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CSS: पदोन्नति में पिछड़े सीएसएस अधिकारियों के समर्थन में आए MPs-MLAs, पिटारे से बाहर नहीं आ रही 'कैडर रिपोर्ट
सार
2014 बैच के एएसओ पदोन्नति के लिए संघर्षरत हैं। उत्तर प्रदेश के सांसद और विधायक, अब सीएसएस अधिकारियों के समर्थन में आ गए हैं। इन जनप्रतिनिधियों ने डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अविलंब एएसओ को पदोन्नत करने का आग्रह किया है।
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केंद्रीय सचिवालय के कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार की रीढ़ कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के 2014 बैच के एएसओ को, तय समय सीमा के बाद भी पदोन्नति नहीं मिल पा रही। ये अधिकारी पदोन्नति के मोर्चे पर लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। पहले 2013 बैच के सहायक सेक्शन अफसरों (एएसओ) को लंबे संघर्ष के बाद पदोन्नति मिली थी। अब 2014 बैच के एएसओ पदोन्नति के लिए संघर्षरत हैं। उत्तर प्रदेश के सांसद और विधायक, अब सीएसएस अधिकारियों के समर्थन में आ गए हैं। इन जनप्रतिनिधियों ने डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अविलंब एएसओ को पदोन्नत करने का आग्रह किया है। दूसरी तरफ डीओपीटी मंत्री ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा, इन अधिकारियों की पदोन्नति की फाइल आगे बढ़ चुकी है। 'सीएसएस' फोरम' के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले भी मंत्री की तरफ से आश्वासन मिलता रहा है, लेकिन पदोन्नति के आदेश जारी नहीं हुए।
उत्तर प्रदेश के कस्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक सौरभ सिंह, 'सोनू', धौरहरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद शंकर अवस्थी और निघासन विधानसभा क्षेत्र के विधायक शशांक वर्मा ने एएसओ की पदोन्नति के लिए डीओपीटी मंत्री को पत्र लिखा है। इनके अलावा खीरी लोकसभा क्षेत्र के सांसद उत्कर्ष वर्मा 'मधुर', उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद गीता शाक्य 'चंद्रप्रभा' और प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद डॉ. एसपी सिंह पटेल ने भी सीएसएस कैडर के अधिकारियों को तुरंत पदोन्नति देने का आग्रह किया है।
इन सांसदों और विधायकों ने अपने पत्र में लिखा है, दस साल की सेवा के निर्धारित कार्यकाल के बाद भी 'एएसओ' को 'एसओ' के पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। नियमानुसार, इन 'एएसओ' को आठ साल में पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। यानी ये 2023 से पदोन्नति के हकदार थे।
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सीएसएस फोरम के मुताबिक, दूसरा बड़ा मुद्दा सीएसएस 'कैडर पुनर्गठन समिति' की रिपोर्ट का है। यह कैडर रिपोर्ट 1000 से भी अधिक दिनों से ठंडे बस्ते में पड़ी है। अगर इस रिपोर्ट को डीओपीटी/पीएमओ से हरी झंडी मिल जाए तो सीएसएस कैडर में पदोन्नति की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। तुरंत प्रभाव से सेक्शन अफसर 'एसओ' के लगभग आठ सौ पद सृजित हो सकते हैं। दूसरे पदों पर भी पदोन्नति की राह खुल जाएगी। 2013 बैच के एएसओ को भी आसानी से पदोन्नति नहीं मिली थी। इसके लिए नॉर्थ ब्लॉक, विजय चौक और विभिन्न मंत्रालयों में विरोध प्रदर्शन किया गया था। तब जाकर पदोन्नति दी गई। अब 2014 बैच के एएसओ को परमोशन देने का मामला अटक गया है।
इन अधिकारियों की एएसओ के पद पर सेवा के 10 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुआ। ये अधिकारी 'एएसओ', पदोन्नति की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। नियम यह कहता है कि इन्हें आठ साल के सेवाकाल के बाद ही पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। लगभग सात-आठ सौ एएसओ, दो वर्ष पहले पदोन्नति के हकदार थे। अब 2015 बैच के 'एएसओ' भी 'एसओ' बनने के लिए पदोन्नति की कतार में हैं। 2014 बैच के कुछ एएसओ को पदोन्नति मिली है, लेकिन वह यूपीएससी के माध्यम से विभागीय परीक्षा पास करने के बाद। पांच साल के बाद इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलता है। अधिकांश एएसओ, वरिष्ठता के आधार पर एसओ की पदोन्नति की लाइन में हैं।
