यूपी: महागठबंधन की सियासी खिचड़ी से मुलायम-अखिलेश-नीतीश ने बनाई दूरी
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जदयू सांसद शरद यादव के आवास पर गैर भाजपाई दलों का मजमा तो जुटा, मगर चर्चा सियासत के इतर पूर्व पीएम चौधरी सिंह के व्यक्तित्व के बखान तक ही सीमित रह गई। पूर्व पीएम से जुड़ी किताब के हिंदी अनुवाद के लोकार्पण के बहाने आयोजित जनता परिवार और कांग्रेस के इस जमघट में शामिल नेताओं ने पूर्व पीएम से अपनी नजदीकियों और उनके व्यक्तित्व के बखान तक ही खुद को सीमित रखा।
सपा की ओर से महज सांसद अमर सिंह ने ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तो उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, नीतीश कुमार, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव समारोह से दूर रहे। हालांकि इस आयोजन में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला, जदयू महासचिव केसी त्यागी, रालोद अध्यक्ष अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत चौधरी की मौजूदगी दर्ज कराई।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व पीएम की अंग्रेजी में लिखी गई जीवनी के हिंदी अनुवाद के लोकार्पण में गैरभाजपाई दिग्गज तो जुटे, मगर इस जुटान में कोई सियासी हलचल नहीं दिखाई दी।
यूपी चुनाव से पहले आयोजन को लेकर कई तरह की संभावनाएं थी
लोकार्पण करते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने लेखक के विदेशी होने के बावजूद किए गए व्यापक शोध की प्रशंसा की और सवाल किया कि ऐसा अपने देश में संभव क्यों नहीं है।
अजित सिंह ने बताया कि हिंदी अनुवाद की पहली किस्त है। जल्द ही शेष दो किस्तों को भी हिंदी अनुवाद होगा। जदयू सांसद शरद ने पूर्व पीएम को किसानों का मसीहा करार दिया तो पूर्व पीएम देवगौड़ा ने कहा कि उनमें नेतृत्व की अदभुत क्षमता थी।
गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस आयोजन को लेकर कई तरह की संभावनाएं व्यक्त की जा रही थी। चूंकि पर्दे के पीछे यूपी चुनाव में सपा, कांग्रेस और रालोद के गठबंधन की चर्चा होती रही है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि इस आयोजन के जरिए इस दिशा में कोई ठोस सियासी संदेश सामने आ सकता है।