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MUDA Scam: मुडा मामले में ईडी के सामने पेश हुए शिकायतकर्ता कृष्णा, सबूत पेश करने के लिए किया गया था तलब

Thu, 03 Oct 2024 01:24 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: श्वेता महतो Updated Thu, 03 Oct 2024 01:24 PM IST
सार

ईडी ने 27 सितंबर को सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर का संज्ञान लिया था। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए मैसूर स्थित आरटीआई कार्यकर्ता को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए बुलाया था।

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MUDA Scam complainant Snehamayi Krishna appears before ED to give evidence news in hindi
स्नेहमयी कृष्णा - फोटो : ANI

विस्तार

मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) घोटाला मामले में शिकायत दर्ज करने वालों में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा जांच के संबंध में सबूत देने और रिकॉर्ड पेश करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। ईडी ने 30 सितंबर को मुडा द्वारा पार्वती बीएम को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं को लेकर  मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ पुलिस की एफआईआर के समान प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। 
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ईडी ने 27 सितंबर को सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर का संज्ञान लिया था। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए मैसूर स्थित आरटीआई कार्यकर्ता को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया था। स्नेहमयी कृष्णा की शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उन्होंने ईडी में भी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के साथ ईडी अधिकारियों के सामने पेश होने आया था। मैंने अपनी शिकायत से संबंधित दस्तावेज दे दिए हैं। सिद्धारमैया का मुद्दा एक उदाहरण है, ऐसे हजारों करोड़ों रुपये मुडा घोटाले में शामिल है। इसलिए मैंने गहन जांच के लिए कहा।"
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सिद्धारमैया ने अपनी स्थिति को बीएस येदियुरप्पा की स्थिति से अलग बताया। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री का मामला भूमि अधिसूचना से जुड़ा है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा, "बीएस येदियुरप्पा का मामला मेरे मामले से अलग है। उन्होंने जमीन का अधिसूचना रद्द किया और मैं इसमें शामिल नहीं हूं। मैं इस्तीफा नहीं दूंगा। चाहे ईडी हो या कोई और मैं न्यायिक रूप से लड़ाई लड़ूंगा।"
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क्या है पूरा मामला?
मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। 


मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि  मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।


 
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