फोरम के सदस्यों का कहना है कि कैडर रिव्यू रिपोर्ट तीन साल पहले तैयार की गई थी। अब वह फाइल डीओपीटी/पीएमओ के पास है। अगर यह रिपोर्ट लागू हो जाए तो करीब 800 पद, एसओ के मिल जाएंगे। इससे सभी स्तरों पर पदोन्नति का रास्ता खुल जाएगा। सीएसएस कैडर में कुल 13500 अधिकारी कार्यरत हैं। सीएसएस फोरम की मांग है कि सीआरसी की रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू किया जाए। सीआरसी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और उसके कार्यान्वयन में हो रही देरी से सीएसएस अधिकारी, पदोन्नति की राह पर पिछड़ गए हैं। सीएसएस कैडर, अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें समय पर पदोन्नति नहीं दी जा रही। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में करीब 2600 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता है। इस बाबत सभी विभागों ने डीओपीटी को यह सूची मुहैया कराई थी। इसमें एएसओ, एसओ, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद शामिल हैं। एक तरफ सीएसएस अधिकारियों को तय समय पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही है तो दूसरी ओर रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा। सीएसएस फोरम, 'कैडर पुनर्गठन समिति' (सीआरसी) की रिपोर्ट को अविलंब लागू करने की मांग कर रही है।
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में जनशक्ति की आवश्यकता का आकलन करने के लिए अक्टूबर, 2022 में एक कैडर पुनर्गठन समिति बनाई गई थी। गहन विचार-विमर्श के बाद सभी विभागों ने तीन वर्ष पहले ही अपनी आवश्यकताएं समिति को भेज दी थीं। आरटीआई से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन साल पहले केवल बीस विभागों के लिए ही 2500 से अधिक जनशक्ति की आवश्यकता थी। यदि सभी विभागों के आंकड़ों पर विचार किया जाए तो यह संख्या बहुत बड़ी होगी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने सीएसएस कैडर के तहत अतिरिक्त पदों की जरुरत बताई है। ऐसे पदों की संख्या 2600 से अधिक है। इनमें सहायक सेक्शन अफसर, सेक्शन अफसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं। जनशक्ति की कमी से विभागों में दक्षता प्रभावित हो रही है। सीएसएस फोरम का कहना है कि दक्षता में कमी, पीएम मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है।
अंडर सेक्रेटरी को डिप्टी सेक्रेटरी के पद तक पहुंचने में 13 साल लग रहे हैं। मौजूदा समय में लगभग 1000 अंडर सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो डिप्टी सेक्रेटरी बनने की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। लंबे समय से इन्हें पदोन्नति का इंतजार है। लगभग 100 डिप्टी सेक्रेटरी ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के सभी पड़ाव पार कर लिए हैं, मगर ये सभी अधिकारी एक ही पद पर काम करने को मजबूर हैं। डेढ़ वर्ष से कैडर समीक्षा रिपोर्ट लंबित है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने केंद्रीय सचिवालय सेवा के तहत अतिरिक्त पदों की आवश्यकता बताई है।
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उत्तर प्रदेश के कस्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक सौरभ सिंह, 'सोनू', धौरहरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद शंकर अवस्थी और निघासन विधानसभा क्षेत्र के विधायक शशांक वर्मा ने एएसओ की पदोन्नति के लिए डीओपीटी मंत्री को पत्र लिखा है। इनके अलावा खीरी लोकसभा क्षेत्र के सांसद उत्कर्ष वर्मा 'मधुर', उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद गीता शाक्य 'चंद्रप्रभा' और प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद डॉ. एसपी सिंह पटेल ने भी सीएसएस कैडर के अधिकारियों को तुरंत पदोन्नति देने का आग्रह किया है।
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इन सांसदों और विधायकों ने अपने पत्र में लिखा है, दस साल की सेवा के निर्धारित कार्यकाल के बाद भी 'एएसओ' को 'एसओ' के पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। नियमानुसार, इन 'एएसओ' को आठ साल में पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। यानी ये 2023 से पदोन्नति के हकदार थे।
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सीएसएस फोरम के मुताबिक, दूसरा बड़ा मुद्दा सीएसएस 'कैडर पुनर्गठन समिति' की रिपोर्ट का है। यह कैडर रिपोर्ट 1000 से भी अधिक दिनों से ठंडे बस्ते में पड़ी है। अगर इस रिपोर्ट को डीओपीटी/पीएमओ से हरी झंडी मिल जाए तो सीएसएस कैडर में पदोन्नति की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। तुरंत प्रभाव से सेक्शन अफसर 'एसओ' के लगभग आठ सौ पद सृजित हो सकते हैं। दूसरे पदों पर भी पदोन्नति की राह खुल जाएगी। 2013 बैच के एएसओ को भी आसानी से पदोन्नति नहीं मिली थी। इसके लिए नॉर्थ ब्लॉक, विजय चौक और विभिन्न मंत्रालयों में विरोध प्रदर्शन किया गया था। तब जाकर पदोन्नति दी गई। अब 2014 बैच के एएसओ को परमोशन देने का मामला अटक गया है।
