:54 PM IST
सार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) को निर्देश दिया कि वह यह तय करे कि आरे में कितने कृत्रिम तालाब गणपति विसर्जन के लिए पर्याप्त होंगे? अदालत की कोशिश है कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) की निगरानी समिति को यह तय करने का निर्देश दिया कि क्या आरे में एक कृत्रिम तालाब गणपति विसर्जन के लिए पर्याप्त होगा? अदालत ने कहा है कि उनका प्रयास है कि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।
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मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि यदि समिति को लगता है कि अधिक कृत्रिम तालाबों की आवश्यकता होगी, तो आवश्यक व्यवस्था की जायेगी। अदालत ने आगे कहा कि ये सभी विषय विशेषज्ञों द्वारा विचार किए जाने वाले मामले हैं। क्या पर्याप्त होगा, चाहे वह एक कृत्रिम तालाब हो या छह या फिर ट्रक पर लगे टैंक, यह निगरानी समिति पर निर्भर है।
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सीजे उपाध्याय ने कहा कि कोशिश यह है कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। हम समिति से विचार करने और उचित निर्णय लेने के लिए कहेंगे। यदि एक तालाब पर्याप्त है, तो ठीक है, यदि नहीं, तो हम केवल यह कह रहे हैं कि व्यवस्था की जा सकती है।
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सीईओ ने किया था इनकार
दरअसल, पीठ विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक नेता द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरे कॉलोनी में झीलों में विसर्जन की अनुमति मांगी गई थी। कॉलोनी के सीईओ ने इस साल झीलों पर विसर्जन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
केवल एक तालाब पर्यापत्त नहीं
याचिकाकर्ता के वकील अनिल सिंह ने सोमवार को पीठ को सूचित किया कि निगरानी समिति ने एक बैठक की और आरे के अंदर एक कृत्रिम तालाब स्थापित करने का निर्णय लिया, जहां पिछले बुधवार से विसर्जन किया जा रहा है। वहीं, नगर निकाय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि बीएमसी ने विसर्जन के लिए छह ट्रक-माउंटेड टैंक भी उपलब्ध कराए हैं।
सिंह ने कहा कि विसर्जन के लिए लाई जाने वाली मूर्तियों की संख्या को देखते हुए एक तालाब पर्याप्त नहीं है। पिछले साल, झीलों में विसर्जन की अनुमति के अलावा, सात कृत्रिम तालाब स्थापित किए गए थे। हम अब झीलों में विसर्जन की अनुमति नहीं मांग रहे हैं, लेकिन केवल अतिरिक्त कृत्रिम तालाबों की मांग की जा रही है।