Mumbai: लड़की को 'आइटम' कहने पर युवक को डेढ़ साल की जेल, कोर्ट ने कहा- ऐसे लोगों को सबक सिखाना जरूरी
ये मामला सात साल पुराना है। इस मामले में 20 अक्तूबर को सजा का एलान करते हुए डिंडोशी कोर्ट ने कहा कि किसी भी लड़की को संबोधित करने के लिए 'आइटम' शब्द का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से अपमानजनक है।
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देश में आए दिन लड़कियों के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म आदि के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे ही एक यौन उत्पीड़न के मामले में मुंबई डिंडोशी सत्र अदालत ने आरोपी शख्स को सजा सुनाई है। मोहम्मद अबरार खान पर आरोप है कि वह एक नाबालिग को 'आइटम' कहकर संबोधित करता था। सात साल पुराने इस मामले में अदालत ने आरोपी को डेढ़ साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने उसे 500 रुपये जुर्माने के तौर पर अदा करने का आदेश भी अदालत ने दिया है। सजा का एलान करने के बाद अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी लड़की को संबोधित करने के लिए “आइटम” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका इस्तेमाल केवल यौन उत्पीड़न के लिए किया जाता है इसका और कोई मतलब नहीं होता।
डिंडोशी कोर्ट के 28 पन्नों के दोषसिद्धि आदेश में कहा कि आमतौर पर यह शब्द लड़कों द्वारा लड़कियों को अपमानजनक तरीके से संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि यह उन्हें यौन तरीके से ऑब्जेक्ट करता है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह से लोगों को सबक सिखाने के लिए उन्हें वहींस मौके पर ही जवाब देने की जरूरत है।
मिली जानकारी के अनुसार, ये मामला सात साल पुराना है। इस मामले में 20 अक्तूबर को सजा का एलान करते हुए डिंडोशी कोर्ट ने कहा कि किसी भी लड़की को संबोधित करने के लिए 'आइटम' शब्द का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से अपमानजनक है।
गौरतलब है कि ये मामला सात साल पुराना है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 14 जुलाई, 2015 को लगभग 1.30 बजे, जब नाबालिग पीड़िता अपने स्कूल गई थी। इसके बाद जब वह वहां से वापस लौटते समय एक गली से गुजर रही थी, तब अबरार खान जो गली में अपने दोस्तों के साथ बैठा था, ने पीछे से आकर उसके बाल खींचे और कहा कि 'क्या आइटम किधर जा रही हो।' इसके बाद उसने घर आकर सारी बात बताई तब उसके परिजन उसे लेकर पुलिस के पास गए। इसी मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत से समाज को एक उचित संदेश देने की बात कहते हुए जरूरी सजा की मांग की थी। खास कर उन लोगों के लिए जो सड़क पर चलती हुई लड़कियों को छेड़ते हैं और उन्हें परेशान करते हैं।
हालांकि मामले में आरोपी पक्ष मे दावा किया था कि वे लोग उस लड़की के दोस्त थे। उसके माता-पिता ने उन लोगों के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, क्योंकि लड़की के परिजनों को उन लोगों का उसका दोस्त होना पसंद नहीं था।
इस मामले में अदालत ने मोहम्मद अबरार खान को कुछ गंभीर आरोपों से बरी करते हुए यौन उत्पीड़न के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत डेढ़ साल की जेल और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत इसी तरह की सजा दी है। ये दोनों सजा एक साथ ही चलेंगी।