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MUDA Scam: सीएम सिद्धारमैया को मिलेगी राहत? एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Thu, 05 Dec 2024 02:40 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 05 Dec 2024 02:40 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने 24 अक्तूबर को  हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दायर की, जिसमें एकल न्यायाधीश की पीठ के फैसले को चुनौती दी गई। सिद्धारमैया मुडा द्वारा अपनी पत्नी पार्वती बीएम को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
 

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MUDA Case: HIGH COURT issues notice on CM Siddaramaiah's appeal against single bench order
सिद्धारमैया, मुख्यमंत्री, कर्नाटक - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अपील पर गुरुवार को राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। दरअसल, सिद्धारमैया ने मुडा साइट आवंटन घोटाले में उनके खिलाफ जांच को मंजूरी देने के राज्यपाल के फैसले को बरकरार रखने के एकल न्यायाधीश पीठ के आदेश को चुनौती दी है।

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मुख्य न्यायाधीश एन वी अंजारिया और न्यायमूर्ति के वी अरविंद की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तारीख तय की। 

क्या है मामला?
बता दें, मुख्यमंत्री ने 24 अक्तूबर को  हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दायर की, जिसमें एकल न्यायाधीश की पीठ के फैसले को चुनौती दी गई। सिद्धारमैया मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा अपनी पत्नी पार्वती बीएम को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
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न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। पीठ ने फैसला सुनाया कि राज्यपाल स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने पूरी तरह से अपने दिमाग का इस्तेमाल किया है। जहां तक मुख्यमंत्री पर मुकदमा चलाने का आदेश का सवाल है, राज्यपाल के कार्यों में कोई गलती नहीं हैं। इसी फैसले के खिलाफ सीएम ने एक याचिका दी थी। मगर एकल पीठ ने 24 सितंबर को खारिज कर दी थी। 
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रिपोर्ट दायर करने का दिया था निर्देश
सिद्धारमैया ने तब एक प्रमुख इलाके में मुडा द्वारा 14 स्थलों के आवंटन में कथित अनियमितताओं में उनके खिलाफ जांच के लिए गहलोत की मंजूरी की वैधता को चुनौती दी थी, जो टीजे अब्राहम, प्रदीप कुमार और स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर आधारित थी। हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश के बाद एक विशेष अदालत ने अगले ही दिन सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस जांच का आदेश दिया था और 24 दिसंबर तक जांच रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया था।

इन लोगों पर भी आरोप
विशेष अदालत के आदेश के बाद मैसूर स्थित लोकायुक्त पुलिस ने 27 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें सिद्धारमैया, उनकी पत्नी, साढू मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराजू (जिनसे स्वामी ने जमीन खरीदकर पार्वती को उपहार में दी थी) तथा अन्य का नाम है।

ईडी ने 30 सितंबर को लोकायुक्त प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दायर की थी और मामले की जांच भी कर रही है। मुडा साइट आवंटन मामले में, यह आरोप लगाया गया है कि सिद्धारमैया की पत्नी को मैसूर (विजयनगर लेआउट तीसरे और चौथे चरण) के एक पॉश क्षेत्र में 14 साइटें आवंटित की गई थीं, जिनकी संपत्ति का मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था, जिसे मुडा द्वारा अधिग्रहित किया गया था।


पार्वती ने आवंटित भूमि को किया वापस
मुडा ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले में 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां उन्होंने एक आवासीय लेआउट विकसित किया था। आरोप है कि मैसूर के बाहरी इलाके में कसारे गांव के सर्वे नंबर 464 पर पार्वती का इस 3.16 एकड़ जमीन पर कोई कानूनी मालिकाना हक नहीं था। हालांकि, साइट आवंटन के विवाद के बाद, पार्वती ने मुडा को लिखा कि वह उन्हें आवंटित 14 साइटों को रद्द कर दे और एमयूडीए ने इसे स्वीकार कर लिया था।

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