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मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल: देश में 31 करोड़ परिवार, 95 फीसदी घरों में बिजली
Sat, 27 Apr 2019 01:21 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 27 Apr 2019 01:21 AM IST
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मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (लोगो)
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (एमआरयूसी) द्वारा प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को समझने के लिए उपभोक्ताओं से जुड़े एक सर्वे में कुछ रोचक बातें सामने आई हैं। शुक्रवार को इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) शीर्षक से 2019 के पहले क्वार्टर की रिपोर्ट के अनुसार आज देश में 31 करोड़ परिवार हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत घरों में बिजली और 72 प्रतिशत में रसोई गैस है पहुंच गई है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि आज पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा, तेलंगाना, केरल में 100 प्रतिशत घरों में बिजली है। जबकि यूपी-बिहार-झारखंड में 90 प्रतिशत से ज्यादा घर बिजली से रोशन हैं। जबकि यूपी में 2017 में जहां 62 प्रतिशत परिवारों में गैस कनेक्शन था, वह 2019 अप्रैल तक 70 प्रतिशत हो चुका है। दिल्ली में आज 99 प्रतिशत लोगों के पास रसोई गैस है।
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पंजाब (94 प्रतिशत), हरियाणा (91 प्रतिशत), हिमाचाल प्रदेश (89 प्रतिशत), उत्तराखंड (87 प्रतिशत) और जम्मू-कश्मीर (77 प्रतिशत) में रसोई गैस कनेक्शन राष्ट्रीय औसत से अधिक है। आज देश में 93 प्रतिशत लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं मगर ठंडी-ठंडी हवा देने वाला एसी यानी एयर कंडीशनर एक महंगी सुख-सुविधा है, जो मात्र 4 प्रतिशत लोगों को ही उपलब्ध है।
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रिपोर्ट के अनुसार 2017 से वर्तमान 2019 तक देश में चार प्रतिशत परिवार बढ़े हैं। 2014 में जहां देश में 26 करोड़ 76 लाख परिवार थे, वहीं 2017 में इनकी संख्या 29 करोड़ 79 लाख थी। 2019 में यह 31 करोड़ हो गई है। खास बात यह है कि शहरों में 20 करोड़ से ज्यादा परिवार रहते हैं। जबकि गांवों में ये 11 करोड़ के करीब हैं। परिवार बढ़ने के साथ उपभोक्ता वस्तुओं की खपत बढ़ी है।
मोबाइल फोन की बढ़त सबसे तेज है। 2014 में 79 प्रतिशत के पास थे, तो 2017 में 92 प्रतिशत के पास। अप्रैल 2019 में मोबाइल 93 प्रतिशत लोगों के पास हैं। घरों में बिजली पहुंचने से सीलिंग फैन आज 75 फीसदी परिवारों में है तो कलर टीवी 62 फीसदी घरों में पहुंच गया है। रेफ्रिजरेटर 30 और वाशिंग मशीन 12 प्रतिशत परिवारों में हैं। महंगे होते पैट्रोल के बावजूद दोपहिया वाहन आज 38 फीसदी परिवारों में है। हालांकि कारें सिर्फ चार प्रतिशत परिवारों के पास है।