इन अधिकारियों की एएसओ के पद पर सेवा के 10 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुआ। ये अधिकारी 'एएसओ', पदोन्नति की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। नियम यह कहता है कि इन्हें आठ साल के सेवाकाल के बाद ही पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। लगभग सात-आठ सौ एएसओ, दो वर्ष पहले पदोन्नति के हकदार थे। अब 2015 बैच के 'एएसओ' भी 'एसओ' बनने के लिए पदोन्नति की कतार में हैं। 2014 बैच के कुछ एएसओ को पदोन्नति मिली है, लेकिन वह यूपीएससी के माध्यम से विभागीय परीक्षा पास करने के बाद। पांच साल के बाद इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलता है। अधिकांश एएसओ, वरिष्ठता के आधार पर एसओ की पदोन्नति की लाइन में हैं।
फोरम के सदस्यों का कहना है कि कैडर रिव्यू रिपोर्ट तीन साल पहले तैयार की गई थी। अब वह फाइल डीओपीटी/पीएमओ के पास है। अगर यह रिपोर्ट लागू हो जाए तो करीब 800 पद, एसओ के मिल जाएंगे। इससे सभी स्तरों पर पदोन्नति का रास्ता खुल जाएगा। सीएसएस कैडर में कुल 13500 अधिकारी कार्यरत हैं। सीएसएस फोरम की मांग है कि सीआरसी की रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू किया जाए। सीआरसी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और उसके कार्यान्वयन में हो रही देरी से सीएसएस अधिकारी, पदोन्नति की राह पर पिछड़ गए हैं। सीएसएस कैडर, अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें समय पर पदोन्नति नहीं दी जा रही। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में करीब 2600 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता है। इस बाबत सभी विभागों ने डीओपीटी को यह सूची मुहैया कराई थी। इसमें एएसओ, एसओ, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद शामिल हैं। एक तरफ सीएसएस अधिकारियों को तय समय पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही है तो दूसरी ओर रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा। सीएसएस फोरम, 'कैडर पुनर्गठन समिति' (सीआरसी) की रिपोर्ट को अविलंब लागू करने की मांग कर रही है।
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में जनशक्ति की आवश्यकता का आकलन करने के लिए अक्टूबर, 2022 में एक कैडर पुनर्गठन समिति बनाई गई थी। गहन विचार-विमर्श के बाद सभी विभागों ने तीन वर्ष पहले ही अपनी आवश्यकताएं समिति को भेज दी थीं। आरटीआई से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन साल पहले केवल बीस विभागों के लिए ही 2500 से अधिक जनशक्ति की आवश्यकता थी। यदि सभी विभागों के आंकड़ों पर विचार किया जाए तो यह संख्या बहुत बड़ी होगी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने सीएसएस कैडर के तहत अतिरिक्त पदों की जरुरत बताई है। ऐसे पदों की संख्या 2600 से अधिक है। इनमें सहायक सेक्शन अफसर, सेक्शन अफसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं। जनशक्ति की कमी से विभागों में दक्षता प्रभावित हो रही है। सीएसएस फोरम का कहना है कि दक्षता में कमी, पीएम मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है।
अंडर सेक्रेटरी को डिप्टी सेक्रेटरी के पद तक पहुंचने में 13 साल लग रहे हैं। मौजूदा समय में लगभग 1000 अंडर सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो डिप्टी सेक्रेटरी बनने की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। लंबे समय से इन्हें पदोन्नति का इंतजार है। लगभग 100 डिप्टी सेक्रेटरी ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के सभी पड़ाव पार कर लिए हैं, मगर ये सभी अधिकारी एक ही पद पर काम करने को मजबूर हैं। डेढ़ वर्ष से कैडर समीक्षा रिपोर्ट लंबित है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने केंद्रीय सचिवालय सेवा के तहत अतिरिक्त पदों की आवश्यकता बताई है।
सीएसएस फोरम के चुनाव में अध्यक्ष बने देवप्रिय गुप्ता, महासचिव पद पर निर्वाचित हुए यतेंद्र चंदेला
- फोटो : अमर उजाला
पिछले सप्ताह हुए सीएसएस फोरम के चुनाव में देवप्रिय गुप्ता को अध्यक्ष चुना गया है। उपाध्यक्ष के पद पर अनु अरोड़ा, रविंद्र व आकाश भारद्वाज निर्वाचित हुए हैं। महासचिव पद यतेंद्र चंदेला और संगठन सचिव के पद पर विश्वदीप दहिया चुने गए हैं। समन्वय सचिव के पद पर मयंक शर्मा ने जीत दर्ज कराई है। सचिव पद की जिम्मेदारी, दीपाक्षी सारस्वत, सुनील कुमार, प्रवेश कुमारी, विपिन कुमार और मीनू संभालेंगे। खजांची के पद पर सवीन कुमार और ऑडिटर का कामकाज सौरव भाटिया देखेंगे।
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